राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2025 एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक विवादों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां Rajasthan Public Service Commission (RPSC) ने एक प्रार्थना पत्र दाखिल कर कोर्ट के हालिया आदेश में संशोधन की मांग की है। आयोग का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में कोर्ट के निर्देशों का पालन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है और इससे परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
दरअसल, गुरुवार को Supreme Court of India ने सी-भर्ती 2021 से जुड़े अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें एसआई भर्ती-2025 में आयु सीमा में छूट देने का निर्देश दिया था। यह राहत उन अभ्यर्थियों के लिए थी, जो निर्धारित आयु सीमा पार कर जाने के कारण इस भर्ती प्रक्रिया में आवेदन नहीं कर पाए थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि इन अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति तो दी जाएगी, लेकिन उनके परिणाम फिलहाल जारी नहीं किए जाएंगे और आगे की कार्रवाई Rajasthan High Court के अंतिम फैसले के आधार पर तय होगी।
हालांकि, इस आदेश के बाद Rajasthan Public Service Commission के सामने एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है। आयोग ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि इस समय करीब 2.25 लाख अतिरिक्त अभ्यर्थियों से आवेदन भरवाना और उन्हें परीक्षा में शामिल कराना संभव नहीं है। आयोग का तर्क है कि परीक्षा प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं, ऐसे में इतने बड़े स्तर पर बदलाव करना न केवल कठिन है, बल्कि इससे पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
आरपीएससी ने यह भी कहा है कि कोर्ट ने यह आदेश पारित करते समय आयोग का पक्ष नहीं सुना। प्रार्थना पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि आयोग को इस मामले में कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था और बिना पक्ष सुने ही आदेश पारित कर दिया गया। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि इस आदेश को संशोधित करते हुए इसे केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित किया जाए, ताकि व्यापक स्तर पर परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित न हो।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी ध्यान देने वाली बात है कि एसआई भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा 5 और 6 अप्रैल को आयोजित होनी है। आयोग पहले ही लगभग 7.5 लाख अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जारी कर चुका है और परीक्षा केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। ऐसे में अंतिम समय पर लाखों नए अभ्यर्थियों को जोड़ना और उनके लिए एडमिट कार्ड जारी करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
आयोग की ओर से अधिवक्ता राजेश सिंह चौहान के माध्यम से यह प्रार्थना पत्र दायर किया गया है, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि परीक्षा से महज दो दिन पहले इस प्रकार का आदेश लागू करना व्यावहारिक नहीं है। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि ऐसा किया जाता है, तो परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आज अवकाश के दिन भी Supreme Court of India में विशेष सुनवाई तय की गई है। जानकारी के अनुसार, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। यह सुनवाई दोपहर दो बजे प्रस्तावित है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि कोर्ट अपने पहले के आदेश में कोई संशोधन करता है या नहीं।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, न्यायिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक तैयारियों के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर अभ्यर्थी अपने अधिकारों और अवसरों के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भर्ती एजेंसियां समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से परीक्षाएं आयोजित कराने की चुनौती से जूझ रही हैं।
फिलहाल, सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि इसी के आधार पर यह तय होगा कि एसआई भर्ती-2025 की परीक्षा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी या इसमें किसी प्रकार का बदलाव किया जाएगा। यदि कोर्ट अपने आदेश में संशोधन करता है, तो इससे लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है और परीक्षा प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सकती है। वहीं यदि आदेश यथावत रहता है, तो आयोग के सामने एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो सकती है, जिसका असर पूरी भर्ती प्रक्रिया पर पड़ सकता है।


