राजस्थान के कोटा संभाग में इस वर्ष गेहूं की बढ़ी हुई पैदावार को देखते हुए राज्य सरकार ने खरीद प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिल सके और मंडियों में किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो। इसी दिशा में ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Heeralal Nagar ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर कई अहम निर्देश दिए हैं।
कोटा सर्किट हाउस में आयोजित इस बैठक में मंत्री नागर ने Food Corporation of India के अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि भामाशाह मंडी में प्रतिदिन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 80 हजार कट्टे गेहूं की तुलाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि इस बार गेहूं की बुआई अधिक होने के कारण उत्पादन भी बढ़ा है, ऐसे में यदि खरीद की गति नहीं बढ़ाई गई तो मंडियों में गेहूं का भारी दबाव बन सकता है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जिसे हर हाल में टालना जरूरी है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मंडियों से गेहूं का समय पर उठाव सुनिश्चित करना उतना ही आवश्यक है जितना कि तुलाई की प्रक्रिया। यदि खरीदे गए गेहूं का उठाव समय पर नहीं हुआ, तो भंडारण की समस्या उत्पन्न हो सकती है और इससे पूरी खरीद व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इस संदर्भ में उन्होंने एफसीआई के महाप्रबंधक राजेश चौधरी से चर्चा कर अतिरिक्त श्रमिकों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए, ताकि गोदामों में गाड़ियों को जल्दी खाली किया जा सके और नई आवक के लिए जगह बनाई जा सके।
बैठक में यह भी तय किया गया कि बड़े खरीद केंद्रों से गेहूं के परिवहन के लिए रेल रेक की व्यवस्था रोटेशन के आधार पर की जाए। इस कदम से बड़ी मात्रा में गेहूं को कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकेगा और मंडियों में अनावश्यक भीड़ से बचा जा सकेगा। मंत्री नागर ने स्पष्ट किया कि यदि उठाव की प्रक्रिया में देरी हुई तो इसका सीधा असर किसानों और पूरी आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ेगा।
इसके साथ ही उन्होंने राज्य की विभिन्न खरीद एजेंसियों जैसे राजफैड और तिलम संघ द्वारा की जा रही खरीद की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के पंजीकरण के आधार पर ही कूपन जारी किए जाएं, ताकि किसान तय समय पर अपनी उपज लेकर मंडी पहुंच सकें और उन्हें तुलाई के लिए इंतजार न करना पड़े। इस प्रक्रिया से न केवल समय की बचत होगी बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।
मंत्री नागर ने किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को उनकी उपज का मूल्य समय पर मिल जाता है, तो इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और वे आगामी सीजन के लिए बेहतर तैयारी कर पाते हैं। इसलिए भुगतान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
भंडारण की समस्या को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर सहकारिता विभाग के अतिरिक्त गोदाम किराए पर लिए जाएं, ताकि अधिक मात्रा में गेहूं को सुरक्षित रखा जा सके। इसके अलावा, एफसीआई द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे बारदाने की गुणवत्ता में सुधार करने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि बारदाना मजबूत और गुणवत्ता युक्त होगा, तो गेहूं की पैकिंग और भंडारण सुरक्षित रहेगा और नुकसान की संभावना कम होगी।
इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह है कि गेहूं खरीद पूरी तरह व्यवस्थित, पारदर्शी और किसान हितैषी तरीके से संचालित हो। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसानों को किसी भी स्तर पर परेशानी का सामना न करना पड़े और उनकी उपज का उचित मूल्य उन्हें समय पर मिल सके।
कोटा संभाग में जारी इन सख्त निर्देशों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार इस बार गेहूं खरीद को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतना चाहती। बढ़े हुए उत्पादन के बीच यदि खरीद और उठाव की प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती है, तो इससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि राज्य की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था भी मजबूत होगी। आने वाले दिनों में इन निर्देशों का प्रभाव मंडियों में स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है, जिससे पूरी खरीद प्रक्रिया अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनने की उम्मीद है।


