latest-newsजयपुरराजनीतिराजस्थान

ज्योतिबा फुले जयंती पर अशोक गहलोत का भजनलाल सरकार पर वार

ज्योतिबा फुले जयंती पर अशोक गहलोत का भजनलाल सरकार पर वार

समाज सुधारक ज्योतिबा राव फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौजूदा भजनलाल शर्मा सरकार पर सीधा हमला बोला और कई गंभीर आरोप लगाए। गहलोत ने कहा कि महात्मा फुले ने अपना पूरा जीवन समाज से भेदभाव मिटाने और समानता स्थापित करने के लिए समर्पित किया था, लेकिन आज की सरकार उनकी विचारधारा के विपरीत काम कर रही है।

अशोक गहलोत ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा फुले केवल एक समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक न्याय और समानता के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक थे। उन्होंने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार इन मूल्यों को आगे बढ़ाने के बजाय समाज में विभाजन पैदा करने वाली नीतियां अपना रही है, जो फुले के विचारों के खिलाफ है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी महान व्यक्ति की जयंती मनाना केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके विचारों को व्यवहार में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि होती है। गहलोत के अनुसार, यदि सरकार वास्तव में महात्मा फुले का सम्मान करना चाहती है तो उसे उनकी नीतियों और सोच को लागू करना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने इन योजनाओं को बंद कर दिया है। गहलोत के मुताबिक, ये योजनाएं आम जनता, खासकर गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए बेहद महत्वपूर्ण थीं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के बंद होने से लोगों को सीधा नुकसान हुआ है और सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उनकी सरकार सत्ता में थी, तब प्रधानमंत्री ने इन योजनाओं की सराहना की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार बदलने के बाद भी इन योजनाओं को जारी रखा जाएगा। ऐसे में अब जब ये योजनाएं बंद कर दी गई हैं, तो प्रधानमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता के हित में शुरू की गई योजनाएं फिर से लागू हों।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों के कारण समाज में आर्थिक असमानता बढ़ रही है। गहलोत के अनुसार, अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार चौड़ी हो रही है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि महात्मा फुले ने जिस समाज की कल्पना की थी, उसमें सभी वर्गों को समान अवसर मिलते, लेकिन वर्तमान हालात इसके विपरीत नजर आते हैं।

राजस्थान की राजनीति में यह बयान उस समय आया है जब राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो चुका है, और दोनों ही दल आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी-अपनी रणनीतियों को धार दे रहे हैं। गहलोत का यह बयान भी इसी राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है, जहां वे सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

गहलोत ने यह भी कहा कि सरकार को चाहिए कि वह जनता की भलाई के लिए काम करे और उन योजनाओं को फिर से शुरू करे, जो लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मददगार थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल भाषण देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर काम करना जरूरी है। यदि सरकार वास्तव में विकास और सामाजिक न्याय के प्रति गंभीर है, तो उसे ठोस कदम उठाने होंगे।

उन्होंने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि कांग्रेस की राजनीति हमेशा सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित रही है। वहीं, उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसकी नीतियां इन मूल्यों के विपरीत हैं और इससे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो रही है।

फुले जयंती के मौके पर दिया गया यह बयान न केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है, बल्कि यह सामाजिक और वैचारिक बहस को भी आगे बढ़ाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्थान की राजनीति में विचारधारा और नीतियों को लेकर संघर्ष लगातार जारी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading