राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने लंबे समय से फरार चल रहे रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। एसीबी की टीम उन्हें काफी समय से तलाश कर रही थी और आखिरकार गुरुवार 9 अप्रैल की शाम को दिल्ली से गिरफ्तार करने में सफलता मिली। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री सुबोध अग्रवाल की सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। किरोड़ी लाल मीणा ने दावा किया कि जल जीवन मिशन में करीब 900 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला हुआ था, जिसमें फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के जरिए कामों का आवंटन किया गया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें इस घोटाले की जानकारी मिली, तब उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी थी और मीडिया के सामने भी तथ्य रखे थे।
किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाने के लिए जयपुर के अशोक नगर थाने का रुख किया था, लेकिन उस समय उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस वक्त पुलिस ने मामला दर्ज करने में टालमटोल की, जिसके विरोध में उन्हें चार दिनों तक धरने पर बैठना पड़ा। उनका कहना है कि यदि उस समय कार्रवाई हो जाती, तो आज स्थिति अलग हो सकती थी।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है और इसी का परिणाम है कि इस मामले में पहले पूर्व मंत्री महेश जोशी को जेल जाना पड़ा और अब रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई है। किरोड़ी मीणा ने स्पष्ट किया कि जो भी इस घोटाले में दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के तहत सजा जरूर मिलेगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
सुबोध अग्रवाल की भूमिका को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अग्रवाल फाइनेंस कमेटी के अध्यक्ष थे और टेंडर प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। टेक्निकल कमेटी के बाद फाइनेंस कमेटी ही अंतिम रूप से टेंडर को मंजूरी देती है, ऐसे में उनकी जिम्मेदारी बनती है कि प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार हो। किरोड़ी मीणा के अनुसार, इसी आधार पर उन्हें इस मामले में आरोपी माना जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।
किरोड़ी लाल मीणा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने उनकी बात को नजरअंदाज किया और इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत सरकार इस मामले में लापरवाह रही, जिसका खामियाजा उन्हें सत्ता से बाहर होकर भुगतना पड़ा। मीणा ने यह भी दोहराया कि उनकी सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 20 जून 2023 को हुई थी, जब किरोड़ी लाल मीणा ने जयपुर के अशोक नगर थाने के बाहर धरना देकर इस घोटाले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। यह धरना दो दिनों तक चला और देखते ही देखते यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया। कई अन्य राजनीतिक नेता भी इस मुद्दे पर सक्रिय हुए और थाने पहुंचकर समर्थन जताया। इस दौरान जमकर बयानबाजी हुई और मामला राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया।
2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी यह घोटाला चर्चा के केंद्र में रहा और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसे अपने-अपने तरीके से उठाया। चुनावी माहौल में इस मुद्दे ने जनता के बीच भी खासा असर डाला और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बहस तेज हो गई।
इसके बाद 24 अप्रैल 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसी मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी को करीब आठ घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिसंबर 2025 को उन्हें जमानत दे दी और फिलहाल वे इस मामले में जमानत पर बाहर हैं।


