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गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की चेतावनी, लंबित मांगें नहीं मानीं तो शहीद दिवस पर आंदोलन

गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की चेतावनी, लंबित मांगें नहीं मानीं तो शहीद दिवस पर आंदोलन

राजस्थान में गुर्जर आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समाज की लंबित मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो 23 मई को शहीद दिवस के अवसर पर आंदोलन की नई रणनीति तय की जाएगी।

समिति का कहना है कि लंबे समय से कई महत्वपूर्ण मांगें लंबित हैं और सरकार की ओर से अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस कारण समाज में असंतोष बढ़ता जा रहा है और लोगों में आंदोलन को लेकर चर्चा तेज हो रही है।

समझौते के बावजूद कई मांगें अधूरी

संघर्ष समिति के नेताओं के अनुसार 8 जून 2025 को सरकार और समिति के बीच समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत आंदोलन के दौरान शहीद हुए रूपनारायण गुर्जर के परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई।

हालांकि समिति का आरोप है कि इस एक मांग के अलावा बाकी मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। नेताओं का कहना है कि सरकार ने कई मामलों में आश्वासन तो दिया था, लेकिन अब तक अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए हैं।

आंदोलन से जुड़े मामलों के निस्तारण की मांग

संघर्ष समिति ने आंदोलन से जुड़े मामलों के निस्तारण को लेकर भी नाराजगी जताई है। समिति का कहना है कि वर्ष 2023 से मार्च 2026 तक आंदोलन से जुड़े किसी भी मुकदमे का समाधान नहीं किया गया है।

नेताओं का दावा है कि नवंबर 2023 में 42 मामलों के निपटारे की बात कही गई थी, लेकिन अब तक उन मामलों के एफआईआर नंबर भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और न ही केस वापस लिए गए हैं। इस स्थिति से समाज में असंतोष और नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

देवनारायण योजना की समीक्षा की मांग

बैठक के दौरान देवनारायण योजना के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए गए। समिति का कहना है कि योजना की प्रगति संतोषजनक नहीं है।

इसलिए संघर्ष समिति ने तय किया है कि अब हर महीने मंत्री स्तर पर योजना की समीक्षा की मांग की जाएगी ताकि इससे जुड़ी योजनाओं का लाभ समाज तक सही तरीके से पहुंच सके।

आरजेएस बैकलॉग और पुराने मामलों का मुद्दा

समिति ने यह भी कहा कि राजस्थान न्यायिक सेवा यानी राजस्थान न्यायिक सेवा में बैकलॉग भर्ती अब तक लागू नहीं की गई है, जबकि इस संबंध में अदालत के निर्देश भी दिए जा चुके हैं।

इसके अलावा करौली जिले में आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज कुछ पुराने मामलों और संपत्ति कुर्की के आदेशों पर भी सरकार की धीमी कार्रवाई को लेकर असंतोष व्यक्त किया गया है। समिति का कहना है कि इन मामलों की जानकारी सरकार को पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

टीएसपी क्षेत्र में आरक्षण व्यवस्था पर सवाल

संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर टीएसपी क्षेत्र में एमबीसी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग को भी आरक्षण का लाभ देने की मांग की है।

समिति का कहना है कि राज्य के अन्य क्षेत्रों में इन वर्गों को आरक्षण का लाभ मिलता है, लेकिन टीएसपी क्षेत्रों में यह व्यवस्था लागू नहीं होने के कारण युवाओं को शिक्षा और रोजगार में बराबरी के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।

समिति के अनुसार टीएसपी क्षेत्र में फिलहाल कुल 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है, जिसमें अनुसूचित जनजाति को 45 प्रतिशत और अनुसूचित जाति को 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है, जबकि शेष पद अनारक्षित रहते हैं।

शहीद दिवस पर आंदोलन की रणनीति संभव

संघर्ष समिति का कहना है कि राज्य में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग आरक्षण व्यवस्था होने से सामाजिक असंतुलन की स्थिति पैदा हो रही है। ऐसे में सरकार को जल्द निर्णय लेकर सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने चाहिए।

समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो 23 मई को शहीद दिवस के अवसर पर आंदोलन की नई रणनीति का ऐलान किया जा सकता है।

इस चेतावनी के बाद एक बार फिर राजस्थान में गुर्जर आरक्षण का मुद्दा चर्चा में आ गया है और आने वाले समय में इस पर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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