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गहलोत-पायलट मुलाकात पर सियासत तेज, भाजपा का तीखा हमला

गहलोत-पायलट मुलाकात पर सियासत तेज, भाजपा का तीखा हमला

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तब तेज हो गई जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की दिल्ली में हुई मुलाकात चर्चा का विषय बन गई। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के बीच यह मुलाकात खास मानी जा रही है। खासकर उस समय जब दोनों ने सार्वजनिक रूप से हाथ मिलाया और कैमरों के सामने सहज बातचीत की, इसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और इसे महज एक दिखावा बताया है।

जयपुर स्थित भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब किसी राजनीतिक दल या उसके नेताओं को यह साबित करने की जरूरत पड़ जाए कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं है, तो यह अपने आप में इस बात का सबसे बड़ा संकेत होता है कि मतभेद वास्तव में मौजूद हैं। उनके अनुसार, यह मुलाकात और फोटो खिंचवाने का पूरा घटनाक्रम कांग्रेस के अंदर चल रहे अंतर्विरोधों को छिपाने का प्रयास है।

मदन राठौड़ ने आगे कहा कि जिस तरह से अशोक गहलोत ने मीडिया के सामने यह कहा कि “देखिए हम साथ-साथ हैं, फिर यह मत कहना कि बनती नहीं है,” वह अपने आप में बहुत कुछ बयान करता है। राठौड़ के मुताबिक, यदि सब कुछ सामान्य होता तो इस तरह से सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी कहा कि फोटो खिंचवाकर यह साबित करने की कोशिश करना कि सब कुछ ठीक है, दरअसल अंदरूनी मतभेदों की गहराई को ही उजागर करता है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दोनों नेताओं के पुराने विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में एक-दूसरे को लेकर जो कड़े बयान दिए गए हैं, वे इतनी आसानी से भुलाए नहीं जा सकते। उनके अनुसार, जिन नेताओं ने एक-दूसरे को सार्वजनिक मंचों से कठोर शब्दों में संबोधित किया हो, उनके बीच वास्तविक सामंजस्य स्थापित होना आसान नहीं होता। उन्होंने इस पूरी स्थिति को “नाटक” करार देते हुए कहा कि यह केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास है।

इस दौरान मदन राठौड़ ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधा। खासतौर पर राहुल गांधी के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मुद्दों को लेकर बात की थी। राठौड़ ने कहा कि यदि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यह कह रहे हैं कि राहुल गांधी ने पहली बार इन वर्गों के मुद्दों को उठाया है, तो इससे यह सवाल उठता है कि क्या इससे पहले इन वर्गों को केवल वोट बैंक के रूप में देखा जाता था। उनके अनुसार, यह बयान कांग्रेस की राजनीति के चरित्र को उजागर करता है।

इसी बातचीत में राठौड़ ने रिफाइनरी में लगी आग की घटना पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया और कहा कि सरकार इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारणों का पता चलेगा और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विपक्ष से इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति न करने की अपील भी की।

उधर, जिस मुलाकात ने इस पूरे विवाद को जन्म दिया, वह नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में हुई थी। यहां कांग्रेस की ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान दोनों नेताओं ने न केवल हाथ मिलाया, बल्कि मीडिया के सामने मुस्कुराते हुए बातचीत भी की। गहलोत ने इस दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में पत्रकारों से कहा कि “फोटो ले लो, फिर कहोगे कि बनती नहीं है,” जो अब राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बन गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात भले ही सामान्य प्रतीत हो, लेकिन इसके पीछे कई संकेत छिपे हो सकते हैं। एक ओर जहां कांग्रेस इसे एकजुटता का संदेश देने के रूप में देख सकती है, वहीं विपक्ष इसे आंतरिक मतभेदों को छिपाने की कोशिश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐसे में यह साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

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