पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के असर अब भारत के औद्योगिक क्षेत्रों तक साफ दिखाई देने लगे हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर के सांगानेर इंडस्ट्रियल एरिया में LPG संकट ने टेक्सटाइल प्रिंटिंग उद्योग को लगभग ठप कर दिया है। यहां संचालित एक हजार से अधिक फैक्ट्रियों में से करीब 90 प्रतिशत फैक्ट्रियां कामर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण बंद पड़ी हैं। इस संकट के चलते उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हुआ है और उद्योग को हर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही हजारों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
उत्पादन में भारी गिरावट
सांगानेर क्षेत्र, जो देश के प्रमुख टेक्सटाइल प्रिंटिंग हब के रूप में जाना जाता है, वहां सामान्य दिनों में रोजाना 12 से 15 लाख मीटर कपड़े की छपाई होती थी। लेकिन LPG की कमी के कारण वर्तमान में यह उत्पादन घटकर महज एक लाख मीटर तक सिमट गया है। यहां की अधिकांश फैक्ट्रियां कामर्शियल LPG पर निर्भर हैं। प्रिंटिंग के बाद कपड़ों को सुखाने वाले ड्रायर और रंग को स्थायी बनाने वाली मशीनें गैस से ही संचालित होती हैं। कुछ ही फैक्ट्रियों में इलेक्ट्रिक बॉयलर लगे हैं, जबकि अधिकांश पूरी तरह LPG पर आधारित हैं।
फैक्ट्रियां बंद, मजदूरों पर दोहरी मार
गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण कई फैक्ट्रियां पिछले 10 से 15 दिनों से बंद पड़ी हैं। इससे वहां काम करने वाले मजदूर और कर्मचारी बेरोजगार होकर खाली बैठे हैं। फैक्ट्री संचालकों ने मजदूरों को स्पष्ट कर दिया है कि यदि दो दिनों के भीतर हालात सामान्य नहीं होते हैं, तो वे उनके खर्च का वहन नहीं कर पाएंगे और उन्हें अपने घर लौटना होगा। इस स्थिति ने मजदूरों के सामने दोहरी समस्या खड़ी कर दी है। एक ओर उन्हें रोजगार से हाथ धोना पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर घर वापस जाने के लिए अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ेगा।
पलायन की स्थिति बनने लगी
सांगानेर की फैक्ट्रियों में काम करने वाले अधिकांश मजदूर पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों से आते हैं। LPG संकट के चलते अब उनके सामने एक बार फिर पलायन की स्थिति बन रही है। कोरोना महामारी के बाद यह दूसरा मौका है जब मजदूरों को मजबूरी में अपने घर लौटने का विचार करना पड़ रहा है। कई मजदूरों ने अपना सामान पैक कर लिया है और ट्रेन व बसों के टिकट की तलाश शुरू कर दी है। मजदूरों का कहना है कि शादी-ब्याह के इस सीजन में उन्हें अधिक काम और आय की उम्मीद थी, लेकिन अचानक आई इस स्थिति ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है।
कारोबारी भी भारी नुकसान में
फैक्ट्री संचालकों के अनुसार हर यूनिट को रोजाना 45 किलो के 10 से 20 कामर्शियल सिलेंडरों की जरूरत होती है। गैस की कमी के कारण न केवल कपड़ों की छपाई रुकी है, बल्कि ड्राईंग, फिनिशिंग और कटिंग जैसे सभी कार्य प्रभावित हुए हैं। स्थानीय उद्योग से जुड़ी उद्यमी दीपा खुशलानी का कहना है कि कोरोना के बाद यह दूसरा बड़ा संकट है, जब उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। उन्होंने राज्य सरकार से जल्द राहत देने की अपील की है।
मुख्यमंत्री से लगाई जा रही गुहार
सांगानेर इंडस्ट्रियल एरिया प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विधानसभा क्षेत्र में आता है। ऐसे में कारोबारी और मजदूर दोनों ही उनसे हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही LPG की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इससे न केवल रोजगार पर असर पड़ेगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा।
अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर
पश्चिम एशिया में इज़राइल–ईरान–अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। LPG का आयात कम होने से देशभर में इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर सांगानेर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो उद्योग को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है और कई इकाइयों को स्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
वर्तमान स्थिति ने उद्योग और मजदूर दोनों के सामने अनिश्चितता खड़ी कर दी है। एक ओर जहां कारोबारी उत्पादन रुकने से परेशान हैं, वहीं मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो सांगानेर की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है। फिलहाल सभी की नजरें सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, जिससे यह तय होगा कि यह संकट कब तक खत्म होगा और उद्योग फिर से पटरी पर कब लौटेगा।


