राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक सरकारी स्कूल में सोमवार सुबह एक हादसा हो गया, जिसमें दो छोटे छात्र घायल हो गए। यह घटना सांसियों का तला उच्च प्राथमिक स्कूल में उस समय हुई जब प्रार्थना सभा समाप्त होने के बाद बच्चे अपनी कक्षाओं में लौटे थे।
जानकारी के अनुसार जैसे ही बच्चे क्लासरूम में पहुंचे, छत से लटका हुआ एक पंखा अचानक हुक टूटने के कारण नीचे गिर गया। पंखा सीधे कक्षा में मौजूद बच्चों के पास गिरा, जिससे कक्षा 1 में पढ़ने वाला 5 वर्षीय मनीष और कक्षा 2 का 6 वर्षीय मनीष घायल हो गए। हादसा होते ही कक्षा में मौजूद अन्य बच्चे घबरा गए और वहां अफरा-तफरी मच गई।
घायल बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया
घटना की सूचना मिलते ही स्कूल स्टाफ ने तुरंत दोनों घायल बच्चों को बाड़मेर के जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों बच्चों को चोटें आई हैं, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
स्कूल प्रशासन का कहना है कि हादसा अचानक हुआ और बच्चों को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाई गई। हालांकि इस घटना के बाद स्कूल में सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
मां ने शिक्षकों पर लगाया लापरवाही का आरोप
हादसे के बाद घायल बच्चे की मां ने स्कूल प्रशासन और शिक्षकों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्कूल में लगे पंखों और अन्य उपकरणों की नियमित जांच नहीं की जाती।
उन्होंने बताया कि हादसे के बाद पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने अपने वाहन से बच्चे को अस्पताल पहुंचाया। मां का आरोप है कि यदि समय रहते पंखे की स्थिति की जांच की जाती तो यह घटना टाली जा सकती थी। इस घटना के बाद अभिभावकों में भी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा
इस घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस हादसे को बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया और घायल बच्चों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
जूली ने कहा कि प्रदेश में तथाकथित “डबल इंजन” की सरकार के शासन में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों की जर्जर इमारतें, खराब सुविधाएं और संसाधनों की कमी के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से सड़क से लेकर विधानसभा तक स्कूलों की बदहाल स्थिति, टूटती छतों और खराब ढांचे के मुद्दे को लगातार उठाया गया है। इसके बावजूद सरकार इस दिशा में गंभीर कदम उठाने में असफल रही है।
स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि आखिर गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों के प्रति इतनी बेरुखी क्यों दिखाई जा रही है। उन्होंने पूछा कि जब कई सरकारी स्कूलों की इमारतें जर्जर हालत में हैं और वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, तो उनके मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए विशेष बजट क्यों नहीं घोषित किया जा रहा।
बाड़मेर के इस हादसे के बाद एक बार फिर सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों में लगे पंखों, छतों और अन्य ढांचागत सुविधाओं की नियमित जांच जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


