राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से डिलीट सवालों की प्रक्रिया विवाद का विषय बनी हुई थी। अब इस विवाद को समाप्त करने के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) ने एक अहम निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत यदि किसी परीक्षा में कोई सवाल डिलीट होता है, तो उसके अंक केवल संबंधित विषय में नहीं जोड़े जाएंगे, बल्कि पूरे प्रश्नपत्र में समान रूप से वितरित किए जाएंगे। इस बदलाव को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे अभ्यर्थियों के बीच अंक वितरण में समानता सुनिश्चित होगी और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक सरल हो सकेगी।
बोर्ड अध्यक्ष ने दी नई व्यवस्था की जानकारी
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष Alok Raj ने इस नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों के बीच समानता बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि पहले की व्यवस्था में कई तकनीकी जटिलताएं थीं, जिनसे अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ता था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक यदि किसी विषय का प्रश्न डिलीट होता था, तो उसके अंक उसी विषय के अन्य प्रश्नों में जोड़ दिए जाते थे। उदाहरण के तौर पर यदि इतिहास विषय का 3 अंक का एक प्रश्न हटाया जाता था, तो वह अंक उसी विषय के बाकी प्रश्नों में बांट दिए जाते थे।
पुरानी व्यवस्था से पैदा होती थी असमानता
पुराने नियम के कारण उन अभ्यर्थियों को अधिक लाभ मिलता था, जिन्होंने उस विषय के प्रश्न सही किए होते थे। वहीं, जिन अभ्यर्थियों के उत्तर गलत होते थे, उनके लिए नेगेटिव मार्किंग का प्रभाव भी बढ़ जाता था।
इससे परीक्षा में असमानता की स्थिति पैदा होती थी और कई बार परिणाम विवादित हो जाते थे। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट नहीं हो पाता था कि डिलीट किया गया प्रश्न किस विषय से संबंधित है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। नई व्यवस्था में इन सभी समस्याओं को समाप्त करने का प्रयास किया गया है, ताकि सभी अभ्यर्थियों पर समान प्रभाव पड़े और मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी हो।
नेगेटिव मार्किंग में भी मिली राहत
नई व्यवस्था के तहत नेगेटिव मार्किंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब गलत उत्तर देने पर 1/3 नेगेटिव मार्किंग केवल मूल अंक के आधार पर ही लागू होगी।
इसका मतलब यह है कि डिलीट किए गए प्रश्नों के कारण बढ़े हुए अंकों का प्रभाव नेगेटिव मार्किंग पर नहीं पड़ेगा। इससे अभ्यर्थियों को अतिरिक्त कटौती का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें राहत मिलेगी। यह बदलाव विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो नेगेटिव मार्किंग के कारण न्यूनतम योग्यता अंक तक नहीं पहुंच पाते थे।
कमजोर वर्गों को मिलेगा अधिक लाभ
बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज के अनुसार, इस नई व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ समाज के कमजोर वर्गों को मिलेगा। इसमें एससी, एसटी, सहरिया, टीएसपी क्षेत्र के अभ्यर्थी, खिलाड़ी, पूर्व सैनिक, तलाकशुदा और विधवा महिलाएं शामिल हैं। इन वर्गों के अभ्यर्थियों पर पहले की व्यवस्था का प्रभाव अधिक पड़ता था, क्योंकि नेगेटिव मार्किंग बढ़ने से उनके अंक कम हो जाते थे। अब नई प्रणाली के तहत उन्हें अधिक निष्पक्ष अवसर मिलेगा।
पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में कदम
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड का यह निर्णय परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बोर्ड का यह भी कहना है कि देश की कई अन्य भर्ती एजेंसियां, जो अभी बोनस अंक देने की व्यवस्था अपनाती हैं, वे भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह बदलाव भविष्य में व्यापक स्तर पर लागू हो सकता है
राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में डिलीट सवालों को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब इस नई व्यवस्था के साथ समाप्त होने की उम्मीद है। अंक वितरण और नेगेटिव मार्किंग में किए गए बदलाव से अभ्यर्थियों को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन का लाभ मिलेगा।


