अजमेर में भाजपा की वरिष्ठ नेता और अजमेर दक्षिण विधायक अनिता भदेल ने महिला आरक्षण और संसद में लंबित विधेयकों को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ आगे नहीं बढ़ पाने के बाद विपक्षी दलों द्वारा जश्न मनाना देश की महिलाओं का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दलों को महिलाओं के अधिकारों और भागीदारी की चिंता होनी चाहिए, वही राजनीतिक लाभ के लिए इस विषय पर बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
अजमेर दक्षिण से विधायक अनिता भदेल ने प्रेस वार्ता के दौरान संसद में चर्चा के दौरान सामने आए मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने संविधान संशोधन विधेयक-2026, परिसीमन विधेयक-2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के रवैये पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर रचनात्मक चर्चा और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने के बजाय विपक्ष केवल विरोध की राजनीति करता दिखाई दिया।
भदेल ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिलाने के उद्देश्य से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लेकर आई थी। यह पहल महिलाओं को राजनीतिक रूप से अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम थी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की मांग उठती रही है और केंद्र सरकार ने इस दिशा में ठोस निर्णय लिया, लेकिन विपक्ष ने सकारात्मक सहयोग नहीं दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव का खुलकर समर्थन नहीं किया। उनके अनुसार, यह रवैया दर्शाता है कि विपक्ष महिलाओं की आकांक्षाओं और उनके राजनीतिक अधिकारों के प्रति गंभीर नहीं है। भदेल ने कहा कि देश की करोड़ों महिलाएं चाहती हैं कि उन्हें नीति निर्माण और लोकतांत्रिक संस्थाओं में अधिक भागीदारी मिले, लेकिन विपक्ष ने उनकी उम्मीदों को आघात पहुंचाया है।
अजमेर विधायक ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र के इतिहास का निराशाजनक क्षण बताया। उनका कहना था कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर जब महिलाओं के प्रतिनिधित्व जैसे विषय पर सहमति नहीं बन पाती, तो यह देश के लिए चिंताजनक संकेत है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों से नहीं, बल्कि नीतिगत फैसलों और राजनीतिक इच्छाशक्ति से संभव होता है।
अनिता भदेल ने विपक्ष पर क्षेत्रीय और सामाजिक मुद्दों के नाम पर भ्रम फैलाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ओबीसी महिलाओं, परिसीमन और दक्षिण भारत के नाम पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई। उनके अनुसार, महिला आरक्षण जैसे राष्ट्रीय मुद्दे को जातीय और क्षेत्रीय राजनीति से जोड़कर विपक्ष ने जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह तरीका लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करता है और मूल मुद्दों से ध्यान हटाता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर भी निशाना साधा। भदेल ने कहा कि इतने गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर जिम्मेदार बयान देने के बजाय राहुल गांधी हल्की टिप्पणी करते नजर आए। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं के अधिकारों और प्रतिनिधित्व की बात हो रही हो, तब सभी दलों के नेताओं को परिपक्वता और गंभीरता दिखानी चाहिए।
भदेल ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दलों से समर्थन की अपील की थी। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण को राष्ट्रीय मुद्दा मानते हुए सर्वदलीय सहमति की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने इस अवसर को भी राजनीतिक विवाद का विषय बना दिया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए काम कर रही है। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, सुरक्षा देना और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का प्रयास भी इसी सोच का हिस्सा है।
अजमेर विधायक ने यह भरोसा भी दिलाया कि लोकसभा या संसद में आई बाधाओं के बावजूद केंद्र सरकार इस दिशा में प्रयास जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि नारी सम्मान, सामाजिक न्याय और महिलाओं को बराबरी का अवसर दिलाने की लड़ाई रुकने वाली नहीं है। आने वाले समय में सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए फिर से प्रयास करेगी और महिलाओं को उनका उचित अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा हमेशा से देश की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है। हर दल सार्वजनिक रूप से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात करता है, लेकिन जब विधायी प्रक्रिया की बात आती है तो मतभेद सामने आ जाते हैं। ऐसे में इस विषय पर बयानबाजी भी तेज हो जाती है। अनिता भदेल का यह बयान भी उसी राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है, जहां भाजपा महिला सशक्तिकरण को प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने रख रही है।
अजमेर और राजस्थान की राजनीति में अनिता भदेल का बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्य में महिला मतदाता बड़ी संख्या में चुनावी परिणामों को प्रभावित करती हैं। ऐसे में महिला आरक्षण और महिलाओं के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दल खुलकर अपनी स्थिति रखने लगे हैं। भाजपा इसे महिलाओं के अधिकारों का सवाल बता रही है, जबकि विपक्ष अपनी अलग दलीलें दे रहा है।


