राजस्थान विधानसभा में बुधवार को सियासी तापमान उस समय और बढ़ गया, जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार सवा दो वर्षों के अपने कार्यकाल में सुधार करने के बजाय विसंगतियों को बढ़ावा दे रही है और सदन में तथ्यों को छिपाकर विधानसभा को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब देने के बजाय सरकार गोलमोल बातें कर रही है।
जनजातीय विकास विभाग में टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
टीकाराम जूली ने जनजातीय विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले सवा दो वर्षों से विभाग में नियमित टेंडर प्रक्रिया बंद है। इसके स्थान पर बजट की राशि सीधे हॉस्टल वार्डनों के खातों में डाली जा रही है, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। उन्होंने इसे प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ जाती है।
उन्होंने एक ही वस्तु घी की खरीद का उदाहरण देते हुए कहा कि कहीं 400 रुपये प्रति लीटर तो कहीं 800 रुपये प्रति लीटर तक भुगतान किया गया है। जूली के अनुसार यह भारी मूल्य अंतर इस बात का संकेत है कि खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हैं। उन्होंने इसे आदिवासी बच्चों के अधिकारों पर सीधा प्रहार बताया और कहा कि इस मुद्दे पर संबंधित मंत्री सदन में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
विश्वविद्यालयों में ‘विमर्श शुल्क’ पर घमासान
नेता प्रतिपक्ष ने विश्वविद्यालयों में प्रति छात्र वसूले जा रहे 1000 रुपये के तथाकथित ‘विमर्श शुल्क’ को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि इस शुल्क के जरिए करीब 225 करोड़ रुपये एकत्रित किए गए हैं, लेकिन सरकार यह स्पष्ट नहीं कर पा रही कि यह विमर्श आखिर है क्या और कहां आयोजित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में अलग-अलग समयावधि के आंकड़े पेश कर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई।
टीकाराम जूली ने कहा कि जब इतने बड़े पैमाने पर छात्रों से शुल्क वसूला गया है, तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करे। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था में अनावश्यक बोझ डालने वाला कदम बताया।
जल जीवन मिशन पर पुराने कार्यों को नया बताने का आरोप
जल जीवन मिशन को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कोटपूतली और गंगानगर से जुड़े सवालों पर मंत्रियों के पास कोई ठोस जवाब नहीं था। जूली के अनुसार वर्ष 2024-25 में एक भी नई स्वीकृति जारी नहीं की गई, इसके बावजूद पुराने कार्यों को नया बताकर पेश किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ सदन को गुमराह करने का प्रयास है, बल्कि जनता के साथ भी छल है। उन्होंने शहरी विकास एवं आवासन विभाग में भर्तियों और कथित विसंगतियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने इन सवालों पर भी स्पष्ट जवाब देने से बचने की कोशिश की।
बेटा-बेटी वाली टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज
सदन में बजट की तुलना बेटा-बेटी से किए जाने वाली टिप्पणी पर टीकाराम जूली ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि जिस विधानसभा में समानता, महिला अधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़े कानून बनाए जाते हैं, वहां इस प्रकार की टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच सत्ता पक्ष की मानसिकता को उजागर करती है।
उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया था, जबकि वर्तमान सत्ता पक्ष की सोच में अब भी भेदभाव नजर आता है।
कांग्रेस सड़क से सदन तक करेगी संघर्ष
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने के हर प्रयास के खिलाफ कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी सड़क से लेकर सदन तक हर मंच पर आवाज उठाती रहेगी। टीकाराम जूली ने कहा कि जनता सरकार की कार्यशैली को बारीकी से देख रही है और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।


