राजस्थान के श्रीगंगानगर में इन दिनों खाद्य तेलों की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने का सीधा असर अब स्थानीय बाजारों में दिखाई देने लगा है। खासतौर पर सोयाबीन और पाम तेल की आपूर्ति में कमी ने पूरे खाद्य तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिससे सरसों और मूंगफली तेल के दाम भी तेजी से बढ़ गए हैं।
पिछले कुछ दिनों में जिले की मंडियों में खाद्य तेलों के दामों में अचानक उछाल देखने को मिला है। व्यापारियों के अनुसार, सोयाबीन सीड्स के भाव में करीब 600 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां सोयाबीन सीड्स का भाव लगभग 4800 रुपए प्रति क्विंटल था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 5600 रुपए तक पहुंच गया है। इसी तरह सोयाबीन तेल के 15 किलो के टिन में भी 150 से 200 रुपए तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे इसका मूल्य लगभग 2570 रुपए तक पहुंच गया है।
स्थानीय बाजार में अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में भी भारी वृद्धि देखी जा रही है। सोयाबीन तेल, जो पहले लगभग 2100 रुपए प्रति 15 किलो टिन में मिल रहा था, अब करीब 2400 रुपए तक पहुंच गया है। सरसों तेल के दाम भी इसी तरह बढ़े हैं, जहां पहले यह लगभग 2200 रुपए में उपलब्ध था, वहीं अब इसका मूल्य 2500 रुपए के करीब पहुंच गया है। मूंगफली तेल में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका 15 किलो टिन पहले करीब 2500 रुपए में मिलता था और अब यह 2800 रुपए से अधिक में बिक रहा है। पाम तेल के दामों में भी उल्लेखनीय उछाल आया है, जो पहले 1700 रुपए था और अब बढ़कर करीब 2200 रुपए तक पहुंच गया है। वहीं सनफ्लावर तेल के दाम भी 150 से 200 रुपए तक बढ़े हैं।
तेल बाजार में यह तेजी केवल आयातित तेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू उत्पादन वाले तेलों पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। सरसों के बाजार में भी मजबूती आई है, जहां पहले इसका भाव लगभग 6000 रुपए प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर करीब 6700 रुपए तक पहुंच गया है। सरसों तेल के 15 किलो टिन में भी करीब 300 रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी तरह मूंगफली के दामों में 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल तक की वृद्धि हुई है, जिससे मूंगफली तेल भी महंगा हो गया है।
व्यापारियों का कहना है कि इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति में कमी है। स्थानीय तेल व्यापारी अमित चावला के अनुसार, भारत में सोयाबीन और पाम तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के चलते इनका आयात प्रभावित हुआ है, जिससे बाजार में माल की कमी हो गई है। इस कमी का असर अन्य तेलों पर भी पड़ा है, जिससे उनके दामों में भी बढ़ोतरी हो रही है।
मूंगफली और सरसों जैसे तेलों की सप्लाई मुख्य रूप से घरेलू बाजार से होती है। मूंगफली का अधिकांश माल बीकानेर और गुजरात से आता है, जबकि सरसों का उत्पादन श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के अलावा भरतपुर और कोटा जैसे जिलों में होता है। लेकिन आयातित तेलों की कमी के कारण इन घरेलू तेलों की मांग बढ़ गई है, जिससे इनके दाम भी तेजी से ऊपर जा रहे हैं।
इस बढ़ती महंगाई का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ रहा है। खाद्य तेल रोजमर्रा की जरूरत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी कीमतों में अचानक वृद्धि से घरों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि उन्हें अब अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति की स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती है, तो आने वाले समय में खाद्य तेलों की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे न केवल उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि खाद्य उद्योग और होटल व्यवसाय पर भी इसका असर पड़ेगा।


