राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी क्षेत्र में गारनेट खनन से जुड़ा अवैध कारोबार एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। शनिवार रात सामने आए अवैध वसूली के मामले ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। इस मामले में गारनेट माइनिंग कारोबारियों से लाखों रुपए की वसूली के आरोप लगे हैं, जिसमें कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों और पुलिस से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
घटना के बाद राजस्थान पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। रविवार दोपहर तक सामने आई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में अजय पांचाल, कालु गुर्जर, नारायण गुर्जर और नंद सिंह शामिल हैं। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि ये सभी आरोपी एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे और गारनेट के अवैध खनन से जुड़े लोगों से नियमित रूप से वसूली कर रहे थे।
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि आरोप है कि यह वसूली पुलिस के नाम पर की जा रही थी। आरोपियों ने खनन कारोबारियों को यह विश्वास दिलाया कि वे उन्हें पुलिस कार्रवाई से बचा सकते हैं और इसी के बदले उनसे मोटी रकम वसूलते थे। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि करीब 15 से 20 अवैध खननकर्ताओं से लाखों रुपए की वसूली की गई थी।
कोटड़ी और बीगोद क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से गारनेट का अवैध खनन एक बड़े संगठित कारोबार के रूप में विकसित हो चुका है। स्थानीय स्तर पर इसे ‘रेत का सोना’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी बाजार में काफी मांग है। लेकिन इस अवैध खनन के चलते न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद यह कारोबार लगातार फल-फूल रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठते रहे हैं।
मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। सदर पुलिस उपाधीक्षक माधव उपाध्याय की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। इसके बाद जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह यादव ने पूरे मामले की जांच शुरू करवा दी है। उच्च स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस अवैध वसूली नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक एंगल भी सामने आया है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल अजय पांचाल को जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा का करीबी बताया जा रहा है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। हालांकि विधायक गोपीचंद मीणा ने इस मामले में अपनी किसी भी प्रकार की संलिप्तता से स्पष्ट रूप से इनकार किया है।
विधायक ने कहा कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन की शिकायत पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों से की थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे अवैध कारोबार में पुलिस के कुछ अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
गोपीचंद मीणा ने यह भी स्पष्ट किया कि अजय पांचाल को वे केवल एक कार्यकर्ता के रूप में जानते हैं और उसका उनके साथ कोई आधिकारिक या निजी संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से उनका नाम इस मामले में जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें अवैध खनन, चोरी और मारपीट जैसे आरोप शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह गिरोह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त रहा है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर राज्य में अवैध खनन और उससे जुड़े माफिया नेटवर्क की गंभीरता को उजागर किया है। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इस तरह के अवैध कारोबार प्रशासनिक व्यवस्था और कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।


