राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में अब अंग्रेजी शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों की वास्तविक समझ और बोलने-पढ़ने की क्षमता का भी आकलन किया जाएगा। इसी दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी मौखिक पठन प्रवाह कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम 4 मई से 7 मई के बीच आयोजित होगा, जिसके तहत विद्यार्थियों की रीडिंग स्किल का परीक्षण किया जाएगा।
इस नई पहल का उद्देश्य बच्चों में अंग्रेजी भाषा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाना और उनकी संवाद क्षमता को विकसित करना है। अब तक सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी मुख्य रूप से पढ़ाई जाती थी, लेकिन विद्यार्थियों की बोलने और पढ़ने की दक्षता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा था। इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल विद्यार्थियों की वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाएगा, बल्कि आगे की रणनीति तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। विद्यार्थियों के आकलन के लिए शाला दर्पण शिक्षक ऐप के ओआरएफ मॉड्यूल का उपयोग किया जाएगा, जिससे मूल्यांकन की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनेगी। इस तकनीकी प्रणाली के जरिए प्रत्येक विद्यार्थी की प्रगति को रिकॉर्ड किया जाएगा, जिससे भविष्य में उनके विकास की दिशा तय करना आसान होगा।
इस कार्यक्रम को राज्य में लागू करने के पीछे नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की सोच भी जुड़ी हुई है। राज्य सरकार ने 29 मार्च 2025 को ‘मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान’ की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और विद्यार्थियों को बेहतर सीखने का वातावरण प्रदान करना है। अंग्रेजी विषय में इस पहल को पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया था, जिसमें सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसी सफलता के आधार पर अब इसे पूरे प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में विस्तारित किया जा रहा है।
झालावाड़ जिले में इस अभियान को विशेष रूप से व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। यहां के 1301 सरकारी स्कूलों में यह कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इस कार्यक्रम की सफलता में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि उनके अधीनस्थ शिक्षक इस कार्यक्रम की पूरी जानकारी रखें और इसे गंभीरता से लागू करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि विषय शिक्षक मैपिंग की प्रक्रिया 1 मई तक हर हाल में पूरी कर ली जाए।
यदि मैपिंग समय पर पूरी नहीं होती है, तो ओआरएफ मॉड्यूल सही तरीके से काम नहीं कर पाएगा, जिससे पूरे आकलन प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। इसलिए इस कार्य की जिम्मेदारी संबंधित पीईईओ और यूसीईईओ अधिकारियों को सौंपी गई है, ताकि सभी स्कूलों में समयबद्ध तरीके से तैयारी पूरी हो सके।
कार्यक्रम के दौरान आकलन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या पक्षपात की संभावना कम हो जाएगी। यह प्रणाली विद्यार्थियों की वास्तविक क्षमता को सामने लाने में सहायक होगी और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को मजबूती देगी।
इसी बीच माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एक अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम भी उठाया है। उप जिला शिक्षा अधिकारी (शारीरिक शिक्षा) के पद पर चयनित अधिकारियों के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया तय की गई है। वर्ष 2025-26 की विभागीय पदोन्नति समिति के तहत प्राध्यापक-शारीरिक शिक्षा और कोच पद से 9 अधिकारियों का चयन किया गया था, जिनके पदोन्नति आदेश 15 अप्रैल को जारी किए गए थे।
अब इन अधिकारियों की पदस्थापन प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए चरणबद्ध कार्यक्रम जारी किया गया है। 27 अप्रैल को कार्मिकों की आपत्तियों पर विचार करने के बाद स्थायी वरीयता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 28 अप्रैल को रिक्त पदों की सूची जारी की जाएगी और 29 अप्रैल को चयनित अधिकारी अपने पसंदीदा विद्यालय या कार्यालय का ऑनलाइन चयन कर ऑप्शन लॉक करेंगे।
राज्य सरकार के निर्देशानुसार सभी स्कूलों के संस्थाप्रधानों द्वारा विषय मैपिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि 1 मई तक सभी 1301 स्कूलों में यह प्रक्रिया पूरी तरह से संपन्न हो जाए।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग के एडीईओ सीताराम मीणा के अनुसार, यह अभियान राज्य सरकार की एक सराहनीय पहल है, जिससे बच्चों में अंग्रेजी की मौखिक दक्षता विकसित होगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बेहतर तरीके से अपनी बात अंग्रेजी में व्यक्त कर सकेंगे।


