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SI भर्ती 2021 रद्द, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पेपरलीक पर सख्ती

SI भर्ती 2021 रद्द, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पेपरलीक पर सख्ती

राजस्थान की सबसे चर्चित और विवादों में रही पुलिस भर्तियों में से एक SI भर्ती-2021 को लेकर शनिवार को बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। Rajasthan High Court की खंडपीठ ने इस भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने का आदेश देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा में हुई गंभीर अनियमितताओं और पेपरलीक के चलते इसकी निष्पक्षता पूरी तरह प्रभावित हो चुकी थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की अगुवाई वाली खंडपीठ ने 28 अगस्त 2025 को एकलपीठ द्वारा दिए गए फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार और चयनित अभ्यर्थियों की अपीलों को खारिज कर दिया।

इस फैसले के साथ ही पिछले कई महीनों से चल रही कानूनी लड़ाई का पटाक्षेप हो गया है, जिसने हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि जब किसी परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं और जांच में पेपरलीक के ठोस प्रमाण सामने आते हैं, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करना ही न्यायसंगत विकल्प होता है। अदालत ने यह भी माना कि इस ‘दूषित’ प्रक्रिया के कारण ईमानदार और मेहनती अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन हुआ है।

इस मामले का घटनाक्रम भी काफी जटिल रहा है। 28 अगस्त 2025 को Rajasthan High Court की एकलपीठ ने पहली बार भर्ती को रद्द करने का आदेश दिया था। इसके बाद 8 सितंबर 2025 को खंडपीठ ने अंतरिम राहत देते हुए उस आदेश पर रोक लगा दी, जिससे चयनित अभ्यर्थियों को कुछ समय के लिए राहत मिली। मामला आगे बढ़ते हुए 24 सितंबर 2025 को Supreme Court of India पहुंचा, जहां सर्वोच्च अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया और चयनित अभ्यर्थियों की फील्ड पोस्टिंग पर रोक लगा दी। अंततः 19 जनवरी 2026 को खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब 4 अप्रैल 2026 को सुनाया गया है।

कोर्ट की टिप्पणी इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मानी जा रही है। खंडपीठ ने अपने आदेश में साफ कहा कि धांधली और पेपरलीक के आगे प्रतिभा को हारने नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो केवल कुछ अभ्यर्थियों को दोषी मानकर पूरी प्रक्रिया को सही नहीं ठहराया जा सकता। ऐसी स्थिति में पूरी भर्ती को रद्द करना ही एकमात्र न्यायसंगत कदम होता है।

हालांकि इस फैसले से हजारों चयनित अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद इस परीक्षा को पास किया था, लेकिन कोर्ट ने उनके हितों को ध्यान में रखते हुए एक अहम राहत भी दी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि जब भी इस भर्ती को दोबारा आयोजित किया जाएगा, तब इस प्रक्रिया में शामिल रहे सभी अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट दी जाएगी। इससे उन युवाओं को दोबारा मौका मिलेगा, जो लंबी कानूनी प्रक्रिया के चलते ओवर-एज हो गए हैं।

इस फैसले के बाद राज्य सरकार और Rajasthan Public Service Commission के सामने नई भर्ती प्रक्रिया आयोजित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इस भर्ती के तहत 800 से अधिक पदों को भरा जाना था, जिनके रद्द होने से पुलिस विभाग में अधिकारियों की कमी बनी रहेगी। ऐसे में सरकार को जल्द ही नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू करनी होगी, ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों।

इसके साथ ही यह सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा भी होगी कि वह अगली भर्ती को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित कर सके। पेपरलीक जैसी घटनाओं ने युवाओं के भरोसे को गहरा आघात पहुंचाया है, जिसे बहाल करना आसान नहीं होगा। इसके लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कड़े उपाय करने की जरूरत होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक ओर वे अभ्यर्थी हैं, जो चयनित होने के बाद अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे युवा भी हैं, जो लंबे समय से पेपरलीक और भर्ती घोटालों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे और इस फैसले को न्याय की जीत के रूप में देख रहे हैं।

कुल मिलाकर, Rajasthan High Court का यह फैसला केवल एक भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी है। यह संदेश है कि किसी भी कीमत पर पारदर्शिता और निष्पक्षता से समझौता नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है और युवाओं के भरोसे को फिर से कैसे कायम करती है।

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