अजमेर में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता पूजा त्रिपाठी ने महिला आरक्षण बिल और प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संदेश को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। मंगलवार को अजमेर पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार गंभीर नहीं है और इसे केवल राजनीतिक प्रचार के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महिलाओं के अधिकारों के नाम पर वोट बैंक की राजनीति कर रही है।
अजमेर में शहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा पूजा त्रिपाठी का स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने प्रेस से बातचीत में कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो पाने के बाद भाजपा ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस को घेरने की रणनीति अपनाई। उनके अनुसार, सरकार अपनी विफलता छिपाने के लिए विपक्ष पर आरोप लगा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि महिला आरक्षण को लागू करने की उसकी स्पष्ट इच्छा नहीं थी।
त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि 28 मिनट के संबोधन में उन्होंने 56 बार कांग्रेस का नाम लेकर हमला किया। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं तो जनता उम्मीद करती है कि राष्ट्रीय मुद्दों, महिलाओं के अधिकारों और नीतिगत दिशा पर बात होगी, लेकिन इस भाषण में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अधिक नजर आए। उनके अनुसार, यह संदेश महिलाओं के लिए कम और चुनावी राजनीति के लिए अधिक था।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने महिला आरक्षण के मुद्दे को परिसीमन से जोड़कर पेश किया और महिलाओं के कंधे पर राजनीतिक रणनीति चलाने की कोशिश की। त्रिपाठी ने कहा कि देश की आधी आबादी महिलाओं की है और उनके अधिकारों को किसी अन्य राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़ना उचित नहीं है। उनका कहना था कि महिलाएं हर उस प्रक्रिया का विरोध करेंगी जिसमें उनके नाम का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना चाहती, तो वह संसद में व्यापक सहमति बनाकर महिला आरक्षण लागू करा सकती थी। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के खिलाफ नहीं है, बल्कि आज भी महिला आरक्षण के समर्थन में खड़ा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण में उचित हिस्सेदारी दी जाए।
त्रिपाठी ने कहा कि यदि सरकार लोकसभा की वर्तमान संरचना में महिलाओं के लिए सीटें जोड़ने जैसा व्यावहारिक रास्ता अपनाती, तो विपक्ष इसका समर्थन करता। उनके अनुसार, भाजपा ने ऐसा कोई ईमानदार प्रयास नहीं किया और केवल राजनीतिक माहौल बनाने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को पहले से पता था कि प्रस्ताव जिस रूप में लाया जा रहा है, उस पर मतभेद होंगे, फिर भी उसे राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने संसद की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि दर्शक दीर्घा में मौजूद महिलाएं भी कुछ समय बाद विपक्ष के समर्थन में नारे लगाने लगीं। त्रिपाठी का कहना था कि महिलाएं समझ चुकी हैं कि उन्हें केवल प्रतीकात्मक रूप से आगे रखा जा रहा है, जबकि वास्तविक प्रतिनिधित्व देने की इच्छाशक्ति कमजोर है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं राजनीतिक बेईमानी को पहचानती हैं और अब केवल घोषणाओं से प्रभावित नहीं होंगी।
पूजा त्रिपाठी ने कहा कि प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम संदेश में महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए थी कि उनकी अपेक्षाओं पर सरकार खरी नहीं उतर सकी। लेकिन इसके बजाय पूरा भाषण कांग्रेस की आलोचना में बीत गया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे गंभीर विषय को राजनीतिक विरोधियों को घेरने के मंच में बदलना प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा सरकार विपक्ष से संवाद नहीं करती, संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं होने देती और एकतरफा फैसले लेने की कोशिश करती है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में सहमति, बहस और संवाद बेहद जरूरी हैं, लेकिन मौजूदा सरकार इन पर ध्यान नहीं देती।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने महंगाई, एलपीजी संकट और अंतरराष्ट्रीय हालात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश को इन गंभीर मुद्दों पर संबोधित करना चाहिए था। जनता रसोई गैस की कीमतों, रोजगार, आर्थिक दबाव और वैश्विक संकटों से जूझ रही है, लेकिन सरकार का ध्यान राजनीतिक भाषणों पर अधिक है। उनके अनुसार, राष्ट्र के नाम संदेश राष्ट्रीय चुनौतियों पर होना चाहिए, न कि विपक्ष की आलोचना पर।
विदेश नीति को लेकर भी त्रिपाठी ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक दक्षिण देशों का नेतृत्व करना चाहिए था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में देश केवल दर्शक बनकर रह गया है। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति पहले जैसी प्रभावशाली नहीं दिख रही। साथ ही विदेश मंत्रालय की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार विदेश नीति में स्पष्ट दिशा देने में सफल नहीं रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा देश की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय रहा है। ऐसे में जब भी इस पर बहस होती है, सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों इसे अपने-अपने नजरिए से जनता के सामने रखते हैं। अजमेर में पूजा त्रिपाठी का बयान भी इसी व्यापक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है।


