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मच्छरों से बचाव पर हर साल करोड़ों खर्च कर रहे भारतीय

मच्छरों से बचाव पर हर साल करोड़ों खर्च कर रहे भारतीय

देश में जैसे-जैसे गर्मी और उमस बढ़ती है, वैसे-वैसे मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ने लगता है। शाम होते ही बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है और घरों के भीतर भी मच्छरों से राहत मिलना आसान नहीं रहता। यही वजह है कि अब मच्छरों से बचाव के लिए लोग पहले से कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं और विभिन्न प्रकार के रेप्लेंट उत्पादों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने इस बदलते ट्रेंड और इसके आर्थिक प्रभाव को स्पष्ट रूप से उजागर किया है।

Grand View Research और Horizon Databook की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में मच्छरों को भगाने वाले उत्पादों का बाजार लगातार विस्तार कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 में इस बाजार का आकार लगभग 402.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो भारतीय मुद्रा में करीब 3,350 करोड़ रुपये के बराबर है। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि लोग अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर खर्च कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में इस बाजार में और भी तेजी से वृद्धि देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि वर्ष 2033 तक यह बाजार करीब 755 मिलियन डॉलर यानी लगभग 6,300 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। 2026 से 2033 के बीच इस क्षेत्र में लगभग 8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की जा सकती है। यह वृद्धि न केवल उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर लोगों की जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

मच्छरों के बढ़ते खतरे के पीछे एक बड़ी वजह उनसे फैलने वाली गंभीर बीमारियां हैं। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जिका वायरस और जापानी एन्सेफलाइटिस जैसी बीमारियां हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। इन बीमारियों से बचाव के लिए ही लोग मच्छर भगाने वाले उत्पादों का सहारा लेते हैं, जिनमें कॉइल, लिक्विड वेपोराइजर, स्प्रे, क्रीम और मच्छरदानी जैसे विकल्प शामिल हैं।

एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों से हर साल दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक मच्छरों के काटने से संबंधित बीमारियों के कारण करीब 10 लाख लोगों की जान चली जाती है। यह आंकड़ा इस खतरे की गंभीरता को दर्शाता है और यही कारण है कि लोग अब बचाव के उपायों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

भारत जैसे देश में, जहां मौसम की विविधता और घनी आबादी के कारण मच्छरों के पनपने की संभावना अधिक रहती है, वहां इस तरह के उत्पादों की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ती जा रही है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी अब लोग मच्छरों से बचाव के प्रति जागरूक हो रहे हैं। सरकार द्वारा समय-समय पर चलाए जाने वाले जागरूकता अभियान भी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इस बढ़ती मांग ने बाजार में प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा दिया है। विभिन्न कंपनियां नए-नए और अधिक प्रभावी उत्पाद बाजार में उतार रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, प्राकृतिक और हर्बल उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है, क्योंकि लोग केमिकल आधारित उत्पादों के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर सतर्क हो रहे हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रेप्लेंट उत्पादों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए साफ-सफाई बनाए रखना, पानी जमा न होने देना और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना भी उतना ही जरूरी है। यदि इन उपायों को अपनाया जाए तो मच्छरों की संख्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि मच्छरों से बचाव अब केवल एक सामान्य आवश्यकता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य निवेश बन चुका है। आने वाले वर्षों में इस बाजार के और अधिक विस्तार की संभावना है, जिससे यह क्षेत्र आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। साथ ही, यह भी जरूरी है कि लोग जागरूकता के साथ-साथ स्वच्छता और सतर्कता को भी अपनाएं, ताकि मच्छरों से होने वाले खतरों को कम किया जा सके।

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