latest-newsदेश

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी अंत तक फाइनल, अप्रैल से लागू

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी अंत तक फाइनल, अप्रैल से लागू

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को घोषणा की कि भारत – अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी के अंत तक अंतिम रूप ले लेगा। उन्होंने बताया कि मार्च माह में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे और अप्रैल से यह समझौता पूरी तरह लागू हो जाएगा। इस समझौते को भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को व्यापक और संतुलित बनाएगा।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार 23 फरवरी से भारत और अमेरिका के अधिकारी अमेरिका में तीन दिनों तक अहम बैठक करेंगे। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य 7 फरवरी को जारी संयुक्त बयान के आधार पर समझौते का विस्तृत कानूनी ड्राफ्ट तैयार करना है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मंत्रालय के चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन करेंगे। इस बैठक के बाद समझौते की औपचारिक प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

टैरिफ में बड़ी कटौती, निर्यातकों को राहत

इस अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ में उल्लेखनीय कमी की गई है। अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान पर लगने वाला टैक्स 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है। यह निर्णय भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

टैरिफ में 25 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक की कमी का आधिकारिक आदेश जल्द जारी होने की उम्मीद है। इससे विशेष रूप से भारत के कपड़ा, चमड़ा और रत्न-आभूषण जैसे श्रमप्रधान क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। ये सेक्टर लंबे समय से अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण दबाव में थे। नई दरों के लागू होने से भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और निर्यात में वृद्धि की संभावना मजबूत होगी।

कृषि और GM फूड पर स्पष्ट रुख

7 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया था कि भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में किसी प्रकार की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत ने अपने किसानों के हितों को प्राथमिकता दी है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस समझौते के तहत जेनेटिकली मॉडिफाइड फूड को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। यह निर्णय खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। मंत्री के अनुसार यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर के विशाल अमेरिकी बाजार तक पहुंच को सुगम बनाएगा।

इसके अतिरिक्त भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 50 हजार करोड़ डॉलर के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है। यह संतुलित व्यापार संबंधों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाने पर जोर

दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई है कि वे नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए स्पष्ट नियम तय करेंगे। नॉन-टैरिफ बैरियर्स वे अवरोध होते हैं जो सीधे कर नहीं होते, लेकिन व्यापार प्रक्रिया को जटिल बना देते हैं। उदाहरण के तौर पर अमेरिकी मेडिकल डिवाइस कंपनियों को भारत में मूल्य निर्धारण नियमों और पंजीकरण में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

नए समझौते में इन प्रक्रियात्मक अड़चनों को सरल बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि व्यापार का लाभ सीधे दोनों देशों को मिले और किसी तीसरे देश को अनुचित लाभ न पहुंचे। यह प्रावधान द्विपक्षीय व्यापार को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा।

ब्रिटेन और ओमान के साथ भी समझौते लागू होने की तैयारी

भारत केवल अमेरिका के साथ ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भी व्यापारिक समझौतों को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रैल में यूनाइटेड किंगडम के साथ हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने की उम्मीद है। पिछले वर्ष जुलाई में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ था, जिसके तहत भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटेन में जीरो ड्यूटी पर प्रवेश मिलेगा। बदले में भारत ब्रिटेन से आने वाली कारों और स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क में कमी करेगा।

इसी तरह ओमान के साथ भी अप्रैल से व्यापार समझौता प्रभावी होने की संभावना है। ओमान ने भारत के 98 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर जीरो ड्यूटी की पेशकश की है। इससे खाड़ी देशों के बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच और मजबूत होगी। यह समझौता विशेष रूप से इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण और रसायन क्षेत्र के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

वैश्विक व्यापार रणनीति की दिशा में बड़ा कदम

भारत की यह रणनीति स्पष्ट संकेत देती है कि देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका को सुदृढ़ करने की दिशा में सक्रिय है। अमेरिका, ब्रिटेन और ओमान जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ व्यापार समझौते भारत के निर्यात आधार को विविध और मजबूत बनाएंगे। टैरिफ में कटौती, नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाने और बाजार पहुंच बढ़ाने जैसे कदम भारतीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने का अवसर देंगे।

आगामी महीनों में इन समझौतों के लागू होने से भारत की अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समझौतों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो भारत का निर्यात प्रदर्शन नए रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में स्थायित्व आएगा।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading