राजस्थान में जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले की जांच में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां लंबे समय से फरार चल रहे पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने उन्हें दिल्ली से हिरासत में लेकर जयपुर लाया, जहां आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। इस गिरफ्तारी को जेजेएम घोटाले की जांच में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है, क्योंकि सुबोध अग्रवाल पर पूरे मामले में अहम भूमिका निभाने के आरोप हैं।
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले में पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका था और उनकी टीम लगातार आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में शुरू हुई इस व्यापक जांच के तहत अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को इस घोटाले के कई और पहलुओं को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जांच में सामने आया है कि जल जीवन मिशन के तहत टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई थीं। आरोप है कि कुछ चुनिंदा फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार किया गया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर आवंटित किए गए। गणपति ट्यूबवैल और श्याम ट्यूबवैल जैसी फर्मों द्वारा कथित तौर पर फर्जी सर्टिफिकेट लगाए गए थे, जिनके आधार पर उन्हें करोड़ों रुपये के ठेके दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित अधिकारियों को इन अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
इस पूरे मामले में लगभग 960 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन को संदिग्ध माना जा रहा है। आरोप है कि यह राशि कुछ विशेष कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए दी गई। इसके अलावा, 50 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर के लिए जरूरी स्थल निरीक्षण (स्पॉट इंस्पेक्शन) भी नहीं किया गया, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सब कुछ उच्च स्तर पर मिलीभगत और पद के दुरुपयोग के बिना संभव नहीं था।
एसीबी ने इस मामले में पहले भी बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। 17 फरवरी को एक साथ कई राज्यों में छापेमारी की गई थी, जिसमें जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर के अलावा बिहार, झारखंड और दिल्ली में कुल 15 स्थानों पर रेड डाली गई थी। इन छापों के दौरान कई अहम दस्तावेज, फर्जी बिल और वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े साक्ष्य सामने आए थे। इसी दिन सुबोध अग्रवाल के आवास पर भी छापेमारी की गई थी, जिससे जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिली।
छापेमारी के दौरान जलदाय विभाग के नौ अधिकारियों को भी हिरासत में लिया गया था, जो इस पूरे घोटाले में शामिल पाए गए। इसके बाद 18 फरवरी को सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया था, जिससे उनके देश छोड़कर भागने की आशंका को रोका जा सके। हालांकि इसके बावजूद वह लंबे समय तक जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहे, लेकिन अब उनकी गिरफ्तारी के बाद जांच को निर्णायक मोड़ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
जल जीवन मिशन, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, इस घोटाले के कारण सवालों के घेरे में आ गया है। इस योजना के तहत बड़े स्तर पर वित्तीय संसाधनों का उपयोग किया जाता है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे तौर पर आम जनता के हितों को प्रभावित करती है। ऐसे में इस घोटाले का खुलासा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुबोध अग्रवाल से पूछताछ के दौरान कई बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिनसे इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि इस मामले में और भी बड़े अधिकारी या प्रभावशाली लोग जांच के दायरे में आ सकते हैं। एसीबी की टीम अब इस दिशा में तेजी से काम कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश भी जारी है।


