राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान दिया कुमारी, जो उप मुख्यमंत्री एवं सार्वजनिक निर्माण मंत्री हैं, ने उदयपुर जिले के विकास से जुड़ा बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र में पिछले दो वर्षों के भीतर सड़क निर्माण और सुधार से संबंधित 95 कार्यों पर कुल 65 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की गई है। इनमें से 35 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि देरी से चल रहे 11 कार्य इसी महीने पूरे होने की संभावना है।
प्रश्नकाल में हुआ व्यापक चर्चा
प्रश्नकाल के दौरान यह जवाब विधायक उदयलाल डांगी के पूरक प्रश्नों के संदर्भ में दिया गया। मंत्री ने सूचित किया कि वल्लभनगर क्षेत्र में जिन कार्यों को मंजूरी दी गई है, उनमें से 32 अभी प्रगति पर हैं, जबकि 28 कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी बजट वर्ष 2026-27 के अंतर्गत डबोक NH-48 से टांक तक सड़क निर्माण का कार्य आठ करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
सड़क मरम्मत और सुधार कार्यों की वर्तमान स्थिति
सदन में प्रस्तुत लिखित जवाब में बताया गया कि वल्लभनगर क्षेत्र की कुल 86 सड़कें क्षतिग्रस्त या नॉन पेचेबल स्थिति में थीं। इनमें से 43 कार्यों के लिए स्वीकृति जारी की जा चुकी है। स्वीकृत परियोजनाओं में से 17 कार्य पूर्ण हो गए हैं और 11 कार्य विभिन्न चरणों में प्रगतिरत हैं। वहीं सात कार्यों से संबंधित निविदा स्वीकृति पत्र जारी किए जा चुके हैं। शेष आठ कार्यों की निविदाएं पांच मार्च को प्राप्त की जानी हैं, जिसके बाद इन पर भी क्रियान्वयन शुरू होगा।
मंत्री द्वारा सदन में दिए गए विस्तृत विवरण के अनुसार यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी कार्य समयसीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं, ताकि क्षेत्र की यातायात सुविधाओं में सुधार हो और ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक आवागमन सुगम बने।
राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में सड़क नवीनीकरण
दिया कुमारी ने कहा कि राज्य सरकार ने बजट वर्ष 2026-27 में सड़क नवीनीकरण और सुदृढ़ीकरण को प्रमुख प्राथमिकता दी है। नॉन पेचेबल और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए 1400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस धनराशि का उपयोग पारस्परिक प्राथमिकता के आधार पर सड़कों के चयन और उनके नवीनीकरण में किया जाएगा। सरकार का यह प्रयास है कि जिन क्षेत्रों में सड़क व्यवस्था लंबे समय से प्रभावित है, उन्हें जल्द से जल्द बेहतर मूलभूत सुविधाएँ मिल सकें।


