राजस्थान में बार काउंसिल के चुनाव के दौरान बुधवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब जयपुर स्थित राजस्थान उच्च न्यायालय के पोलिंग सेंटर पर मतदान प्रक्रिया के बीच जमकर हंगामा शुरू हो गया। हालात इतने बिगड़ गए कि चुनाव अधिकारियों को अंततः इस केंद्र पर वोटिंग स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। यह घटनाक्रम न केवल चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है, बल्कि अधिवक्ता समुदाय के बीच बढ़ते तनाव को भी उजागर करता है।
जानकारी के अनुसार, जयपुर में हाईकोर्ट परिसर में बनाए गए इस प्रमुख पोलिंग सेंटर पर लगभग 14,800 मतदाता पंजीकृत थे और मतदान के लिए 28 बूथ स्थापित किए गए थे। सुबह मतदान शुरू होने के कुछ ही समय बाद कुछ प्रत्याशियों और उनके समर्थकों पर अव्यवस्था फैलाने के आरोप लगे। बताया जा रहा है कि मतदान केंद्र के भीतर अनुशासन बनाए रखने में कठिनाई आने लगी और विभिन्न गुटों के बीच बहस और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कुछ उम्मीदवारों ने बड़े पैमाने पर फर्जी मतदान के आरोप लगाए। इन आरोपों के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया और कई प्रत्याशियों ने मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इस बीच मौजूद अन्य उम्मीदवारों और समर्थकों ने भी विरोध दर्ज कराया, जिससे केंद्र पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
चुनाव अधिकारी बसंत सिंह छाबा ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पहले मतदान को आधे घंटे के लिए रोका। जब हालात सामान्य नहीं हुए तो मतदान को एक घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बावजूद जब विवाद और हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था, तब अधिकारियों ने अंततः इस पोलिंग सेंटर पर मतदान को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब आगे की कार्रवाई और मतदान की नई तिथि को लेकर निर्णय हाई पावर कमेटी द्वारा लिया जाएगा।
राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव इस बार कई कारणों से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पूरे प्रदेश में 23 सदस्यों के चुनाव के लिए कुल 234 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चुनाव में लगभग 84,292 मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करना था। इनमें सबसे अधिक मतदाता राजधानी जयपुर में हैं, जहां करीब 22,000 अधिवक्ता वोट देने के पात्र हैं। ऐसे में जयपुर के प्रमुख पोलिंग सेंटर पर मतदान स्थगित होने से पूरे चुनावी कार्यक्रम पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि जयपुर के अलावा अन्य जिलों से भी कुछ स्थानों पर हंगामे की खबरें सामने आई हैं, लेकिन वहां मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह स्थगित नहीं करना पड़ा। इसके विपरीत जयपुर के हाईकोर्ट पोलिंग सेंटर की स्थिति अधिक गंभीर रही, जिसके चलते यह कदम उठाना पड़ा। इस घटनाक्रम ने चुनाव की पारदर्शिता और व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस चुनाव के तहत पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न जिलों से प्राप्त बैलेट पेपर की गिनती 29 अप्रैल से जोधपुर में शुरू होनी थी। लेकिन जयपुर में मतदान स्थगित होने के कारण अब मतगणना की प्रक्रिया पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। माना जा रहा है कि जब तक जयपुर में मतदान प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक नई काउंटिंग तिथि घोषित नहीं की जाएगी। इससे चुनाव परिणामों में भी देरी होना तय माना जा रहा है।
इस बार के चुनाव की एक विशेष बात यह भी है कि महिला अधिवक्ताओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए पहली बार सीटों का आरक्षण किया गया है। कुल 25 पदों में से 7 सीटें महिलाओं के लिए निर्धारित की गई हैं, जिनमें से 5 सीटें आरक्षित हैं और 2 सीटों पर महिला अधिवक्ताओं को नामित किया जाना है। यह कदम अधिवक्ता समुदाय में लैंगिक संतुलन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि जयपुर में मतदान स्थगित होने से महिला उम्मीदवारों में निराशा का माहौल देखने को मिल रहा है, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया में बाधा आने से उनके प्रयासों पर भी असर पड़ सकता है।
चुनाव अधिकारी बसंत सिंह छाबा ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी की जाएगी और सभी पक्ष सहयोग करेंगे।


