राजस्थान की टोंक लोकसभा सीट से पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जोनापुरिया इस समय एक गंभीर विवाद के केंद्र में हैं, जहां उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने कंबल-वितरण कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम महिलाओं से उनके नाम पूछकर कंबल वापस ले लिए। यह घटना निवाई क्षेत्र के करेड़ा बुजुर्ग गांव की बताई जा रही है, जहां रविवार 22 फरवरी को सीता-राम मंदिर परिसर में गरीबों के लिए कंबल वितरण का आयोजन किया गया था।
नाम पूछने के बाद महिला को कंबल छोड़ने का निर्देश
वायरल वीडियो के अनुसार, कंबल बांटते समय पूर्व सांसद नीचे बैठी एक महिला से उसका नाम पूछते हैं। महिला ने अपना नाम सुकरान खान बताया। नाम सुनते ही जोनापुरिया ने उसे एक तरफ हटने को कहा और कंबल वहीं छोड़ देने का निर्देश दिया। वहां मौजूद अन्य महिलाओं ने भी आरोप लगाया कि पूर्व सांसद ने पहले उन्हें कंबल दिए थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि वे मुस्लिम हैं, तो उन्होंने सभी कंबल वापस ले लिए।
वीडियो में उनकी आवाज़ यह कहते हुए सुनाई देती है—“हट एक तरफ, कंबल यहीं छोड़ दे।” इसके बाद वहां मौजूद कई लोग असहज दिखाई देते हैं, और कार्यक्रम स्थल पर गहमागहमी जैसी स्थिति बन जाती है।
“मेरा कार्यक्रम पर्सनल है, मोदी को गाली देने वालों को कंबल नहीं मिलेगा”
वीडियो में एक अन्य क्षण में पूर्व सांसद को यह कहते सुना गया है कि यह कार्यक्रम किसी सरकारी योजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि उनका निजी आयोजन है। उन्होंने कहा कि “जो लोग मोदी को गाली देते हैं, उन्हें कंबल लेने का हक नहीं है। चाहे किसी को बुरा लग जाए, लेकिन बात सीधी है।”
स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने पूर्व सांसद को इस बयान पर आपत्ति जताई और बताया कि गरीबों के लिए रखे गए वितरण कार्यक्रम को धर्म के आधार पर विभाजित करना अनुचित है। लेकिन जोनापुरिया का कहना था कि यह आयोजन उनका व्यक्तिगत योगदान है और वे अपनी शर्तों पर कंबल वितरित करेंगे।
घटना के बाद राजनीतिक माहौल गरमाया
वीडियो वायरल होते ही घटना ने राजनीतिक रूप ले लिया। सोशल मीडिया पर लोग कार्यक्रम की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं और इसे समाज में साम्प्रदायिक विभाजन की कोशिश बता रहे हैं।
कांग्रेस ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एम.डी. चौपदार ने कहा कि यह वीडियो भाजपा नेताओं की मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के साथ इस तरह का भेदभाव भाजपा की ओछी सोच का प्रतीक है।
चौपदार ने कहा कि कंबल जैसी छोटी वस्तु के लिए किसी के धर्म के आधार पर भेदभाव करना अत्यंत निंदनीय है और यह घटना यह दर्शाती है कि सत्ता से बाहर होने के बाद भी भाजपा नेता समाज में विभाजन फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय समाज में भी नाराजगी, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
करेड़ा बुजुर्ग और आसपास के गांवों में रहने वाले स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी है। उनके अनुसार, कंबल-वितरण जैसे मानवीय और सामाजिक कार्यों में भेदभाव की कोई जगह नहीं हो सकती। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच की जाए और यदि किसी प्रकार का धार्मिक आधार पर भेदभाव साबित होता है, तो उचित कार्रवाई की जाए।
बीजेपी नेतृत्व की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
घटना के राजनीतिक रूप से बढ़ने के बावजूद राजस्थान भाजपा नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। हालांकि भाजपा से जुड़े कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि वीडियो को संदर्भ से हटकर प्रस्तुत किया गया है, लेकिन इसकी पुष्टि या खंडन पार्टी द्वारा औपचारिक रूप से नहीं किया गया है। इस बीच, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को विधानसभा और सड़क दोनों स्तरों पर उठाने की तैयारी में हैं।


