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JJM घोटाले में सुबोध अग्रवाल की बढ़ीं मुश्किलें, कोर्ट ने 2 दिन की रिमांड दी

JJM घोटाले में सुबोध अग्रवाल की बढ़ीं मुश्किलें, कोर्ट ने 2 दिन की रिमांड दी

जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़े कथित 960 करोड़ रुपये के घोटाले में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। लंबे समय तक फरार रहने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दिल्ली से गिरफ्तार किए गए अग्रवाल को सोमवार 13 अप्रैल को एक बार फिर कोर्ट में पेश किया गया, जहां मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उन्हें दो दिन की रिमांड पर भेज दिया। अब उन्हें 15 अप्रैल को दोबारा कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।

इस हाई प्रोफाइल मामले में एसीबी की टीम ने अदालत से तीन दिन की रिमांड की मांग की थी, ताकि पूछताछ को आगे बढ़ाया जा सके और कथित घोटाले से जुड़े अन्य पहलुओं को उजागर किया जा सके। हालांकि, कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद केवल दो दिन की रिमांड मंजूर की। यह फैसला इस मामले की जांच की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे एजेंसी को सीमित समय में ही अहम जानकारियां जुटानी होंगी।

गौरतलब है कि जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर बजट आवंटित किया गया था। इसी योजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर यह मामला सामने आया है, जिसमें करोड़ों रुपये के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। एसीबी का दावा है कि इस घोटाले में कई स्तरों पर मिलीभगत हुई है, जिसकी जांच जारी है।

इस बीच, सुबोध अग्रवाल की ओर से अदालत में अंतरिम जमानत याचिका भी दायर की गई थी। याचिका में उनकी सास के निधन का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए राहत मांगी गई थी। हालांकि अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया, जिससे उनकी कानूनी स्थिति और कठिन हो गई है। अदालत का यह फैसला इस बात का संकेत देता है कि न्यायालय इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और फिलहाल किसी भी प्रकार की राहत देने के पक्ष में नहीं है।

कोर्ट में पेशी के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सुबोध अग्रवाल ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूछताछ में पूरा सहयोग किया है और उनसे जो भी सवाल पूछे गए, उनका उन्होंने जवाब दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि फाइनेंस कमेटी के कुल 37 मामलों में से केवल चार उनके कार्यकाल से जुड़े हैं, जबकि बाकी 33 मामले दूसरे कार्यकाल के दौरान हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से सुधांश पंत के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि 600 करोड़ रुपये के मामले उन्हीं के समय के हैं।

अग्रवाल ने एसीबी की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी उन मामलों की जांच कर रही है, जिनमें कथित तौर पर कोई वित्तीय लेनदेन नहीं हुआ, जबकि जिन मामलों में वास्तव में पैसे का गबन हुआ है, उनकी अनदेखी की जा रही है। उनका यह बयान जांच एजेंसी और आरोपी के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है, जो आने वाले दिनों में इस केस को और जटिल बना सकता है।

वहीं दूसरी ओर, एसीबी ने अदालत में दोबारा रिमांड की मांग करते हुए कहा कि मामले की गहराई से जांच के लिए आरोपी से और पूछताछ जरूरी है। एजेंसी का मानना है कि इस घोटाले में कई और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है और वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला को समझने के लिए समय की आवश्यकता है।

सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी मुद्दा भी सामने आया, जब अग्रवाल के वकील ने रिमांड प्रार्थना पत्र की कॉपी न दिए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने अदालत को बताया कि कानून के अनुसार आरोपी के वकील को इस तरह के दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि वे अपने मुवक्किल का प्रभावी बचाव कर सकें। इस पर एसीबी के वकील ने दलील दी कि यह दस्तावेज केस डायरी का हिस्सा है, जिसे साझा नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है, उसमें इस तरह के घोटाले के आरोप लगना गंभीर चिंता का विषय है।

राजस्थान में इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। एसीबी की कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम के रूप में देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और अदालत में होने वाली सुनवाई इस मामले की तस्वीर को और स्पष्ट करेंगी।

फिलहाल, सुबोध अग्रवाल की रिमांड अवधि के दौरान एसीबी की पूछताछ इस पूरे मामले में कई अहम खुलासे कर सकती है। 15 अप्रैल को होने वाली अगली पेशी पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, जहां यह तय होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और इस कथित घोटाले में किन-किन नामों का खुलासा होता है।

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