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ईरान जंग पर ट्रम्प की बड़ी चेतावनी

ईरान जंग पर ट्रम्प की बड़ी चेतावनी

मध्य पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल आपूर्ति को रोकने की कोशिश करता है, तो अमेरिका उस पर बीस गुना ज्यादा ताकत के साथ हमला करेगा। ट्रम्प ने यह भी स्पष्ट किया कि यह युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक दुश्मन की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती।

फ्लोरिडा के डोरल शहर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के पांच हजार से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। उनके अनुसार कुछ बेहद महत्वपूर्ण ठिकानों को जानबूझकर अभी निशाना नहीं बनाया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई के लिए विकल्प मौजूद रहें।

अमेरिका और इजराइल का दावा, युद्ध में बढ़त

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ने इस युद्ध में काफी बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। उनका मानना है कि मौजूदा हालात में यह संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन अभी सैन्य अभियान जारी रहेगा। ट्रम्प के मुताबिक अमेरिकी सेना ने ईरान के करीब 80 प्रतिशत मिसाइल लॉन्चर और उनसे जुड़े ठिकानों को नष्ट कर दिया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी हमलों में ईरान की ड्रोन निर्माण क्षमता को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रम्प के अनुसार ईरानी नौसेना को भी गंभीर क्षति हुई है और करीब 46 नौसैनिक जहाजों को डुबो दिया गया है। उनका कहना था कि अमेरिकी सेना ने बेहद सटीक और प्रभावी कार्रवाई की है, जिससे ईरान की सैन्य शक्ति को बड़ा झटका लगा है।

तेल बाजार पर पड़ा असर

युद्ध को लेकर ट्रम्प के हालिया बयान का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी देखने को मिला है। उन्होंने सोमवार को कहा था कि यह युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

मंगलवार सुबह एशियाई बाजारों में कारोबार शुरू होते ही अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत लगभग 8.5 प्रतिशत गिरकर करीब 92.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिका में ट्रेड होने वाला तेल लगभग 9 प्रतिशत गिरकर करीब 88.60 डॉलर प्रति बैरल रह गया। हालांकि गिरावट के बावजूद तेल की कीमतें युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में अब भी लगभग 30 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं।

तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक प्रभाव एशियाई शेयर बाजारों पर भी पड़ा। जापान के शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक Nikkei 225 करीब 2.8 प्रतिशत चढ़ गया, जबकि दक्षिण कोरिया के Kospi में पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई। एशिया के कई देश खाड़ी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं, इसलिए तेल की कीमतों में कमी से उनके बाजारों को राहत मिलती है।

ईरानी महिला खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया में शरण

युद्ध और राजनीतिक तनाव के बीच खेल जगत से जुड़ा एक संवेदनशील मामला भी सामने आया है। एशियन कप से बाहर होने के बाद ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया ने मानवीय वीजा देकर अपने देश में शरण दी है।

ऑस्ट्रेलिया के इमिग्रेशन मंत्री टोनी बर्क ने बताया कि खिलाड़ियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। जिन खिलाड़ियों को वीजा मिला है उनमें फतेमेह पसंदिदेह, जहरा घनबारी, जहरा सरबली, अतेफे रमजानजादेह और मोना हमौदी शामिल हैं।

यह मामला तब सामने आया जब दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच से पहले इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान नहीं गाया था। इसके बाद ईरान में कुछ समूहों ने उनकी आलोचना की और सख्त कार्रवाई की मांग की। इस घटना के बाद खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।

अंतरराष्ट्रीय समर्थन और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी पुष्टि की कि इन खिलाड़ियों को मानवीय आधार पर वीजा दिया गया है। इस वीजा के तहत वे ऑस्ट्रेलिया में रह सकती हैं, काम कर सकती हैं और पढ़ाई भी कर सकती हैं।

रविवार को गोल्ड कोस्ट स्टेडियम के बाहर सैकड़ों लोगों ने खिलाड़ियों के समर्थन में प्रदर्शन किया और “सेव अवर गर्ल्स” के नारे लगाए। इस मुद्दे पर ट्रम्प ने भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका भी इन खिलाड़ियों को शरण देने के लिए तैयार है।

लेबनान में बच्चों पर जंग का असर

इस बीच संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNICEF ने लेबनान में जारी संघर्ष को लेकर चिंता जताई है। संस्था के अनुसार अब तक कम से कम 83 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 254 बच्चे घायल हुए हैं। यूनीसेफ ने कहा कि क्षेत्र में चल रहे सैन्य संघर्ष का सबसे गंभीर असर बच्चों पर पड़ रहा है। संस्था ने सभी पक्षों से अपील की है कि नागरिकों और खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन किया जाए।

तुर्किये ने ईरानी राजदूत को तलब किया

इस युद्ध के बीच एक और कूटनीतिक तनाव तब पैदा हुआ जब ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल तुर्किये  के एयरस्पेस में पहुंच गई। हालांकि नाटो के एयर डिफेंस सिस्टम ने उसे मार गिराया।

मिसाइल का कुछ मलबा तुर्किये के पूर्वी शहर गाजियांतेप के पास एक खाली मैदान में गिरा, हालांकि इससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ। इसके बाद तुर्किये ने ईरान के राजदूत मोहम्मद हसन हबीबोल्लाहजाद को तलब कर इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा।

हिजबुल्लाह की चेतावनी

उधर लेबनान के संगठन हिजबुल्लाह  ने भी इस संघर्ष को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। संगठन के सांसद दल के प्रमुख मोहम्मद राद ने कहा कि उनकी लड़ाई सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए है और वे किसी भी कीमत पर इजराइल के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा कि संगठन की कार्रवाई का उद्देश्य कब्जाई गई जमीन को वापस हासिल करना है। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि मध्य पूर्व में तनाव फिलहाल कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।

युद्ध के भविष्य को लेकर ट्रम्प का दावा

रिपब्लिकन नेताओं की बैठक में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका इस संघर्ष में कई मायनों में जीत हासिल कर चुका है, लेकिन अभी अंतिम जीत बाकी है। उन्होंने दावा किया कि जैसे ही यह सैन्य अभियान समाप्त होगा, दुनिया पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो जाएगी।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व का यह संघर्ष वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और सुरक्षा संतुलन पर लंबे समय तक असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में इस युद्ध की दिशा और परिणाम पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

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