राजस्थान की सियासत में एक बार फिर तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला, जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डीडवाना में आयोजित अंबेडकर जयंती समारोह के मंच से भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य और केंद्र की सरकारें संविधान की मूल भावना के विपरीत कार्य कर रही हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने में लगी हैं। उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
डीडवाना में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति देखने को मिली। हेलीपैड से लेकर मेघवाल समाज भवन तक जनसैलाब उमड़ पड़ा, जो इस आयोजन के सामाजिक और राजनीतिक महत्व को दर्शाता है। अपने संबोधन में गहलोत ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश को ऐसा संविधान दिया, जो सभी धर्मों, जातियों और वर्गों को समान अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने चिंता जताई कि आज उसी संविधान की भावना को कमजोर किया जा रहा है और इसके मूल सिद्धांतों की अनदेखी हो रही है।
गहलोत ने अपने भाषण में सीधे तौर पर भजनलाल शर्मा और नरेंद्र मोदी की सरकारों को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें संवैधानिक संकट उत्पन्न कर रही हैं, जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद या कमजोर किया जा रहा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि इसके लिए मजबूत संस्थाओं और पारदर्शी शासन की आवश्यकता होती है, जो वर्तमान परिस्थितियों में कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर कटाक्ष करते हुए गहलोत ने कहा कि एक समय ऐसा था जब ये संगठन न तो तिरंगे को स्वीकार करता था और न ही संविधान को, लेकिन अब बदलती परिस्थितियों में इन्हें इन्हीं मूल्यों को स्वीकार करना पड़ रहा है। उनका यह बयान राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर विचारधारा के स्तर पर भाजपा और उससे जुड़े संगठनों को चुनौती देता है।
पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर भी गहलोत ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चुनाव समय पर नहीं कराए जा रहे हैं, जो एक गंभीर संवैधानिक चूक है। उन्होंने यह तक कहा कि यदि सरकार समय पर चुनाव कराने में विफल रहती है, तो राज्यपाल और राष्ट्रपति को हस्तक्षेप करना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए। यह बयान राज्य की संवैधानिक व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधे सवाल खड़ा करता है।
गहलोत ने अपनी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए वर्तमान सरकार पर उन्हें बंद करने या कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि उन्हें रास्ते में एक व्यक्ति मिला, जिसके पास एक खाली थैला था जिस पर उनकी तस्वीर छपी थी। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि पहले यह थैला राशन से भरा होता था, लेकिन अब खाली दिया जा रहा है। इस उदाहरण के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार को योजनाओं के नाम या तस्वीर बदलने के बजाय उन्हें प्रभावी तरीके से जारी रखना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में बुजुर्गों और विधवाओं को कई महीनों से पेंशन नहीं मिल रही है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा उन्होंने चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना देश में एक मिसाल थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे भी कमजोर कर दिया है, जिससे आमजन को मिलने वाले लाभ में कमी आई है।
सांप्रदायिक राजनीति के मुद्दे पर बोलते हुए गहलोत ने ‘हिंदू खतरे में है’ जैसे नारों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास में जब मुगलों और अंग्रेजों के शासनकाल में भी हिंदू धर्म सुरक्षित रहा, तो आज लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की बातें करना गलत है। उन्होंने 36 कौमों के भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने की अपील की और कहा कि समाज को बांटने की बजाय जोड़ने की राजनीति की आवश्यकता है।
कानून-व्यवस्था को लेकर भी गहलोत ने सरकार को घेरा और कहा कि प्रदेश में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग होने के बावजूद इस दिशा में अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नफरत की राजनीति से दूर रहें और विकास तथा सकारात्मक सोच को अपनाएं।
अपने संबोधन के अंत में गहलोत ने कहा कि बाबा साहेब द्वारा दिया गया संविधान देश की असली पहचान है और इसकी रक्षा करना हर नागरिक और राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा संविधान की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी। उनके इस बयान ने न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा को तेज किया है, बल्कि आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति की दिशा पर भी असर डालने के संकेत दिए हैं।


