डिजिटल दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन ठगी और फर्जी विज्ञापनों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। Meta Platforms के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म जैसे Facebook, Instagram और WhatsApp पर इन दिनों स्कैम के मामलों में तेजी देखी जा रही है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय जांच में सामने आया है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी संख्या में ऐसे विज्ञापन चल रहे हैं, जो यूजर्स को गलत निवेश और जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर ठगी का शिकार बना रहे हैं।
जांच में सामने आई गंभीर स्थिति
Financial Conduct Authority द्वारा की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एक सप्ताह की जांच के दौरान हजार से अधिक संदिग्ध विज्ञापनों की पहचान की गई। इनमें से कई विज्ञापन पहले ही रिपोर्ट किए जा चुके थे, इसके बावजूद वे प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय बने रहे। इससे यह सवाल उठता है कि कंपनियों को जानकारी होने के बावजूद ऐसे फर्जी विज्ञापन क्यों नहीं रोके जा सके। इन विज्ञापनों में ऐसे दावे किए जा रहे थे जो वास्तविकता से बिल्कुल अलग थे, जैसे कम समय में भारी मुनाफा या बिना जोखिम के गारंटीड रिटर्न।
बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या कायम
जांच एजेंसियों का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। कुछ लोग बार-बार अलग-अलग पहचान और तरीकों से ऐसे फर्जी विज्ञापन चला रहे हैं। हालांकि Meta का दावा है कि वह धोखाधड़ी रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आती है। यह समस्या केवल तकनीकी नहीं बल्कि निगरानी और प्राथमिकताओं से जुड़ी हुई मानी जा रही है।
निवेश के नाम पर ठगी का जाल
इन फर्जी विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को नकली निवेश योजनाओं में फंसाया जा रहा है। कई मामलों में बैंकिंग ऑफर्स, शेयर मार्केट टिप्स, क्रिप्टो निवेश और अन्य वित्तीय योजनाओं के नाम पर लोगों को आकर्षित किया जाता है। इसके अलावा अवैध जुआ, फर्जी दवाइयों और अन्य धोखाधड़ी वाले उत्पादों के विज्ञापन भी बड़ी संख्या में देखे गए हैं। ब्रिटेन में यह स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ऑनलाइन ठगी अब सबसे आम अपराधों में गिनी जाने लगी है और इसकी शुरुआत अक्सर सोशल मीडिया से ही होती है।
कानून मौजूद, लेकिन अमल में देरी
ब्रिटेन में Online Safety Act लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा बढ़ाना है। हालांकि, इस कानून के तहत फर्जी विज्ञापनों पर सख्त कार्रवाई से जुड़े प्रावधान अभी पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं। यही वजह है कि कंपनियों पर अपेक्षित स्तर की सख्ती नहीं हो पा रही है।एक परीक्षण में यह भी सामने आया कि एक फर्जी विज्ञापन, जिसमें हर हफ्ते 10 प्रतिशत कमाई का दावा किया गया था, आसानी से प्लेटफॉर्म पर स्वीकृत हो गया। जबकि अन्य देशों में सख्त नियमों के कारण ऐसे विज्ञापन तुरंत हटा दिए जाते हैं।
समस्या की जड़ क्या है
उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या तकनीकी कमी से ज्यादा प्राथमिकताओं से जुड़ी है। यदि कंपनियां स्कैम रोकने के लिए अधिक संसाधन और तकनीक का उपयोग करें, तो ऐसे मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है। लेकिन वर्तमान में विज्ञापन से होने वाली कमाई और निगरानी के बीच संतुलन नहीं बन पा रहा है। इससे यह साफ होता है कि प्लेटफॉर्म्स को अपनी जिम्मेदारी को और गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
यूजर्स के लिए सावधानी जरूरी
इस पूरे मामले से एक बात स्पष्ट हो जाती है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर विज्ञापन पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। यूजर्स को खासतौर पर उन ऑफर्स से सतर्क रहना चाहिए, जो कम समय में ज्यादा मुनाफा देने का दावा करते हैं। किसी भी निवेश से पहले उसकी पूरी जानकारी लेना और आधिकारिक स्रोतों से सत्यापन करना बेहद जरूरी है। साथ ही संदिग्ध विज्ञापनों की रिपोर्टिंग करना भी एक जिम्मेदार कदम है, जिससे अन्य लोगों को ठगी से बचाया जा सकता है।


