देश में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और इसी क्रम में राजस्थान में इसका पहला चरण 1 मई 2026 से शुरू होने जा रहा है। यह चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना से जुड़ा होगा, जिसमें राज्य के हर घर और भवन का विस्तृत विवरण एकत्र किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं और बड़ी संख्या में कार्मिकों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है।
इस बार की जनगणना कई मायनों में विशेष मानी जा रही है, क्योंकि पहली बार देश में स्वगणना का विकल्प भी दिया जा रहा है। भारत की जनगणना के इस नए प्रयोग के तहत आम नागरिक स्वयं एक वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। यह सुविधा 1 मई से 15 मई तक उपलब्ध रहेगी, जिसके दौरान परिवार अपने घर बैठे ही जनगणना से संबंधित विवरण ऑनलाइन भर सकेंगे। इसे डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो लोगों की भागीदारी को बढ़ाने के साथ-साथ प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आसान बनाने का प्रयास है।
स्वगणना के बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। यह पारंपरिक प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि कोई भी परिवार या मकान जनगणना से छूट न जाए। प्रशासन का मानना है कि स्वगणना और प्रत्यक्ष सर्वेक्षण दोनों को मिलाकर इस बार अधिक सटीक और व्यापक डेटा प्राप्त किया जा सकेगा।
इस बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य में लगभग 1 लाख 60 हजार प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं। इन सभी कार्मिकों को पहले चरण की शुरुआत से पहले प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अपने कार्य को सही तरीके से समझ सकें और बिना किसी त्रुटि के डेटा संग्रह कर सकें। प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 मई से 15 मई के बीच तहसील, नगर परिषद और नगरपालिका स्तर पर आयोजित किए जाएंगे।
जनगणना कार्य में शामिल अधिकांश प्रगणक राज्य के शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में शिक्षक और वरिष्ठ शिक्षक शामिल हैं। यह परंपरा पहले से चली आ रही है, क्योंकि शिक्षक समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े होते हैं और उन्हें स्थानीय स्तर पर बेहतर समझ होती है। इस कार्य के लिए उन्हें अतिरिक्त मानदेय भी दिया जाएगा, जिससे उनकी भागीदारी को प्रोत्साहन मिल सके।
हर प्रगणक को औसतन लगभग 150 मकानों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसका मतलब है कि उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने क्षेत्र के सभी घरों का सर्वेक्षण कर आवश्यक जानकारी एकत्र करनी होगी। यह कार्य समयबद्ध और जिम्मेदारीपूर्ण होने के कारण काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जो कार्मिक पहले चरण में शामिल होंगे, वही आगामी दूसरे चरण में भी अपनी सेवाएं देंगे। जनगणना 2027 का दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होकर अप्रैल 2027 तक पूरा होने का प्रस्ताव है।
इस बीच एक और महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया है, जो शिक्षकों और अन्य कार्मिकों से जुड़ा हुआ है। जनगणना कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार से यह अनुरोध किया गया है कि इस प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों के तबादलों पर अस्थायी रोक लगाई जाए। यदि ऐसा होता है, तो राज्य के करीब 1.60 लाख कार्मिकों के ट्रांसफर प्रभावित हो सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो कर्मचारी जनगणना कार्य में प्रशिक्षित हैं, वही पूरे अभियान के दौरान अपनी जिम्मेदारी निभाते रहें और बीच में बदलाव से कार्य प्रभावित न हो।
जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं होती, बल्कि यह देश की नीतियों और योजनाओं का आधार भी बनती है। इसके माध्यम से सरकार को यह जानकारी मिलती है कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी है, लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति क्या है, और किन क्षेत्रों में विकास की अधिक आवश्यकता है। इसी आधार पर भविष्य की योजनाएं तैयार की जाती हैं।
राजस्थान में जनगणना 2027 का यह पहला चरण प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वगणना जैसी नई पहल के साथ यह प्रक्रिया अधिक आधुनिक और सहभागी बनती दिखाई दे रही है। हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए जरूरी है कि आम नागरिक भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लें और सही जानकारी प्रदान करें।


