राजस्थान की राजनीति शनिवार को तब गर्मा गई जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में विपक्ष के शोर-शराबे के बीच कांग्रेस सरकार के पांच साल और भाजपा शासन के दो वर्षों की विस्तृत तुलना पेश की। हंगामें के बीच शुरू हुए उनके भाषण में उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमें चुनौती दी थी कि अल्बर्ट हॉल पर चर्चा करें। हमने इस चुनौती को लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच—राजस्थान विधानसभा—में स्वीकार करते हुए दो वर्षों में किए गए कार्यों की पूरी सूची सदन में रख दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस बार-बार आरोप लगाती रही है, लेकिन सत्य यह है कि उनके शासन में बड़े स्तर पर ठहराव, भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की राजनीति ने विकास को गंभीर रूप से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष बहस से भाग रहा है और सदन में संगठित तरीके से गतिरोध पैदा कर रहा है।
एजेंडा पहले तय था, फिर भी नहीं आए पूर्व मुख्यमंत्री: CM का तंज
सीएम भजनलाल ने कहा कि इस बहस का एजेंडा कार्य सलाहकार समिति में पहले ही तय हो चुका था। इसके बावजूद विपक्ष चुप बैठा रहा और बहस के दौरान भी जिम्मेदारी नहीं निभाई। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस अपनी उपलब्धियों को लेकर इतनी आश्वस्त थी, तो उनके पूर्व मुख्यमंत्री बहस में शामिल होते और बताते कि उन्होंने पांच साल में क्या किया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने ही रिकॉर्ड से डरती है, क्योंकि सच यह है कि उन्होंने ऐसे अनेक वादे किए जिन पर कभी कोई खर्च नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार हर मोर्चे पर विफल रही और जनता को भ्रमित करने की कोशिश की।
घोषणाओं में भाजपा सरकार आगे, कांग्रेस के अधूरे वादों पर निशाना
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि भाजपा सरकार ने दो बजट में कुल 2,719 घोषणाएं की हैं। इनमें से 919 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1,531 पर तेजी से काम चल रहा है। केवल 10 प्रतिशत घोषणाएं ऐसी हैं जिन पर काम अभी शुरू होना बाकी है।
इसके उलट, कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में 4,148 घोषणाएं की गई थीं, लेकिन उनमें से केवल 1,935 यानी मात्र 47 प्रतिशत ही पूरी हो पाईं। 2,208 घोषणाओं पर कोई काम नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि कौन-सी सरकार वास्तव में काम कर रही है और कौन-सी सरकार केवल घोषणाएं कर जनता को गुमराह करती रही।
नेता प्रतिपक्ष पर टिप्पणी: कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों का आरोप
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में आपसी मतभेद चरम पर हैं। गोविंद सिंह डोटासरा का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वे अपने ही नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं देते। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसा हो चुका है और इस बार भी विपक्ष नेता को बोलने से रोक दिया गया। इसके बाद सदन में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने माइक बंद करने का आरोप लगाया, जिस पर विवाद और बढ़ गया।
विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप कर गतिरोध खत्म करने की कोशिश की
सदन में लगातार बढ़ते तनाव के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी सदस्यों को अपने चैंबर में बुलाकर सहमति बनाने का प्रयास किया, मगर समाधान नहीं निकल सका। इसके चलते बहस के दौरान कई बार सदन में व्यवधान उत्पन्न हुआ।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर कांग्रेस का व्यवहार देश के अपमान जैसा: मुख्यमंत्री
सीएम शर्मा ने एआई समिट के अंतरराष्ट्रीय मंच पर कांग्रेस नेताओं के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि यह व्यवहार देश के सम्मान के विपरीत था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा सेना, चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती रही है, और वही प्रवृत्ति अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी दिखाई दी।
भाजपा बनाम कांग्रेस: सीएम ने ऐसे पेश किए आंकड़े
सीएम शर्मा ने सदन में कई आंकड़े पेश किए जिनसे दोनों सरकारों की कार्यशैली का अंतर स्पष्ट होता है।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस राज में 626 घोषणाएं ऐसी थीं, जिन पर एक रुपये का भी खर्च नहीं हुआ। इसके विपरीत भाजपा सरकार ने दो साल में 90 प्रतिशत घोषणाओं की स्वीकृति जारी कर दी है। इनमे से 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुके हैं या जमीन पर काम चल रहा है।
भर्ती परीक्षाओं की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पेपरलीक और फर्जीवाड़े पर कड़ा रुख अपनाया है। दो वर्षों में पेपरलीक, फर्जी डिग्री, डमी अभ्यर्थी और भर्ती अनियमितताओं से जुड़े 140 एफआईआर दर्ज किए गए और 420 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि दो वर्षों में 351 परीक्षाएं बिना किसी पेपरलीक के सफलतापूर्वक आयोजित की गईं।
तकनीकी संसाधनों के वितरण में भी भाजपा सरकार आगे रही। मुख्यमंत्री ने बताया कि दो वर्षों में 88,724 टैबलेट और लैपटॉप वितरित किए गए, जबकि कांग्रेस सरकार ने एक भी नहीं दिया। ऊर्जा उत्पादन के आंकड़ों में भी भाजपा सरकार को बढ़त मिली। उनके अनुसार भाजपा के दो वर्षों में 7,395 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि कांग्रेस के पांच साल में यह आंकड़ा सिर्फ 3,952 मेगावाट तक सीमित रहा।


