राजस्थान की सबसे महत्वाकांक्षी औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल बाड़मेर रिफाइनरी एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। इस प्रोजेक्ट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान वर्तमान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने रिफाइनरी की लागत में भारी बढ़ोतरी और निर्माण में हो रही देरी को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे जनता के पैसे की बर्बादी करार दिया।
गहलोत ने कहा कि जिस परियोजना को शुरू में लगभग 37 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाना था, वह अब बढ़कर 80 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। उनके अनुसार, यह करीब 43 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत सीधे तौर पर राज्य की जनता पर बोझ बनकर पड़ी है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस लागत वृद्धि और प्रोजेक्ट में हुए “सेटबैक” के लिए जिम्मेदार कौन है।
इस दौरान गहलोत ने परियोजना की पृष्ठभूमि को भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि इस रिफाइनरी का शिलान्यास सोनिया गांधी और तत्कालीन केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली के कार्यकाल में हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद भाजपा सरकार ने राजनीतिक कारणों से इस परियोजना को वर्षों तक ठंडे बस्ते में डाल दिया। गहलोत के अनुसार, 2014 से 2018 के बीच प्रोजेक्ट पर कोई खास प्रगति नहीं हुई, जिससे इसकी लागत और समय दोनों में भारी बढ़ोतरी हुई।
गहलोत ने यह भी कहा कि पहले इस परियोजना को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसे 2026 तक खींच दिया गया है। उन्होंने इसे राज्य के विकास के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना को राजनीतिक द्वेष का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए था।
भाजपा के मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि कई प्रवक्ता ऐसे जटिल तकनीकी मुद्दों पर बयान दे रहे हैं, जिनकी उन्हें बुनियादी जानकारी तक नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स जैसे विषयों की ABCD तक न जानने वाले लोग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम लेते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे पर गंभीर बहस करनी है तो उन्हें सामने लाया जाए। गहलोत के अनुसार, वसुंधरा राजे ही इस परियोजना की पूरी पृष्ठभूमि और निर्णयों से वाकिफ हैं, इसलिए वही इस विषय पर सार्थक चर्चा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अन्य नेता केवल रटे-रटाए बयान दे रहे हैं, जिनका कोई ठोस आधार नहीं है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को भी गहलोत ने सलाह देते हुए कहा कि वे अपने प्रवक्ताओं को बेहतर तरीके से तैयार करें। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि पहले पूरी स्टडी और रिसर्च के साथ विपक्ष पर हमला किया जाए, ताकि बहस तथ्यात्मक हो सके। बिना जानकारी के दिए जा रहे बयान जनता को भ्रमित करते हैं और इससे किसी को कोई फायदा नहीं होता।
रिफाइनरी प्रोजेक्ट के आर्थिक और औद्योगिक महत्व पर बात करते हुए गहलोत ने कहा कि इसका असली लाभ केवल टैक्स या राजस्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी सहायक उद्योग इकाइयों यानी एंसीलरी यूनिट्स हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के आसपास 100 से 150 प्रकार के पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक आधारित उद्योग स्थापित हो सकते हैं, जो राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेंगे।
हालांकि उन्होंने यह चिंता भी जताई कि यदि सरकार ने इस दिशा में उचित नीति नहीं बनाई, तो बाहरी राज्यों, विशेष रूप से गुजरात के अनुभवी उद्योगपति इन अवसरों पर कब्जा कर सकते हैं। इससे राजस्थान के स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि रीको क्षेत्र में प्लॉट आवंटन के दौरान स्थानीय उद्योगपतियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि राज्य की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित हो सके।
रिफाइनरी में राज्य सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी को लेकर भी गहलोत ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि इस निर्णय को पूर्व में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। उनके अनुसार, यह साझेदारी लेना राज्य की मजबूरी थी, क्योंकि Hindustan Petroleum Corporation Limited जैसी बड़ी कंपनियां बिना राज्य की भागीदारी के इस परियोजना में निवेश करने को तैयार नहीं थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम राज्य के हित में लिया गया था और इसे घाटे का सौदा बताना भ्रामक है।
गहलोत ने अंत में कहा कि बाड़मेर रिफाइनरी देश की सबसे आधुनिक और हाई-टेक्नोलॉजी परियोजनाओं में से एक है, जिसे राजनीतिक विवादों से दूर रखते हुए समय पर पूरा किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि इस परियोजना को सही दिशा में आगे बढ़ाया गया, तो यह राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।


