भाजपा के प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद डॉ. राधामोहन अग्रवाल सोमवार को जोधपुर पहुंचे, जहां उन्होंने सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए महिला आरक्षण, कांग्रेस की राजनीति, ओबीसी प्रतिनिधित्व और राजस्थान की रिफाइनरी परियोजना को लेकर कई अहम बयान दिए। उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि जब महिलाओं को उनका हक देने का समय आया तो विपक्ष पीछे हट गया। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के अपने संकल्प पर कायम है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान की महिलाओं का देश की आजादी की लड़ाई में ऐतिहासिक योगदान रहा है। यह केवल राजस्थान की नहीं, बल्कि पूरे देश की पहचान है कि महिलाओं ने हर दौर में सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने त्याग, संघर्ष और नेतृत्व का परिचय दिया, लेकिन स्वतंत्रता के बाद उनके योगदान को वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी वे हकदार थीं।
उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद इतिहास को कुछ परिवारों तक सीमित कर दिया गया, जबकि सच्चाई यह है कि देश की स्वतंत्रता के लिए लाखों लोगों ने बलिदान दिया था। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने संघर्ष की अग्रिम पंक्ति में रहकर भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि आज भी महिलाएं समाज, प्रशासन, शिक्षा, व्यापार और राजनीति में मजबूत योगदान दे रही हैं, इसलिए उन्हें निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का अवसर मिलना चाहिए।
महिला आरक्षण को लेकर भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आई। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री ने यह महसूस किया कि महिलाओं के सक्रिय योगदान और नेतृत्व के बिना लोकतंत्र को पूर्ण नहीं माना जा सकता। इसी सोच के साथ महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण देने की दिशा में कदम उठाया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती थी कि परिसीमन प्रक्रिया और जनगणना के बाद महिला आरक्षण को लागू किया जाए, लेकिन यदि समयसीमा लंबी होती है तो उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती थी। डॉ. अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सकारात्मक सहयोग नहीं दिया और महिलाओं की उम्मीदों को झटका पहुंचाया। उन्होंने इसे महिलाओं के साथ राजनीतिक विश्वासघात करार दिया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के संवैधानिक संशोधन के लिए संसद में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। भाजपा की इच्छा शक्ति होने के बावजूद आवश्यक संख्या बल नहीं होने के कारण प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने दावा किया कि यदि पार्टी को पर्याप्त बहुमत मिला होता तो महिला आरक्षण का रास्ता और तेज़ी से साफ हो चुका होता। उन्होंने महिलाओं को भरोसा दिलाया कि भाजपा ने 2029 तक आरक्षण लागू करने का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
ओबीसी आरक्षण से जुड़े सवाल पर डॉ. अग्रवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछड़े वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के सवाल पर कांग्रेस का इतिहास स्पष्ट नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों और राजनीतिक संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर पहले भी कांग्रेस ने निर्णायक पहल नहीं की। उनका कहना था कि भविष्य में परिस्थितियां अनुकूल बनती हैं तो इस विषय पर भी गंभीरता से विचार किया जा सकता है, लेकिन कांग्रेस को पहले अपने पुराने रुख का जवाब देना चाहिए।
राजस्थान के आर्थिक विकास को लेकर उन्होंने राज्य में बन रही रिफाइनरी परियोजना को बेहद महत्वपूर्ण बताया। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि इस परियोजना से राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और राज्य की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। उनके अनुसार, रिफाइनरी शुरू होने के बाद प्रदेश को लगभग 6000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है, जिससे विकास कार्यों को गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना में करीब 80 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जो राजस्थान के औद्योगिक विकास के लिहाज से बड़ा कदम है। इसके साथ ही हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे। उनका कहना था कि बड़ी औद्योगिक परियोजनाएं केवल निवेश नहीं लातीं, बल्कि स्थानीय व्यापार, परिवहन, सेवा क्षेत्र और कौशल विकास को भी बढ़ावा देती हैं।
जोधपुर दौरे के दौरान भाजपा प्रदेश प्रभारी के बयानों को आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। महिला आरक्षण, सामाजिक प्रतिनिधित्व और रोजगार जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा इन विषयों पर खुद को महिलाओं, युवाओं और विकास समर्थक दल के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला मतदाताओं और युवा वर्ग को साधने के लिए भाजपा लगातार ऐसे मुद्दों को प्रमुखता दे रही है, जिनका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। वहीं कांग्रेस और विपक्ष इन आरोपों का जवाब किस तरह देते हैं, इस पर भी नजर रहेगी।


