राजस्थान की सियासत में इन दिनों बयानबाजी और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज है। इसी क्रम में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पाली में मीडिया से बातचीत के दौरान अपने हालिया बयान पर सफाई देते हुए मारवाड़ी कहावत का वास्तविक अर्थ स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा कही गई कहावत का आशय केवल इतना था कि व्यक्ति को जीवन में वही मिलता है, जो उसके भाग्य में लिखा होता है, और इसलिए हर व्यक्ति को अपने भाग्य विधाता से प्रार्थना करनी चाहिए।
पाली के रोटरी क्लब में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान राठौड़ ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि उनके मन में किसी के प्रति कोई अनादर नहीं है और संगठन में सभी नेता उनके लिए समान रूप से सम्माननीय हैं। खासतौर पर उन्होंने वसुंधरा राजे का उल्लेख करते हुए कहा कि वे उनके लिए अत्यंत सम्मानित नेता हैं और उनके अपमान के बारे में वे कभी सोच भी नहीं सकते।
दरअसल, कुछ दिन पहले बीकानेर दौरे के दौरान राठौड़ ने एक मारवाड़ी कहावत का जिक्र किया था, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग अर्थ निकाले जाने लगे थे। उस समय उनसे वसुंधरा राजे के कार्यों को लेकर सवाल पूछा गया था, जिसके जवाब में उन्होंने कहा था कि ऐसा नहीं है कि उनके काम नहीं हो रहे हैं, बल्कि हर काम हो रहा है, लेकिन हर बार हर किसी को सब कुछ नहीं मिल सकता। इसी संदर्भ में उन्होंने कहावत सुनाई थी— “चिट्ठी चूर-चूर करे, मांगे दाल और घी, मोदी सूं कुण झगड़ो करे, चिट्ठी खाणी नाळ।” इस कहावत को लेकर कई तरह की राजनीतिक व्याख्याएं सामने आईं, जिस पर अब उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति रखी है।
राठौड़ ने यह भी कहा कि संगठन में एकजुटता सबसे महत्वपूर्ण है और सभी नेताओं को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा एक अनुशासित संगठन है और यहां व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक नेतृत्व की भावना के साथ काम किया जाता है।
इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने हाल ही में एस. जयशंकर के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें पाकिस्तान को “दलाल देश” बताया गया था। राठौड़ ने कहा कि इस बयान पर राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके एक कांग्रेस नेता की प्रतिक्रिया समझ से परे है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के विदेश मंत्री ने राष्ट्रीय हित में बयान दिया, तो उस पर आपत्ति क्यों जताई गई। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतिक्रिया से यह सवाल खड़ा होता है कि देश के प्रति उनकी निष्ठा कहां है।
राठौड़ ने आगे कहा कि यदि यही बयान पाकिस्तान के किसी नेता द्वारा दिया जाता, तो स्थिति अलग होती, लेकिन भारत के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा दिए गए बयान पर इस तरह की प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हर मुद्दे पर राजनीति करने से बाज नहीं आती।
बातचीत के दौरान उन्होंने बाड़मेर रिफाइनरी परियोजना का भी जिक्र किया और इसे राजस्थान के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की शुरुआत वसुंधरा राजे के नेतृत्व में हुई थी, लेकिन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस पर अपेक्षित गति से काम नहीं हो पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के बजाय उसमें देरी की।
राठौड़ ने कहा कि अब भाजपा सरकार के प्रयासों से यह परियोजना अपने अंतिम चरण में है और 21 अप्रैल को इसका उद्घाटन प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इस रिफाइनरी से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 90 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और राज्य सरकार को करीब 8 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने इसे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम बताया।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रिफाइनरी से पेट्रोल, डीजल, गैस, केरोसिन और क्रूड ऑयल जैसे उत्पादों का उत्पादन होगा, जिससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इससे छोटे व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा, जैसे चाय विक्रेता, होटल व्यवसायी और टैक्सी चालक।
राठौड़ ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि उसने रिफाइनरी परियोजना को लेकर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पहले जल्दबाजी में उद्घाटन करवा दिया, लेकिन जो समझौता किया गया वह आर्थिक रूप से उचित नहीं था। उनके अनुसार, उस समय करीब 3,736 करोड़ रुपये बिना ब्याज के 15 वर्षों तक देने का समझौता किया गया, जो राज्य के हित में नहीं था। बाद में भाजपा सरकार ने इस समझौते को संशोधित कर इसे अधिक व्यावहारिक बनाया।


