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सरिस्का सीमांकन को उद्योग जगत का समर्थन

सरिस्का सीमांकन को उद्योग जगत का समर्थन

राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व के सीमांकन को लेकर चल रही प्रक्रिया को स्थानीय उद्योग संगठनों ने खुलकर समर्थन दिया है। विभिन्न व्यापारिक संघों ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर इस प्रक्रिया को पारदर्शी और आवश्यक बताते हुए इसका स्वागत किया। उद्योग जगत का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा यह कार्य निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रहा है।

भ्रांतियों पर उद्योग जगत की सफाई

प्रेस वार्ता के दौरान व्यवसाय यूनियन के जिला सचिव सुबोध गोयल ने सीमांकन को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाओं को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य खनन गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमांकन का मुख्य उद्देश्य सरिस्का के कोर और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट क्षेत्र का वैज्ञानिक और सटीक निर्धारण करना है, ताकि वन्यजीव संरक्षण और विकास कार्यों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

सीमांकन से बढ़ेगा पर्यटन और व्यापार

उद्योग संगठनों का मानना है कि नए सीमांकन से सरिस्का क्षेत्र का दायरा बढ़ेगा, जिससे पर्यटन को नई गति मिलेगी। सरिस्का पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है, ऐसे में क्षेत्र के विस्तार से पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।

व्यापारियों का कहना है कि पर्यटन बढ़ने से होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार और अन्य सेवाओं से जुड़े व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे अलवर जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

2007 से जारी है सीमांकन का मुद्दा

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2007 से जुड़ी हुई है, जब केंद्र सरकार ने पहली बार इस क्षेत्र का सीमांकन किया था। उस समय व्यापारियों पर ज्यादा प्रतिबंध नहीं थे और व्यापार सामान्य रूप से चलता रहा।

हालांकि बाद के वर्षों में नियमों में बदलाव के चलते कई प्रकार की पाबंदियां लागू कर दी गईं, जिससे स्थानीय व्यापार प्रभावित हुआ। उद्योग संगठनों का कहना है कि इन प्रतिबंधों के कारण कई व्यवसायों को नुकसान उठाना पड़ा और विकास की गति धीमी हो गई।

सुप्रीम कोर्ट में अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा

वर्तमान में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सेंचुरी क्षेत्र की तुलना में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट का क्षेत्र अधिक निर्धारित हो गया है, जिसके कारण सीमांकन को पुनः स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है।

अब सुप्रीम कोर्ट सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतिम निर्णय लेगा, जिस पर आगे की कार्यवाही निर्भर करेगी।

निवेश पर पड़ रहा असर

उद्योग संगठनों ने यह भी बताया कि सीमांकन स्पष्ट नहीं होने के कारण कई बड़े निवेशकों की परियोजनाएं अटकी हुई हैं। जमीन की स्थिति स्पष्ट न होने से निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिससे नए निवेश पर असर पड़ा है।

व्यापारियों का कहना है that यदि सीमांकन प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाती है, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और अलवर में नए उद्योगों और पर्यटन परियोजनाओं को गति मिलेगी।

विकास की उम्मीदों के साथ आगे की राह

सरिस्का सीमांकन को लेकर उद्योग जगत का समर्थन इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से अपील की है कि इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि क्षेत्र में निवेश, पर्यटन और व्यापार को नई दिशा मिल सके।

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