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गैस संकट से जैसलमेर पर्यटन पर संकट

गैस संकट से जैसलमेर पर्यटन पर संकट

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारत के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है और राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल जैसलमेर में एलपीजी गैस की कमी ने पर्यटन उद्योग के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से होटल, रेस्टोरेंट और रिसोर्ट संचालकों को अपने प्रतिष्ठान चलाने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि जिले में 150 से अधिक रिसोर्ट बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण कई प्रतिष्ठानों में रसोई संचालन मुश्किल हो गया है। ऐसे में पर्यटकों को भोजन उपलब्ध कराना भी चुनौती बन गया है।

इस पूरे संकट को लेकर रिसोर्ट संचालकों में गहरी चिंता देखी जा रही है और हालात पर चर्चा करने के लिए आज शाम एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में बुकिंग रद्द करने से लेकर रिसोर्ट्स को अस्थायी रूप से बंद करने जैसे कड़े फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

रिसोर्ट संचालकों की अहम बैठक आज

जैसलमेर में पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों ने मौजूदा हालात को देखते हुए एक सामूहिक बैठक बुलाने का फैसला किया है। इस बैठक में जिले के कई बड़े और छोटे रिसोर्ट संचालक शामिल होंगे।

सम रिसोर्ट एंड वेलफेयर सोसायटी  के पदाधिकारी उपेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि गैस संकट के कारण रिसोर्ट उद्योग के सामने अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई रिसोर्ट्स में पर्यटकों की बुकिंग मौजूद है, लेकिन गैस की कमी के कारण रसोई संचालन में कठिनाई आ रही है। यदि रसोई ही बंद हो जाती है तो पर्यटकों को भोजन उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा। ऐसे में संचालकों को मजबूरी में रिसोर्ट्स बंद करने का निर्णय लेना पड़ सकता है।

फिलहाल 45 प्रतिशत रिसोर्ट्स में बुकिंग

रिसोर्ट संचालकों के अनुसार फिलहाल जैसलमेर के रिसोर्ट्स में करीब 45 प्रतिशत बुकिंग चल रही है। पर्यटकों की आवाजाही अभी जारी है और कई लोग रेगिस्तान पर्यटन का आनंद लेने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। लेकिन गैस की उपलब्धता नहीं होने से रिसोर्ट संचालकों के सामने सबसे बड़ी समस्या रसोई संचालन की है। पर्यटन उद्योग में भोजन व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण सेवाओं में से एक होती है और इसके बिना पर्यटकों को संतुष्ट करना संभव नहीं है।

उपेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि यदि गैस संकट जल्द खत्म नहीं हुआ और रिसोर्ट्स को बंद करना पड़ा तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। उनका कहना है कि एक बार रिसोर्ट बंद होने के बाद उन्हें दोबारा शुरू करना आसान नहीं होगा और संभव है कि वे सीधे सितंबर के आसपास ही फिर से संचालन की स्थिति में आ पाएं।

करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका

जैसलमेर में पर्यटन उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। यहां हर साल हजारों देशी और विदेशी पर्यटक आते हैं, जिससे होटल, रिसोर्ट, रेस्टोरेंट, टैक्सी सेवाओं और स्थानीय व्यापार को बड़ा लाभ मिलता है। लेकिन गैस संकट के कारण यदि रिसोर्ट्स बंद होते हैं तो इससे पर्यटन उद्योग को करोड़ों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर स्थानीय रोजगार और व्यापार पर भी पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन गतिविधियों में गिरावट आने से स्थानीय दुकानदारों, गाइड्स, ड्राइवरों और अन्य सेवा प्रदाताओं की आय पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही जैसलमेर की पर्यटन छवि को भी नुकसान पहुंच सकता है।

सरकार की बैठक और निर्देश

गैस संकट को देखते हुए राज्य सरकार भी सक्रिय नजर आ रही है। बुधवार को भजनलाल शर्मा  ने प्रदेश में गैस आपूर्ति की स्थिति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की थी। इस बैठक में अधिकारियों को गैस वितरण व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने गड़बड़ी करने वाली गैस एजेंसियों और मुनाफाखोरी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा गैस आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। सरकार का कहना है कि गैस की आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण चुनौती बनी हुई है।

प्रदेशभर में दिख रहा संकट

जैसलमेर ही नहीं, बल्कि राजस्थान के कई जिलों में गैस संकट के हालात दिखाई दे रहे हैं। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग गैस सिलेंडर के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।

कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी के कारण होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट संचालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर सीमित मात्रा में ही गैस उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो पर्यटन और सेवा क्षेत्र से जुड़े व्यवसायों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पर्यटन उद्योग के सामने बड़ी चुनौती

जैसलमेर का पर्यटन उद्योग रेगिस्तान सफारी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और रिसोर्ट आधारित पर्यटन के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां के रिसोर्ट्स पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति और रेगिस्तानी जीवन का अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं। लेकिन गैस संकट के कारण इस पूरे उद्योग के सामने संचालन की चुनौती खड़ी हो गई है। यदि रिसोर्ट्स बंद होते हैं तो इससे पर्यटन गतिविधियों में भारी गिरावट आ सकती है।

अब सभी की नजर रिसोर्ट संचालकों की आज होने वाली बैठक पर टिकी हुई है। इस बैठक में लिए जाने वाले निर्णय तय करेंगे कि आने वाले दिनों में जैसलमेर का पर्यटन उद्योग किस दिशा में जाएगा और गैस संकट का असर कितना गहरा होगा।

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