राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि किसी भी मजबूत लोकतंत्र की नींव प्रभावी कानून निर्माण पर टिकी होती है और कानून निर्माण की प्रक्रिया में विधायी मसौदा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून का प्रारूप ऐसा होना चाहिए जिसमें जनता की आकांक्षाएं, जरूरतें और हित स्पष्ट रूप से दिखाई दें। साथ ही भाषा इतनी सरल और स्पष्ट हो कि आम नागरिक भी उसे आसानी से समझ सके। देवनानी ने यह भी कहा कि न्याय का वास्तविक सार तभी सामने आता है जब कानून की भाषा जटिल नहीं बल्कि सहज और पारदर्शी हो।
वे शनिवार को जयपुर स्थित राजस्थान विधानसभा में आयोजित “इंटरनेशनल लेजिस्लेटिव ड्रॉफ्टिंग” विषयक 37वें अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग योजना के अंतर्गत लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बांग्लादेश, भूटान, घाना, केन्या, श्रीलंका, तंजानिया, जाम्बिया सहित 17 देशों के 43 प्रतिभागियों ने भाग लिया। देवनानी ने सभी विदेशी प्रतिनिधियों से परिचय किया और उनके साथ सामूहिक फोटो भी खिंचवाया।
अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राजस्थान विधानसभा में किसी भी विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया अत्यंत सावधानी, गंभीरता और पारदर्शिता के साथ पूरी की जाती है। उन्होंने बताया कि यहां कानून की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि कानून व्यवहारिक, प्रभावी और जनहितकारी हो। उन्होंने कहा कि कानून केवल कागजों पर लिखे प्रावधान नहीं होते, बल्कि वे समाज की दिशा तय करते हैं, इसलिए उनका निर्माण जिम्मेदारी और दूरदृष्टि के साथ होना चाहिए।
देवनानी ने विधेयक पारित होने की संसदीय प्रक्रिया को विस्तार से समझाते हुए कहा कि किसी भी प्रस्तावित कानून को तीन प्रमुख चरणों से गुजरना पड़ता है। पहले चरण में विधेयक सदन में प्रस्तुत किया जाता है। इसके बाद दूसरे चरण में उस पर गहन चर्चा होती है। कई बार विषय की गंभीरता को देखते हुए विशेष समितियों को भेजा जाता है, जहां हर पहलू का सूक्ष्म अध्ययन किया जाता है। समिति की सिफारिशों और सुझावों के बाद विधेयक को बेहतर स्वरूप दिया जाता है। इसके बाद सदन में मतदान की प्रक्रिया होती है और अंतिम निर्णय लिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह पूरी व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि कानून मजबूत, व्यावहारिक और जनता के हित में हो।
उन्होंने कहा कि स्पष्ट और सरल भाषा में तैयार कानून ही प्रभावी न्याय सुनिश्चित कर सकता है। यदि कानून की भाषा कठिन होगी तो आम नागरिक उसे समझ नहीं पाएंगे और इससे न्याय की पहुंच सीमित हो सकती है। इसलिए विधायी मसौदा तैयार करते समय भाषा, भावना और उद्देश्य तीनों का संतुलन जरूरी है।
राजस्थान विधानसभा को लोकतंत्र का सच्चा मंदिर बताते हुए देवनानी ने कहा कि यह केवल एक भवन नहीं बल्कि जनता की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला संस्थान है। यहां राज्य के विकास, सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कानून पारित किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान विधानसभा इस समय अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने का गौरवशाली अवसर मना रही है। राज्य निर्माण के शुरुआती दौर से लेकर आधुनिक डिजिटल शासन तक विधानसभा ने लाखों लोगों के सपनों को कानूनी स्वरूप देने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा राज्य के हर वर्ग, हर क्षेत्र और हर नागरिक की आवाज को मंच देती है। लोकतंत्र की यही ताकत है कि जनता के प्रतिनिधि सदन में बैठकर नीतियां बनाते हैं और राज्य की दिशा तय करते हैं।
भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए देवनानी ने कहा कि स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे करने के बाद देश अब अमृतकाल की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले 25 वर्ष भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और वर्ष 2047 में देश स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा। उन्होंने कहा कि यह समय आत्ममंथन का है और साथ ही भविष्य के बड़े लक्ष्य तय करने का भी अवसर है। भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र बनाने में लोकतांत्रिक संस्थाओं की बड़ी भूमिका रहेगी।
जयपुर की पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गुलाबी शहर का गुलाबी सदन यानी राजस्थान विधानसभा पूरे देश के लिए आदर्श बन चुका है। उन्होंने कहा कि विधानसभा ने अपने सभी विधायी अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में बदलकर आधुनिक प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यह परिवर्तन केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक गति भी बढ़ी है। डिजिटल व्यवस्था से जनता को सूचनाएं अधिक सरलता से उपलब्ध हो रही हैं और शासन व्यवस्था मजबूत हो रही है।
उन्होंने विधानसभा भवन की स्थापत्य कला की भी सराहना की और कहा कि यह भवन पारंपरिक राजस्थानी शैली तथा आधुनिक जरूरतों का सुंदर मिश्रण है। यह न केवल वास्तुकला का उदाहरण है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक भी है।
विधानसभा परिसर में बने आधुनिक डिजिटल संग्रहालय का जिक्र करते हुए देवनानी ने कहा कि यह संग्रहालय जनता, विशेषकर युवाओं को लोकतंत्र से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यहां आने वाले लोग राज्य की लोकतांत्रिक यात्रा, इतिहास और कानून निर्माण की प्रक्रिया को करीब से समझ सकते हैं। इससे नागरिकों में लोकतांत्रिक जागरूकता बढ़ती है और नई पीढ़ी को संस्थाओं के महत्व का ज्ञान होता है।
विदेशी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा के वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों के साथ संवाद उनके ज्ञान को और समृद्ध करेगा। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किताबों से आगे जाकर व्यावहारिक अनुभव देते हैं। कानून बनाना वैश्विक शासन व्यवस्था की साझा भाषा है और जब विभिन्न देशों के प्रतिनिधि एक-दूसरे से सीखते हैं तो लोकतंत्र और मजबूत होता है।
उन्होंने कहा कि भारत की यात्रा के दौरान विदेशी प्रतिभागी “पधारो म्हारे देश” की भावना को करीब से समझ सकेंगे। भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक परंपराएं और अतिथि सत्कार दुनिया के लिए प्रेरणा हैं। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग, प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक रफीक खान सहित कई विधायक और अधिकारी मौजूद रहे। यह आयोजन विधायी सहयोग, लोकतांत्रिक संवाद और वैश्विक साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


