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जयपुर कृषि सम्मेलन में बड़ा एलान: फार्मर आईडी बनेगी खेती की नई पहचान

जयपुर कृषि सम्मेलन में बड़ा एलान: फार्मर आईडी बनेगी खेती की नई पहचान

राजधानी जयपुर  में आयोजित पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में देश की कृषि व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और दूरगामी प्रभाव वाला ऐलान किया गया। शिवराज सिंह चौहान  ने इस सम्मेलन के मंच से स्पष्ट किया कि आने वाले समय में खेती की पूरी व्यवस्था का आधार ‘फार्मर आईडी’ होगी। यह पहल न केवल किसानों की पहचान को डिजिटल रूप से सुदृढ़ करेगी, बल्कि कृषि से जुड़ी सभी योजनाओं और संसाधनों के वितरण में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि देश के हर राज्य का एक विस्तृत कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिसकी शुरुआत राजस्थान से की जा रही है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। इस दौरान भागीरथ चौधरी, भजनलाल शर्मा सहित राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा के कृषि मंत्री भी मौजूद रहे। यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि इसमें देश की कृषि नीतियों को नई दिशा देने के लिए ठोस रणनीति पर चर्चा की गई।

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब भी कृषि विकास की बात होती है तो राजस्थान का नाम प्रमुखता से सामने आता है। उन्होंने प्रदेश सरकार की सराहना करते हुए कहा कि यहां कृषि क्षेत्र को लेकर गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं बल्कि जीवनदाता हैं, क्योंकि देश की पूरी अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा उनके श्रम पर निर्भर करती है। उन्होंने विभिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक ज़ोन, मिट्टी, जलवायु और फसलों की विविधता को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय स्तर पर कृषि सम्मेलनों के आयोजन को जरूरी बताया। उन्होंने जानकारी दी कि पूरे देश में इस तरह के पांच क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे और इसकी शुरुआत राजस्थान से होना गर्व की बात है।

फार्मर आईडी को लेकर उन्होंने विस्तार से बताया कि भविष्य में खाद और बीज जैसी आवश्यक कृषि सामग्री का वितरण इसी आईडी के माध्यम से किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि लाभ सीधे वास्तविक किसानों तक पहुंचे और किसी प्रकार की गड़बड़ी या बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो। उन्होंने सभी राज्यों को निर्देश देते हुए कहा कि मिशन मोड में काम करते हुए फार्मर आईडी का कार्य जल्द पूरा किया जाए, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।

केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तीन प्रमुख लक्ष्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि 140 करोड़ लोगों के लिए पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि दलहन और तिलहन के क्षेत्र में अभी भी देश को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसे कम करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि जब तक किसान समृद्ध नहीं होगा, तब तक देश की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।

उन्होंने पोषण सुरक्षा को भी एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया और कहा कि इसके लिए छह सूत्रीय रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत खेती के तरीकों में बदलाव, फसल विविधीकरण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जलवायु परिवर्तन और मौसम की मार के कारण कई क्षेत्रों में किसानों को नुकसान हो रहा है, ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को अधिकतम राहत देने का प्रयास किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘सशक्त किसान, समृद्ध भारत’ के विजन को जमीन पर उतारने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कृषि में नवाचार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही और कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जल प्रबंधन की नई योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नीतियों का निर्माण तभी प्रभावी हो सकता है जब नीति निर्माता और वैज्ञानिक खेतों की वास्तविक समस्याओं को समझें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना का आधार भी है।

इस सम्मेलन के माध्यम से यह स्पष्ट हो गया कि आने वाले समय में भारत की कृषि व्यवस्था में डिजिटल और संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। फार्मर आईडी जैसी पहल न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं, राज्यवार कृषि रोडमैप तैयार होने से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजनाएं बनाई जा सकेंगी, जिससे कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास सुनिश्चित होगा।

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