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समदड़ी मोदरान रेलखंड पर स्पीड ट्रायल सफल

समदड़ी मोदरान रेलखंड पर स्पीड ट्रायल सफल

राजस्थान के जोधपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले समदड़ी–भीलड़ी रेलखंड में रेलवे ने ट्रैक अपग्रेडेशन के तहत एक महत्वपूर्ण स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया है। रेलवे अधिकारियों की मौजूदगी में समदड़ी से मोदरान स्टेशन के बीच ट्रेन को 121 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ाया गया। इस ट्रायल को रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी परीक्षण माना जा रहा है, जिससे भविष्य में इस रेलखंड पर ट्रेनों की गति बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

इस परीक्षण के दौरान ट्रेन ने समदड़ी से मोदरान स्टेशन तक की दूरी लगभग 1 घंटा 10 मिनट में पूरी की। ट्रायल सफल रहने के बाद रेलवे अधिकारियों ने संतोष जताया और बताया कि अब इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट रेलवे मुख्यालय को भेजी जाएगी। मुख्यालय से स्वीकृति मिलने के बाद इस रेलखंड को 110 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार के लिए उपयुक्त घोषित किया जाएगा।

स्पीड बढ़ने से यात्रियों को होगा फायदा

वर्तमान समय में मोदरान से समदड़ी के बीच सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रतिघंटा तक सीमित है। हालांकि ट्रैक के उन्नयन और स्पीड ट्रायल के बाद जल्द ही इस सेक्शन में ट्रेनों की गति बढ़ाकर 110 किलोमीटर प्रतिघंटा कर दी जाएगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस निर्णय से यात्रियों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। ट्रेनों की गति बढ़ने से यात्रा का समय कम होगा और इस रेलखंड पर सफर पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक हो सकेगा।

दूसरे चरण में मोदरान से भीलड़ी तक होगा ट्रायल

रेलवे विभाग ने इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। पहले चरण में समदड़ी से मोदरान तक स्पीड ट्रायल किया गया है। इसके बाद दूसरे चरण में मोदरान से भीलड़ी के बीच लगभग 125 किलोमीटर लंबे सेक्शन में भी इसी तरह का स्पीड ट्रायल किया जाएगा। जब पूरे समदड़ी–भीलड़ी रेलखंड पर गति सीमा बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तब इस 223.44 किलोमीटर लंबे रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों के करीब 30 मिनट तक का समय बच सकेगा।

ट्रैक कैटेगरी के आधार पर तय होती है गति

रेलवे ट्रैक की स्थिति और गुणवत्ता के आधार पर ट्रेनों की अधिकतम गति निर्धारित करता है। वर्तमान में समदड़ी से भीलड़ी के बीच का रेलमार्ग डीई कैटेगरी में आता है। स्पीड ट्रायल और ट्रैक उन्नयन के बाद समदड़ी से मोदरान के बीच इस रेलखंड को डी स्पेशल कैटेगरी में रखा जाएगा। इसके बाद इस मार्ग पर ट्रेनों की गति 100 किलोमीटर प्रतिघंटा से बढ़कर 110 किलोमीटर प्रतिघंटा हो जाएगी।

रेलवे की विभिन्न कैटेगरी के अनुसार ट्रेनों की गति तय होती है। ए कैटेगरी में ट्रेनों की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रतिघंटा तक होती है, जबकि बी कैटेगरी में 130 किलोमीटर प्रतिघंटा और सी कैटेगरी में 120 से 125 किलोमीटर प्रतिघंटा तक गति निर्धारित की जाती है।

बागरा यार्ड में कम करनी पड़ी गति

स्पीड ट्रायल के दौरान ट्रेन को बागरा यार्ड में धीमी गति से गुजरना पड़ा। यहां रेलवे पटरियों के स्लीपर बदलने का काम चल रहा था। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए इस स्थान पर ट्रेन को 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की सावधानीपूर्ण गति से चलाया गया। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है और जब तक ट्रैक पर मरम्मत या निर्माण कार्य चलता है, तब तक वहां ट्रेन की गति सीमित रखी जाती है।

भविष्य में 130 किमी प्रतिघंटा तक रफ्तार बढ़ाने की योजना

समदड़ी–भीलड़ी रेलखंड सामरिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह राजस्थान को गुजरात से जोड़ने वाला प्रमुख रेलमार्ग है। इस मार्ग पर वर्तमान में दोहरीकरण का कार्य भी चल रहा है, जिसके साथ ही ट्रैक की कैटेगरी को भी उन्नत किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। भविष्य में इस पूरे रेलखंड को अपग्रेड कर ट्रेनों की गति 130 किलोमीटर प्रतिघंटा तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

समदड़ी–भीलड़ी रेलखंड का महत्व

समदड़ी–भीलड़ी रेलमार्ग कुल 223.44 किलोमीटर लंबा है और यह गुजरात को राजस्थान से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रेलवे रूट है। इस सेक्शन में कुल 21 रेलवे स्टेशन आते हैं। इतिहास की बात करें तो वर्ष 2007 तक यह रेलमार्ग मीटर गेज लाइन था। इसके बाद इसे ब्रॉडगेज में परिवर्तित किया गया और 14 अक्टूबर 2010 से इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ।

रेलवे अधिकारियों का बयान

जोधपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि समदड़ी से मोदरान के बीच सफलतापूर्वक स्पीड ट्रायल किया गया है। उन्होंने कहा कि ट्रैक को अपग्रेड करने की प्रक्रिया का यह एक महत्वपूर्ण चरण है और आने वाले समय में इस रेलमार्ग की गति सीमा में और वृद्धि की जाएगी। रेलवे के अनुसार इस परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल ट्रेनों की गति बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को अधिक सुरक्षित और तेज यात्रा का अनुभव भी मिलेगा।

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