राजस्थान की राजनीति में शुक्रवार का दिन अत्यधिक उथल-पुथल भरा रहा। राजस्थान विधानसभा में “2 साल बनाम 5 साल” की बहस शुरू होने से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सदन की कार्यवाही को बार-बार बाधित होते देखा गया और अंततः इसे तीन बार स्थगित करना पड़ा। विपक्ष का आरोप था कि सरकार पूर्व में हुए निर्णय से मुकर रही है, जबकि सत्ता पक्ष का तर्क था कि विपक्ष अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहता है।
प्रतिवेदन पर चर्चा को लेकर शुरू हुआ विवाद
हंगामे की शुरुआत तब हुई जब संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने सरकार के प्रतिवेदन 2024–25 और 2025–26 पर चर्चा का प्रस्ताव सदन में रखा। प्रस्ताव रखते ही विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि BAC की बैठक में स्पष्ट तौर पर तय किया गया था कि चर्चा सरकार के दो साल और पिछली सरकार के पांच साल के कामकाज की तुलना पर होगी, न कि प्रतिवेदन के सिर्फ आंकड़ों पर।
जूली का आरोप था कि सरकार “असली मुद्दे” यानी विकास, योजनाओं और सुशासन की तुलना से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार प्रतिवर्तन पर ही चर्चा कराना चाहती है, तो यह सहमति का उल्लंघन होगा।
डोटासरा और जोगाराम पटेल के बीच तीखी नोकझोंक
स्थिति तब और गरमाई जब स्पीकर द्वारा नियम 263 का हवाला दिए जाने के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और मंत्री जोगाराम पटेल के बीच तीखी बहस छिड़ गई। प्रतिवादों और तर्कों के बीच सदन का माहौल शोर-शराबे में बदल गया। बहस के दौरान कई बार सदस्यों ने एक-दूसरे पर बोलना शुरू कर दिया, जिसके चलते कार्यवाही प्रभावित हुई और स्पीकर को इसे स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा।
राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म पर भी विवाद
हंगामा तब और बढ़ गया जब गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म बोलने के लिए खड़े हुए। इस पर डोटासरा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बेढ़म राज्य मंत्री हैं, कैबिनेट का हिस्सा नहीं, इसलिए इस बहस में उनका बोलना उचित नहीं है। यह कहते ही विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। सदन का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया और कार्यवाही एक बार फिर बाधित हो गई।
“मुख्यमंत्री के बयान की अनदेखी” का आरोप
डोटासरा ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि स्वयं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सदन में “2 साल बनाम 5 साल” की बहस की चुनौती स्वीकार की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार इस पर चर्चा नहीं कराती है, तो यह मुख्यमंत्री के सार्वजनिक बयान की अनदेखी होगी। डोटासरा ने कहा कि सरकार प्रतिवेदन के आंकड़ों के सहारे जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है और यह “पर्ची सरकार” की कार्यशैली जैसा है।
बेढ़म का पलटवार, कहा– कांग्रेस भ्रमित और हतोत्साहित
सत्ता पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा कि कांग्रेस हतोत्साहित और दिशाहीन हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। बेढ़म ने कहा कि अध्यक्ष द्वारा रखे गए प्रस्ताव पर चर्चा होनी चाहिए, और सरकार जनता के प्रति पूरी तरह जवाबदेह है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने स्वयं अपना प्रतिवेदन पेश नहीं किया, इसलिए दोष सरकार पर मढ़ना अनुचित है।
नेता प्रतिपक्ष की दोहराई मांग— CM खुद पेश करें रिपोर्ट कार्ड
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने यह दावा किया कि सदन के पेज 127–128 पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह अपनी सरकार के दो साल और पिछली सरकार के पांच साल की तुलना के लिए तैयार हैं। जूली के अनुसार, चर्चा के केंद्र में जनता के काम, कानूनों की स्थिति, योजनाओं के क्रियान्वयन और समग्र सुशासन का मूल्यांकन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं सदन में दो साल का रिपोर्ट कार्ड पेश करें और निष्पक्ष तुलना करें।
कार्यवाही तीन बार स्थगित, विवाद बरकरार
लगातार हंगामे, नारेबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और तीखी शब्दों की मारामारी के चलते विधानसभा की कार्यवाही दिनभर प्रभावित रही। तीन बार कार्यवाही स्थगित करने के बावजूद भी विवाद थम नहीं सका। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए हैं, और “2 साल बनाम 5 साल” की बहस फिलहाल राजनीतिक टकराव का केंद्र बनी हुई है। सदन में यह बहस कब और किस प्रारूप में शुरू होगी, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता हुआ दिख रहा है।


