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राजस्थान में LPG संकट से उद्योग और होटल प्रभावित

राजस्थान में LPG संकट से उद्योग और होटल प्रभावित

राजस्थान में व्यावसायिक LPG गैस सिलेंडरों की आपूर्ति ठप होने के बाद अब हालात धीरे-धीरे गंभीर होते जा रहे हैं। व्यावसायिक गैस सिलेंडर पर रोक के पांचवें दिन प्रदेश के कई क्षेत्रों में इसका व्यापक असर दिखाई देने लगा है। होटल, हॉस्टल, मैस और सरकारी व निजी कार्यालयों की कैंटीनों के संचालन पर संकट मंडराने लगा है। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर गैस का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है, जिससे भोजन व्यवस्था बाधित होने लगी है। इसके अलावा उद्योगों में भी उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कई कंपनियों ने गैस की कमी के कारण उत्पादन कम कर दिया है और हजारों मजदूरों को अस्थायी रूप से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है।

होटल और पर्यटन उद्योग पर बड़ा असर

व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति रुकने का सबसे ज्यादा असर होटल और पर्यटन उद्योग पर पड़ा है। होटल संचालकों का कहना है कि कई दिनों से गैस की आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे रसोई संचालन मुश्किल होता जा रहा है। शादियों के सीजन के बीच यह संकट और गंभीर हो गया है। होटल उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस की कमी के कारण भोजन व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिसके चलते कई कार्यक्रमों को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई होटलों में पहले से बुक की गई लगभग 40 प्रतिशत बुकिंग निरस्त करनी पड़ी है। इससे होटल कारोबारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालात को देखते हुए कई होटल संचालकों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किराए में भी कटौती कर दी है।

उद्योगों में उत्पादन पर पड़ा असर

गैस संकट का असर केवल होटल उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। कई छोटे और मध्यम उद्योगों में व्यावसायिक गैस का उपयोग उत्पादन प्रक्रिया में किया जाता है।

गैस की आपूर्ति रुकने के कारण कई उद्योगों में उत्पादन धीमा पड़ गया है। कुछ कंपनियों ने तो फिलहाल उत्पादन पूरी तरह रोक दिया है। उत्पादन प्रभावित होने के कारण कंपनियों ने हजारों मजदूरों को अस्थायी छुट्टी देकर घर भेज दिया है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो औद्योगिक बंदी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर भी संकट

गैस संकट का असर अब ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। अधिकांश ऑनलाइन फूड डिलीवरी होटल और रेस्टोरेंट की रसोई पर निर्भर होती है।

होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि उनके पास गैस का स्टॉक अब लगभग समाप्त हो चुका है। यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति नहीं हुई तो आज या कल में ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाएं भी बंद करनी पड़ सकती हैं। इससे उन हजारों लोगों की रोजमर्रा की सुविधा प्रभावित होगी जो ऑनलाइन माध्यम से भोजन मंगवाने पर निर्भर रहते हैं।

मुख्यमंत्री ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक

गंभीर होते हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और गैस कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को सख्त निर्देश दिए कि गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां भी निरस्त कर दी गई हैं, ताकि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा सके और आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

आपूर्ति केंद्र सरकार के अधीन

गैस सिलेंडरों की कमी को लेकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडरों की आपूर्ति का जिम्मा पेट्रोलियम कंपनियों के पास है, जो केंद्र सरकार के अधीन आती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मुख्य कार्य आपूर्ति की मॉनिटरिंग करना और व्यवस्था पर नजर रखना है। कालाबाजारी रोकने के लिए विभाग के कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

मंत्री ने बताया कि अधिकारियों को गैस एजेंसियों की नियमित जांच करने और स्थिति पर नजर रखने के लिए कहा गया है। इसके अलावा जिला कलेक्टरों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

हॉस्टल और मैस संचालन पर संकट

राज्य में हजारों हॉस्टल और मैस व्यावसायिक गैस सिलेंडरों पर निर्भर हैं। गैस की आपूर्ति ठप होने के कारण इन संस्थानों का संचालन भी प्रभावित हो गया है। हॉस्टल और मैस संचालकों का कहना है कि उनके पास अब गैस का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। यदि अगले दो से चार दिनों में स्थिति सामान्य नहीं होती है तो उन्हें अपने संस्थान बंद करने पड़ सकते हैं।

विशेष रूप से कोचिंग हब के रूप में प्रसिद्ध जयपुर शहर में इसका असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। अनुमान के अनुसार केवल जयपुर में ही लगभग पांच हजार से अधिक हॉस्टल और मैस इस संकट से प्रभावित हुए हैं।

बेरोजगारी बढ़ने की आशंका

हॉस्टल, मैस और कैंटीन संचालन से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। गैस की कमी के कारण यदि ये संस्थान बंद होते हैं तो हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है। हॉस्टल और मैस संचालकों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो बड़े आर्थिक नुकसान से बचने के लिए उन्हें अपने प्रतिष्ठान अस्थायी रूप से बंद करने पड़ सकते हैं।

फिलहाल पूरे प्रदेश में गैस संकट को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है। उद्योग, होटल व्यवसायी और आम लोग सभी इस उम्मीद में हैं कि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य होगी और स्थिति में सुधार आएगा।

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