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अजमेर में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान: जनसंख्या, धर्मांतरण और युवा पीढ़ी पर तीखी टिप्पणी

अजमेर में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान: जनसंख्या, धर्मांतरण और युवा पीढ़ी पर तीखी टिप्पणी

अजमेर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) ने जनसंख्या संतुलन, धर्मांतरण और युवाओं के भटकाव जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। अपने बेबाक अंदाज और स्पष्टवादिता के लिए पहचाने जाने वाले शास्त्री ने मंच से दिए अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक बिंदुओं को उठाया। अजमेर (Ajmer)  में आयोजित इस कार्यक्रम को सुनने के लिए हजारों लोग पहुंचे थे। धीरेंद्र शास्त्री ने अपने वक्तव्य में वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों, धार्मिक पहचान और बदलती जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भारत में जनसंख्या के संदर्भ में जो परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं, वे केवल राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।

हिंदू जनसंख्या को लेकर शास्त्री के विचार

कार्यक्रम के दौरान शास्त्री ने हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर विस्तृत टिप्पणी की। उनका कहना था कि देश में तेजी से बदल रहा जनसंख्या संतुलन भविष्य के सामाजिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सनातन परंपरा को सुरक्षित रखना है, तो हिंदू समाज को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रत्येक हिंदू परिवार को कम से कम चार बच्चों का पालन-पोषण करने पर विचार करना चाहिए। हालांकि यह उनका व्यक्तिगत मत था, लेकिन मंच से इसे गंभीर मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने हल्के अंदाज में यह भी कहा कि भविष्य में विवाह होने पर वे स्वयं भी इस दिशा में योगदान देंगे।

धर्मांतरण पर बयान और ‘अमर अकबर एंथनी’ का उदाहरण

धर्मांतरण विषय पर बोलते हुए शास्त्री ने कहा कि समाज में कई लोग अपनी परंपराओं और मूल पहचान से दूर होते जा रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने 1977 की लोकप्रिय फिल्म Amar Akbar Anthony का उल्लेख किया। उनका कहना था कि फिल्म का उदाहरण यह दर्शाता है कि अंततः सभी पात्रों की जड़ें एक ही थीं। शास्त्री के अनुसार, यदि लोगों को यह समझ आ जाए कि उनके पूर्वज सनातन परंपरा से जुड़े थे, तो धर्मांतरण की प्रवृत्ति स्वतः ही समाप्त हो सकती है। उन्होंने घर वापसी की संकल्पना पर भी जोर दिया और कहा कि अपनी जड़ों को समझना समाज के हित में है।

शिक्षा, भक्ति और सहयोग—धर्मांतरण रोकने के तीन उपाय

अपने संबोधन में शास्त्री ने धर्मांतरण रोकने के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए। पहला, समाज में शिक्षा का प्रसार आवश्यक है। उनके अनुसार जागरूकता और ज्ञान की कमी कई बार कमजोर निर्णयों की वजह बनती है। दूसरा, भक्ति और आध्यात्मिकता से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और अंधविश्वास कम होता है। तीसरा, समाज के सक्षम लोगों को आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करनी चाहिए, ताकि कोई भी आवश्यकता के कारण दिशा न बदल दे।

सोशल मीडिया और युवाओं को लेकर संदेश

युवा पीढ़ी, विशेषकर किशोरों और युवतियों के सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रिय होने को लेकर शास्त्री ने अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के समय में इंस्टाग्राम जैसी प्लेटफॉर्म पर सामग्री बनाते हुए कई युवा अपनी ऊर्जा का सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि युवाओं को अपनी क्षमता का उपयोग शिक्षण, प्रतियोगी परीक्षाओं और रचनात्मक कार्यों में लगाना चाहिए। बेटियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उन्हें अपने लक्ष्यों पर ध्यान रखते हुए आईएएस, आईपीएस जैसी ऊँची उपलब्धियों की ओर बढ़ना चाहिए। धार्मिक ग्रंथ भागवत गीता (Bhagavad Gita) के श्लोक ‘स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति के लिए अपने धर्म, संस्कृति और कर्तव्य का पालन सर्वोपरि होना चाहिए।

अजमेर में हुआ विशाल आयोजन

अजमेर में आयोजित इस कार्यक्रम में राजस्थान के विभिन्न जिलों से भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए थे, ताकि कार्यक्रम सुचारु रूप से संचालित हो सके। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं ने भी शास्त्री के वक्तव्य के विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय व्यक्त की। कई लोगों ने इसे समाज की वर्तमान चुनौतियों पर खुला संवाद बताया, वहीं कुछ ने इसे सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने वाला संदेश माना।

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