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RGHS में दवा संकट, विधायक भी परेशान

RGHS में दवा संकट, विधायक भी परेशान

राजस्थान की महत्वाकांक्षी Rajasthan Government Health Scheme (RGHS)एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला तब और अधिक गंभीर हो गया जब बयाना से निर्दलीय विधायक रितु बनावत को भी इस योजना के तहत कैशलेस दवा नहीं मिल सकी। यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करती है, जहां लाभार्थियों को योजना का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। विधायक को स्वयं दवा के लिए भुगतान करना पड़ा, जिससे इस योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अस्पताल में नहीं मिली कैशलेस दवा

रितु बनावत ने बताया कि वह अपने बेटे और खुद की आंखों के इलाज के लिए आरजीएचएस से जुड़े एक अस्पताल में गई थीं। उन्हें उम्मीद थी कि योजना के तहत उन्हें कैशलेस दवा मिलेगी, लेकिन मेडिकल स्टोर ने दवा देने से इनकार कर दिया। इस स्थिति में उन्हें मजबूर होकर अपनी जेब से दवा खरीदनी पड़ी। विधायक ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों को ही योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, तो आम जनता और सरकारी कर्मचारियों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

बकाया भुगतान बना मुख्य कारण

इस समस्या के पीछे सबसे बड़ा कारण अस्पतालों और दवा आपूर्तिकर्ताओं का बकाया भुगतान बताया जा रहा है। पिछले कुछ समय से अस्पताल संचालक और फार्मेसी संचालक सरकार पर भुगतान में देरी का आरोप लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले 8 से 9 महीनों से करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित है। इसी के चलते कई स्थानों पर 25 मार्च से ओपीडी में कैशलेस दवा वितरण अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

दवा आपूर्ति पर पड़ा असर

Rajasthan Alliance of Hospital Associations के अनुसार, भुगतान नहीं मिलने के कारण दवा सप्लाई करने वाली कंपनियों ने उधार में दवाएं देना बंद कर दिया है। इस स्थिति में अस्पतालों के लिए कैशलेस सुविधा जारी रखना मुश्किल हो गया है। अस्पतालों का कहना है कि बिना भुगतान के लगातार सेवाएं देना आर्थिक रूप से संभव नहीं है, जिसके कारण मरीजों को सीधे भुगतान करना पड़ रहा है।

लाखों लाभार्थियों पर असर

इस फैसले का सीधा असर लगभग 50 लाख लाभार्थियों पर पड़ने की आशंका है। इनमें सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके परिजन शामिल हैं, जो नियमित इलाज और दवाओं के लिए इस योजना पर निर्भर हैं। कैशलेस सुविधा बंद होने से इन लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पूर्व चिकित्सा मंत्री Raghu Sharma ने आरोप लगाया कि सरकार इस योजना को कमजोर कर रही है। उनका कहना है कि योजना के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जबकि खर्च की जरूरत लगातार बढ़ रही है। वहीं कांग्रेस नेता Tika Ram Jully ने भी प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार की कार्यशैली की आलोचना की है।

सरकार का पक्ष और आश्वासन

इस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री Gajendra Singh Khimsar ने कहा है कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि बकाया भुगतान और कैशलेस व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाएगा, ताकि मरीजों को परेशानी न हो।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

आरजीएचएस योजना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। लेकिन मौजूदा हालात में इस योजना की कार्यक्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।

यदि समय पर भुगतान और व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो यह योजना अपने उद्देश्य से भटक सकती है। इससे न केवल लाभार्थियों का विश्वास प्रभावित होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।

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