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माउंट आबू में अनोखा नजारा, मंदिर पहुंच रहे भालू

माउंट आबू में अनोखा नजारा, मंदिर पहुंच रहे भालू

राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में इन दिनों आस्था और प्रकृति का एक अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जहां देशभर से श्रद्धालु मां अर्बुदा के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों की अप्रत्याशित मौजूदगी ने इस स्थल को और भी चर्चा में ला दिया है। पिछले करीब 15 दिनों से लगातार पांच भालू प्रतिदिन मंदिर परिसर में पहुंचकर एक अनोखी परंपरा का हिस्सा बनते नजर आ रहे हैं।

मां अर्बुदा के दरबार में भालुओं की हाजिरी

माउंट आबू स्थित अर्बुदा माता मंदिर में इन दिनों जो दृश्य देखने को मिल रहा है, वह लोगों को आश्चर्यचकित कर रहा है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोगों के अनुसार, रोजाना सुबह और शाम के समय पांच भालू एक साथ मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं।

सबसे खास बात यह है कि ये भालू मंदिर के उस हिस्से तक पहुंचते हैं जहां मां की अखंड ज्योत प्रज्वलित रहती है। आमतौर पर जंगली जानवरों को मानव बस्तियों से दूर रहने वाला माना जाता है, लेकिन यहां उनका व्यवहार पूरी तरह शांत और नियंत्रित नजर आता है।

नवरात्रि में बढ़ी आस्था और रहस्य

चैत्र नवरात्रि के दौरान इस घटना ने और भी गहराई पकड़ ली है। सूर्योदय के समय और शाम के वक्त भालुओं का मंदिर आना लगभग एक तय क्रम बन गया है। यह सिलसिला पिछले पंद्रह दिनों से लगातार जारी है, जिससे यह घटना न केवल स्थानीय बल्कि बाहरी श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गई है।

स्थानीय लोग इसे मां अर्बुदा की कृपा और आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। उनके अनुसार, यह कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि प्रकृति और श्रद्धा के बीच एक अद्भुत जुड़ाव का उदाहरण है।

श्रद्धालुओं के लिए बना आकर्षण का केंद्र

मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य किसी अद्भुत अनुभव से कम नहीं है। जहां एक ओर वे मां के चरणों में शीश नवाकर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं, वहीं दूसरी ओर इन भालुओं को करीब से देखने का अवसर भी उन्हें मिलता है।

सुबह के समय जब उगते सूरज की किरणें मंदिर परिसर को आलोकित करती हैं और उसी दौरान भालू सीढ़ियों पर दिखाई देते हैं, तो वहां मौजूद लोगों के लिए यह एक यादगार दृश्य बन जाता है। कई श्रद्धालु इस क्षण को अपने कैमरों में कैद करने की कोशिश करते हैं, हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर सावधानी बरतने की सलाह भी दी जा रही है।

शांत व्यवहार ने बढ़ाई है जिज्ञासा

आमतौर पर भालुओं को हिंसक और खतरनाक वन्यजीवों की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन यहां उनका व्यवहार बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा है। वे न तो किसी पर हमला करते हैं और न ही आक्रामकता दिखाते हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवहार उनके प्राकृतिक परिवेश और मानव गतिविधियों के बीच बने संतुलन का परिणाम हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि उनका व्यवहार कभी भी बदल सकता है।

प्रशासन की सतर्क नजर

मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन इस पूरी घटना पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।

प्रशासन का कहना है कि यह एक असामान्य लेकिन आकर्षक घटना है, जिसे लेकर लोगों में उत्सुकता स्वाभाविक है, लेकिन सुरक्षा के नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है।

आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम

माउंट आबू में घटित यह घटना आस्था और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाती है। एक ओर जहां श्रद्धालु अपनी धार्मिक भावनाओं के साथ मंदिर पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों की यह उपस्थिति इस स्थान की विशेषता को और भी बढ़ा रही है।

यह घटना न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि देशभर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए भी एक अनोखा अनुभव बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है या नहीं, लेकिन फिलहाल माउंट आबू में आस्था और प्रकृति का यह संगम सभी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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