latest-newsजयपुरराजनीतिराजस्थान

एलपीजी संकट को लेकर अशोक गहलोत का केंद्र पर हमला

एलपीजी संकट को लेकर अशोक गहलोत  का केंद्र पर हमला

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश में रसोई गैस की संभावित कमी को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन रहे युद्ध जैसे हालातों के कारण एलपीजी की आपूर्ति पर संकट गहराने की आशंका है, जो देश के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

जयपुर से जारी अपने बयान और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से गहलोत ने कहा कि यदि समय रहते इस स्थिति का आकलन नहीं किया गया तो इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई और रोजमर्रा के जीवन पर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस संभावित संकट को लेकर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखा रही है। गहलोत का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव का असर ऊर्जा आपूर्ति पर तेजी से पड़ता है। ऐसे में सरकार को पहले से तैयारी करनी चाहिए ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

खाड़ी क्षेत्र के हालात का असर

गहलोत ने अपने बयान में कहा कि खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं और इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति होती है। भारत भी अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है। उन्होंने कहा कि यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में देश के भीतर एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता पर भी असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

गहलोत के अनुसार सरकार को पहले से स्थिति का आकलन करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखनी चाहिए थी, ताकि संभावित संकट की स्थिति में आपूर्ति व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।

केंद्र सरकार पर लगाया लापरवाही का आरोप

सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश के सामने संभावित संकट खड़ा होने के बावजूद केंद्र सरकार हमेशा की तरह लापरवाह और असंवेदनशील नजर आ रही है।

उन्होंने कहा कि समय रहते स्थिति का आकलन नहीं कर पाना सरकार की सामूहिक विफलता को दर्शाता है। गहलोत के अनुसार ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को अधिक सक्रिय और सतर्क रहना चाहिए। उनका कहना है कि यदि सरकार पहले से रणनीति बनाकर काम करती तो एलपीजी की आपूर्ति को लेकर लोगों के बीच इस तरह की चिंता पैदा नहीं होती।

आमजन से जिम्मेदारी से उपयोग की अपील

पूर्व मुख्यमंत्री ने आम लोगों से भी अपील की कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए रसोई गैस का उपयोग जिम्मेदारी और मितव्ययता के साथ करें। उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर का अनावश्यक उपयोग करने से बचना चाहिए और जितना संभव हो उतनी सावधानी के साथ इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे संभावित कमी की स्थिति में अधिक लोगों तक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

गहलोत ने यह भी कहा कि केवल एलपीजी ही नहीं बल्कि पेट्रोल और डीजल के उपयोग में भी संयम बरतना चाहिए, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय हालातों का असर ईंधन की उपलब्धता और कीमतों दोनों पर पड़ सकता है।

मजदूरों के भोजन केंद्रों पर गैस आपूर्ति जरूरी

अपने बयान में गहलोत ने विशेष रूप से उन ढाबों और भोजनालयों का भी जिक्र किया जहां बड़ी संख्या में श्रमिक भोजन करते हैं। उन्होंने कहा कि दैनिक मजदूरी करने वाले मजदूर अक्सर ढाबों में ही खाना खाते हैं।

ऐसी स्थिति में यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि इन ढाबों में एलपीजी गैस की नियमित आपूर्ति बनी रहे। यदि इन स्थानों पर गैस की कमी हो जाती है तो इसका सीधा असर मजदूर वर्ग पर पड़ेगा, जो पहले ही आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में होता है। उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि इस पहलू को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति व्यवस्था की योजना बनाई जाए ताकि श्रमिकों को भोजन से जुड़ी किसी तरह की परेशानी न हो।

अन्नपूर्णा रसोई में गैस उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान सरकार से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि राज्य में संचालित इंदिरा रसोई , जिसे वर्तमान में अन्नपूर्णा रसोई के नाम से चलाया जा रहा है, वहां गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इन रसोई योजनाओं पर लाखों जरूरतमंद लोग, छात्र और श्रमिक भोजन के लिए निर्भर रहते हैं। यदि गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है तो इन योजनाओं का संचालन भी प्रभावित हो सकता है। गहलोत के अनुसार इन योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ती दरों पर भोजन उपलब्ध कराना है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में इनका संचालन बाधित नहीं होना चाहिए।

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती संवेदनशीलता

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में होने वाले बदलावों का असर भारत जैसे बड़े आयातक देश पर तुरंत पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में अस्थिरता या युद्ध जैसी परिस्थितियां बनने पर तेल और गैस की कीमतों के साथ-साथ आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इसी कारण कई बार सरकारों को पहले से रणनीतिक भंडारण और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर काम करना पड़ता है।

संभावित संकट पर राजनीतिक बहस तेज

एलपीजी आपूर्ति को लेकर उठी इस चिंता के बाद राजनीतिक स्तर पर भी बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां केंद्र सरकार की तैयारियों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात और अधिक गंभीर होते हैं तो ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन की कीमतों का मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार संभावित एलपीजी संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading