राजस्थान में इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें उदयपुर से भाजपा सांसद मन्नालाल रावत और राजस्थान कैडर की IAS अंजलि राजोरिया आमने-सामने आ गए हैं। यह विवाद अब केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकसभा तक पहुंच चुका है, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ गई है। सांसद रावत ने इस मामले को संसद में उठाते हुए अंजलि राजोरिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की संभावना जताई है। इसके लिए उन्होंने विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा भी किया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि यह विवाद आने वाले समय में और गहराने वाला है।
लोकसभा में उठाया गया मामला
सांसद मन्नालाल रावत ने लोकसभा में अंजलि राजोरिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर लिए गए कुछ फैसलों के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। रावत का कहना है कि भले ही संबंधित अधिकारियों का तबादला हो गया हो, लेकिन मूल समस्या का समाधान अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाकर इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर ला दिया है, जिससे यह मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
DMF कार्यों को लेकर आरोप
रावत ने विशेष रूप से प्रतापगढ़ जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) के तहत स्वीकृत कार्यों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अंजलि राजोरिया ने कलेक्टर रहते हुए जानबूझकर इन कार्यों को आगे नहीं बढ़ाया। उनके अनुसार, एक बैठक में 54 विकास कार्यों को स्वीकृति दी गई थी, जिनके लिए राजस्थान सरकार ने वित्तीय मंजूरी भी दे दी थी। इसके बावजूद इन कार्यों को धरातल पर लागू नहीं किया गया, जिससे स्थानीय जनता को नुकसान हुआ।
सांसद ने यह भी मांग की कि DMF के अध्यक्ष के रूप में लोकसभा सांसद को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, ताकि विकास कार्यों की निगरानी बेहतर तरीके से हो सके। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कराने की भी मांग की है।
विकास कार्यों पर पड़ा असर
रावत के अनुसार, जिन 54 कार्यों को मंजूरी दी गई थी, वे सीधे तौर पर जनहित से जुड़े थे। इनमें स्कूलों की जर्जर इमारतों का सुधार, पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाना और खनन प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाना शामिल था। इन कार्यों के लंबित रहने से क्षेत्र के विकास पर असर पड़ा है और स्थानीय लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। सांसद का कहना है कि इन परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
डूंगरपुर कलेक्टर के साथ विवाद
इस पूरे मामले में अंजलि राजोरिया के पति और उस समय डूंगरपुर के कलेक्टर रहे Ankit Kumar Singh का नाम भी सामने आया है। दिसंबर 2025 में डूंगरपुर जिले की दिशा समिति की बैठक के दौरान यह विवाद शुरू हुआ था। इस बैठक की अध्यक्षता सांसद रावत कर रहे थे। आरोप है कि बैठक के दौरान बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद Rajkumar Roat ने विषय से हटकर बयानबाजी की, लेकिन कलेक्टर ने उन्हें रोकने या हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं की। इस घटना के बाद बैठक में बहस का माहौल बन गया, जिसने बाद में एक बड़े विवाद का रूप ले लिया। रावत ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से भी की थी।
तबादलों के बाद भी जारी विवाद
हाल ही में राजस्थान सरकार द्वारा जारी आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची में अंजलि राजोरिया और अंकित कुमार सिंह दोनों के नाम शामिल थे। तबादले के बाद अंजलि राजोरिया को गृह विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है, जबकि अंकित कुमार सिंह को फलोदी जिले का कलेक्टर बनाया गया है। इसके अलावा Shubham Chaudhary को प्रतापगढ़ का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। हालांकि इन प्रशासनिक बदलावों के बावजूद विवाद समाप्त नहीं हुआ है और अब यह और अधिक राजनीतिक रूप लेता जा रहा है।
विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव की तैयारी
सांसद रावत द्वारा विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की तैयारी इस बात का संकेत है कि वे इस मामले को गंभीरता से आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। यदि यह प्रस्ताव लाया जाता है, तो यह मामला संसदीय प्रक्रिया के तहत जांच के दायरे में आ सकता है। इस कदम से न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठेंगे, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी बहस तेज हो सकती है।


