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IGNP नहर 45 दिन बंद, 13 जिलों में असर

IGNP नहर 45 दिन बंद, 13 जिलों में असर

राजस्थान के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में जल आपूर्ति की lifeline मानी जाने वाली इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) को शुक्रवार, 27 मार्च से 45 दिनों के लिए बंद किया जा रहा है। इस निर्णय का असर प्रदेश के 13 जिलों पर पड़ेगा, जिनमें बीकानेर सहित कई सीमावर्ती क्षेत्र शामिल हैं।

नहर बंदी का मुख्य कारण मरम्मत और रखरखाव कार्य है, जो हर वर्ष निर्धारित समय पर किया जाता है, ताकि आगे की अवधि में जल आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रह सके। हालांकि, इस दौरान पेयजल और सिंचाई दोनों ही प्रभावित होंगे, जिससे आमजन और किसानों के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

2 करोड़ लोगों और लाखों किसानों पर असर

इस नहर बंदी का सीधा असर लगभग 2 करोड़ लोगों पर पड़ेगा, जो पेयजल के लिए इस परियोजना पर निर्भर हैं। इसके अलावा करीब 16 लाख बीघा भूमि पर खेती करने वाले किसानों की सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा है, लेकिन कई क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता बनी रहती है। ऐसे में नहर बंदी किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकती है।

पिछले अनुभवों से सीखा सबक

सरकार ने इस बार नहर बंदी को लेकर पिछले वर्ष के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए तैयारी की है। वर्ष 2025 में भी इसी अवधि के दौरान नहर बंद की गई थी, जिसे आधिकारिक तौर पर 20 मई तक बंद रखा जाना था, लेकिन जल संकट के चलते इसे समय से पहले 11 मई को खोलना पड़ा था।

इस बार प्रशासन ने ऐसी स्थिति से बचने के लिए पहले से ही आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जल संसाधन विभाग ने बंदी से पहले जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

पेयजल के लिए आपात व्यवस्था

नहर बंदी के दौरान पेयजल संकट को टालने के लिए सरकार ने विशेष प्रबंध किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, आपात स्थिति में प्रति सेकंड लगभग 2,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा, जिससे सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों में पेयजल की आपूर्ति बनी रहे।

इसके अलावा नहर से जुड़े पाइपलाइन नेटवर्क और ट्यूबवेलों की मरम्मत और रखरखाव का कार्य भी पहले ही शुरू कर दिया गया है, ताकि वैकल्पिक जल स्रोतों का उपयोग प्रभावी ढंग से किया जा सके।

प्रशासन की सतर्कता और निगरानी

जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस पूरे समय के दौरान सतर्क रहेंगे। विभिन्न जिलों में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखें और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करें।

ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी, जहां पेयजल की समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि किसी भी क्षेत्र में पानी की कमी के कारण संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।

चुनौतियों के बीच संतुलन की कोशिश

इंदिरा गांधी नहर परियोजना राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। ऐसे में इसकी बंदी हमेशा चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन मरम्मत और रखरखाव कार्य भी उतना ही आवश्यक है। सरकार और प्रशासन इस बार बेहतर प्रबंधन के जरिए नहर बंदी के प्रभाव को न्यूनतम रखने का प्रयास कर रहे हैं। आने वाले 45 दिनों में जल प्रबंधन की प्रभावशीलता ही यह तय करेगी कि आमजन और किसानों को कितनी राहत मिल पाती है।

कुल मिलाकर, IGNP की यह निर्धारित बंदी जहां एक ओर जरूरी तकनीकी कार्यों के लिए आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर यह प्रदेश के लाखों लोगों और किसानों के लिए एक परीक्षा की घड़ी भी साबित होगी।

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