राजस्थान के भरतपुर जिले के रूपवास कस्बे में प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध तेज हो गया है। शहरवासियों ने इस परियोजना के खिलाफ एकजुट होकर क्षेत्रीय विधायक डॉ. ऋतु बनावत को पत्र सौंपते हुए स्पष्ट रूप से मांग की है कि रेलवे फाटक के ऊपर ओवरब्रिज का निर्माण नहीं किया जाए। लोगों का कहना है कि इस परियोजना से शहर की संरचना, व्यापार और सामाजिक जीवन पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि रूपवास में पहले से ही बाईपास क्षेत्र में रेलवे लाइन के ऊपर एक ओवरब्रिज मौजूद है, जो यातायात को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में शहर के बीचोंबीच एक और ओवरब्रिज बनाना अनावश्यक है। उनका कहना है कि यदि यह परियोजना लागू होती है, तो इसके निर्माण के लिए दर्जनों मकानों और दुकानों को तोड़ा जाएगा, जिससे न केवल लोगों का आर्थिक नुकसान होगा बल्कि शहर की रौनक और पहचान भी खत्म हो जाएगी।
इस मुद्दे पर जानकारी देते हुए भारतीय किसान संघ से जुड़े अरुण परमार ने बताया कि रेलवे विभाग की ओर से फाटक के पास मिट्टी और पानी की जांच का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह संकेत है कि विभाग रेलवे फाटक को बंद कर दोनों ओर लगभग 650-650 मीटर तक शहर के बीच से होकर ओवरब्रिज बनाने की योजना पर काम कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह योजना लागू हुई तो शहर का मुख्य बाजार बुरी तरह प्रभावित होगा और व्यापारिक गतिविधियां ठप पड़ सकती हैं।
शहरवासियों का कहना है कि रेलवे फाटक के दूसरी ओर स्थित डहर क्षेत्र, सिंघावली रोड और पुरा मालौनी चकसामरी जैसे इलाकों का शहर के मुख्य बाजार से सीधा संपर्क टूट जाएगा। इससे वहां रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे उनकी जीवनशैली प्रभावित होगी। इसके साथ ही व्यापारियों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
लोगों ने यह भी मुद्दा उठाया कि इस ओवरब्रिज के निर्माण में केन्द्र सरकार के करोड़ों रुपये खर्च होंगे, जबकि इसकी वास्तविक आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि यदि रेलवे फाटक को सुचारू रूप से संचालित रखा जाए और वहां दो कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी जाए, तो यातायात को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। इस तरह सरकार का अनावश्यक खर्च भी बचाया जा सकता है।
यातायात व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय लोगों ने अपने तर्क प्रस्तुत किए हैं। उनका कहना है कि भरतपुर रोड पर स्थित राजस्थान रोडवेज बस स्टैंड के सक्रिय होने के बाद अधिकांश सरकारी और निजी बसों का संचालन वहीं से होने लगा है। इसके अलावा टैम्पो और अन्य छोटे वाहन भी अब हाइवे बाईपास का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में रेलवे फाटक पर यातायात का दबाव पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। इस स्थिति में ओवरब्रिज निर्माण की जरूरत और भी कम हो जाती है।
इसी बीच, रूपवास रेलवे स्टेशन से जुड़ा एक और मुद्दा भी सामने आया है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। आगरा कैंट से असरवा अहमदाबाद के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन के रूपवास स्टेशन पर ठहराव को बंद कर दिया गया है। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर शहरवासियों ने रेल मंत्री के नाम एक ज्ञापन विधायक डॉ. ऋतु बनावत को सौंपा।
इस मामले में विधायक ने रेल संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरिशंकर शर्मा और अन्य सदस्यों से मुलाकात कर उन्हें आश्वासन दिया कि वे जल्द ही दिल्ली जाकर रेल मंत्री से मुलाकात करेंगी और ट्रेन के ठहराव को फिर से शुरू कराने का प्रयास करेंगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार अचानक स्टॉपेज बंद करना रेलवे विभाग की हठधर्मिता को दर्शाता है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विधायक ने यह भी कहा कि रूपवास स्टेशन से अहमदाबाद की ओर सबसे अधिक यात्री यात्रा करते हैं, जबकि इस दिशा में कोई अन्य सीधी ट्रेन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस पैसेंजर ट्रेन का ठहराव बंद करना स्थानीय लोगों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही ट्रेन का स्टॉपेज बहाल नहीं किया गया, तो रेल संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन किया जाएगा और रेलवे स्टेशन पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने रूपवास में विकास परियोजनाओं और जनहित के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए योजनाएं बना रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग इन योजनाओं के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। शहरवासियों का कहना है कि किसी भी विकास कार्य को लागू करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।


