जोधपुर में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल का रविवार को महत्वपूर्ण दौरा रहा। उनके जोधपुर पहुंचने पर सर्किट हाउस में पार्टी कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। दौरे के दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए महिला आरक्षण, नारी वंदन बिल, परिसीमन, पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व जैसे कई राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से अपनी राय रखी।
डॉ. अग्रवाल ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस विषय को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के उच्च सदन में पर्याप्त बहुमत नहीं होने के कारण नारी वंदन बिल को अपेक्षित तरीके से आगे नहीं बढ़ाया जा सका, लेकिन भाजपा इस मुद्दे से पीछे हटने वाली नहीं है। उनका कहना था कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाना पार्टी की प्राथमिकता है और इसके लिए भविष्य में भी निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर कांग्रेस का इतिहास सकारात्मक नहीं रहा है। उनके अनुसार, भाजपा महिलाओं को नेतृत्व में आगे लाने की पक्षधर रही है, जबकि कांग्रेस ने हमेशा इस मुद्दे पर राजनीति की है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और वे यह समझती हैं कि कौन-सी पार्टी उनके सशक्तिकरण के लिए वास्तविक रूप से काम कर रही है।
परिसीमन के मुद्दे पर बोलते हुए भाजपा नेता ने कहा कि देशहित में परिसीमन बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय के साथ जनसंख्या, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक संतुलन बदलता है, इसलिए संसदीय और विधानसभा सीटों की समीक्षा जरूरी हो जाती है। उनके अनुसार, यदि सीटों की संख्या बढ़ती है तो महिलाओं, युवाओं और नए सामाजिक वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि परिसीमन केवल सीटों की पुनर्संरचना नहीं है, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने की प्रक्रिया है। इससे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा और राजनीतिक भागीदारी अधिक संतुलित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन में परिसीमन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए डॉ. अग्रवाल ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने महिलाओं को हमेशा पुरुषों की तुलना में पीछे रखने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज जब महिलाओं को अधिक राजनीतिक अधिकार देने की बात हो रही है, तब विपक्ष इसे समर्थन देने के बजाय राजनीतिक विवाद का विषय बना रहा है। उनके अनुसार, महिलाओं को बराबरी का अवसर देना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।
राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “जादूगर” और “मैजिशियन” कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि संसद जैसे गरिमामय मंच पर शब्दों की मर्यादा का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राजनीतिक संवाद का स्तर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। संवैधानिक संस्थाओं और संसद की गरिमा बनाए रखना सभी नेताओं की जिम्मेदारी है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि सामान्य भाषा में देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में लोगों का दिल जीतने की अद्भुत क्षमता है। उनके अनुसार, मोदी देश के 146 करोड़ नागरिकों से भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच सीधा संवाद, विश्वास और नेतृत्व क्षमता के कारण प्रधानमंत्री मोदी लगातार लोकप्रिय बने हुए हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने संक्षिप्त लेकिन संकेतपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वहां “खेल पहले ही हो चुका है”, जिसे राजनीतिक विश्लेषक राज्य की मौजूदा परिस्थितियों और आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। भाजपा लंबे समय से पश्चिम बंगाल में संगठन मजबूत करने में लगी है और पार्टी वहां खुद को प्रमुख विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है।
डॉ. अग्रवाल के इस बयान को केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। महिला आरक्षण, परिसीमन और क्षेत्रीय राजनीति जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श में लाकर पार्टी विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। राजस्थान जैसे राज्यों में संगठनात्मक सक्रियता के साथ ऐसे बयानों का उद्देश्य कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाना भी माना जा रहा है।
जोधपुर दौरे को आगामी चुनावी तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा संगठन लगातार राज्यों में सक्रियता बढ़ा रहा है और राष्ट्रीय नेताओं के दौरे इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद, संगठन समीक्षा और मीडिया के माध्यम से राजनीतिक संदेश देना इन दौरों का प्रमुख उद्देश्य होता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में केंद्र में रह सकते हैं। भाजपा इन्हें विकास, प्रतिनिधित्व और सुधार के एजेंडे से जोड़कर प्रस्तुत कर रही है, जबकि विपक्ष इनके क्रियान्वयन और समयसीमा पर सवाल उठा सकता है।


