जयपुर स्थित सचिवालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कर्मचारियों और अधिकारियों के हित में कई बड़े फैसलों की घोषणा कर प्रशासनिक तंत्र में नई ऊर्जा का संचार किया है। इस कार्यक्रम को न केवल एक औपचारिक आयोजन माना जा रहा है, बल्कि इसे राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में भी देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सबसे पहले सहायक शासन सचिव के 15 नए पद सृजित करने का ऐलान किया। इस फैसले से सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों के लिए पदोन्नति के नए अवसर खुलेंगे और प्रशासनिक कार्यों में गति आने की उम्मीद है। लंबे समय से पदों की कमी के कारण कर्मचारियों को पदोन्नति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, ऐसे में यह निर्णय उनके लिए राहत लेकर आया है।
इसके साथ ही सरकार ने पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर एक और अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने अनुभव की अनिवार्य शर्त में दो वर्ष की छूट देने की घोषणा की है। इस फैसले का सीधा लाभ सचिवालय के बड़े वर्ग को मिलने की संभावना है, क्योंकि कई कर्मचारी केवल अनुभव की शर्त पूरी न होने के कारण पदोन्नति से वंचित रह जाते थे। अब इस छूट के बाद वे भी उच्च पदों पर पहुंच सकेंगे, जिससे उनके मनोबल में वृद्धि होगी और कार्यकुशलता भी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं के बाद सचिवालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की सकारात्मक पहल ने कर्मचारियों को राहत का एहसास कराया है। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब इस योजना के दायरे को बढ़ाते हुए पुत्रवधू को भी इसका लाभ देने का निर्णय लिया गया है। इस बदलाव को सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे परिवार के अधिक सदस्यों को सुरक्षा और सहारा मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर भी चर्चा की और इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की। यह समिति वेतन संरचना और अन्य लाभों की समीक्षा करेगी और सरकार को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी। इससे आने वाले समय में कर्मचारियों को आर्थिक रूप से भी लाभ मिलने की संभावना है।
इस अवसर पर शासन सचिवालय प्रांगण में राजस्थान सचिवालय सेवा अधिकारी संघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान राज्य के मंत्री कन्हैयालाल चौधरी भी मौजूद रहे। यह आयोजन प्रशासनिक एकता और संगठनात्मक मजबूती का प्रतीक माना गया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी पद केवल अधिकार का प्रतीक नहीं होता, बल्कि उसके साथ बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उन्होंने अधिकारियों को अपने आचरण में संतुलन, जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सचिवालय राज्य की आठ करोड़ जनता की उम्मीदों और योजनाओं का केंद्र है, जहां से लिए गए निर्णय सीधे आम जनता के जीवन को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे निष्ठा और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें और जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने ‘मिशन कर्मयोगी’ का जिक्र करते हुए कहा कि आधुनिक समय में प्रशासनिक कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग अनिवार्य हो गया है। ई-गवर्नेंस और पेपरलेस व्यवस्था को अपनाने से कार्य में पारदर्शिता और गति दोनों आएंगी।
राज्य सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने जल और बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन क्षेत्रों में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा, जिससे प्रदेश के विकास को नई दिशा मिलेगी। यह बयान इस बात का संकेत भी देता है कि सरकार बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर है और उन्हें सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव बी. श्रीनिवास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष अगवन शर्मा भी उपस्थित रहे। इस आयोजन ने एक ओर जहां प्रशासनिक तंत्र को नई दिशा देने का काम किया, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के मनोबल को भी मजबूत किया है।


