राजस्थान में उप निरीक्षक और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2025 को लेकर इस बार अभूतपूर्व सख्ती देखने को मिल रही है। Rajasthan Public Service Commission (RPSC) ने पिछली परीक्षाओं में सामने आए हाईटेक नकल के मामलों से सबक लेते हुए इस बार पूरी परीक्षा प्रक्रिया को नकल मुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। इसी कड़ी में एक अनोखी पहल करते हुए आयोग ने पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है, जिसमें ईएनटी विशेषज्ञ उन्हें आधुनिक तकनीकों से होने वाली नकल को पकड़ने के तरीके सिखाएंगे।
यह प्रशिक्षण 4 अप्रैल को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कान, नाक और गला रोग विशेषज्ञ यानी ENT डॉक्टर पुलिसकर्मियों को यह बताएंगे कि किस तरह अभ्यर्थी कान के भीतर बेहद छोटे ब्लूटूथ डिवाइस छिपाकर परीक्षा में अनुचित लाभ लेने की कोशिश करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें माइक्रो ब्लूटूथ डिवाइस, स्मार्ट चश्मे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर नकल की गई थी। इस बार आयोग ने इन सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत किया है।
आयोग के अनुसार, 5 और 6 अप्रैल को आयोजित होने वाली इस परीक्षा में करीब 7 लाख 70 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे। यह परीक्षा 1015 पदों के लिए आयोजित की जा रही है, जिससे इसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है। इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की भागीदारी को देखते हुए Rajasthan Public Service Commission ने परीक्षा को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए राज्यभर में व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की हैं।
परीक्षा का आयोजन दो दिनों में चार पारियों में किया जाएगा। 5 अप्रैल को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक सामान्य हिंदी का पेपर होगा, जबकि उसी दिन दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक सामान्य ज्ञान और सामान्य विज्ञान का पेपर आयोजित किया जाएगा। यही क्रम 6 अप्रैल को भी दोहराया जाएगा। इस तरह प्रत्येक अभ्यर्थी को दो अलग-अलग विषयों की परीक्षा देनी होगी।
परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और निगरानी के लिए इस बार कई सख्त कदम उठाए गए हैं। हर केंद्र पर अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रिकॉर्ड किया जा सके। इसके अलावा केंद्र के बाहर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, जो संदिग्ध व्यक्तियों और गतिविधियों पर नजर रखेंगे। परीक्षा कक्षों में दीवार घड़ी का होना अनिवार्य किया गया है, ताकि अभ्यर्थी समय का सही आकलन कर सकें और किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।
इस बार परीक्षा में अभ्यर्थियों और स्टाफ दोनों के लिए मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। प्रवेश से पहले प्रत्येक अभ्यर्थी की पहचान आधार कार्ड से मिलाई जाएगी और हैंड मेटल डिटेक्टर के माध्यम से उनकी जांच की जाएगी। स्पष्ट फोटोयुक्त पहचान पत्र के बिना किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इन सभी उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो।
आयोग के सचिव रामनिवास मेहता ने स्पष्ट किया है कि इस बार किसी भी प्रकार के अनुचित साधन का उपयोग करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अभ्यर्थियों को चेतावनी देते हुए कहा कि परीक्षा में ईमानदारी बनाए रखना ही उनके हित में है, क्योंकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी उनके भविष्य को खतरे में डाल सकती है।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे खास पहल ENT डॉक्टरों द्वारा दिया जाने वाला प्रशिक्षण है, जो यह दर्शाता है कि आयोग अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नकल पर अंकुश लगाने के लिए तैयार है। यह कदम न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता को बढ़ाएगा, बल्कि उन लाखों अभ्यर्थियों के भरोसे को भी मजबूत करेगा, जो अपनी मेहनत के दम पर सफलता हासिल करना चाहते हैं।
पिछले वर्षों में सामने आए पेपरलीक और हाईटेक नकल के मामलों ने राज्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में Rajasthan Public Service Commission के इस प्रयास को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को और अधिक विश्वसनीय बनाने में मदद करेगा।


