भारत में भुगतान प्रणाली ने पिछले कुछ वर्षों में जिस रफ्तार से आधुनिक रूप लिया है, वह दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है। एक समय था जब लोग नकद लेन-देन पर निर्भर रहते थे। धीरे-धीरे डेबिट और क्रेडिट कार्ड के चलन ने भुगतान को सरल बनाया और डिजिटल पेमेंट का विस्तार बढ़ा। लेकिन समय के साथ नई टेक्नोलॉजी ने इस व्यवस्था को एक नए मोड़ पर पहुंचाया और देश में UPI प्रणाली ने क्रांतिकारी बदलाव ला दिया।
मोबाइल फोन निकालकर क्यूआर कोड स्कैन करते ही कुछ ही पलों में पैसा दूसरे व्यक्ति के खाते में पहुंच जाना—इस सहजता ने लोगों की सोच, आदतों और भरोसे को पूरी तरह बदल दिया है। आज यह प्रणाली भारत में सबसे पसंदीदा भुगतान माध्यम बन चुकी है।
डिजिटल पेमेंट में तेज उछाल और यूपीआई की बढ़ती मौजूदगी
Ministry of Finance के वित्तीय सेवाओं के विभाग द्वारा जारी एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार, डिजिटल भुगतान और इसकी संरचना में पिछले वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल ट्रांजेक्शन लगभग 11 गुना तक बढ़ चुके हैं।
डिजिटल पेमेंट के कुल लेन-देन में यूपीआई की हिस्सेदारी 80% तक पहुंच गई है। यह दर्शाता है कि आज भारत में सबसे अधिक भरोसा जिस भुगतान प्रणाली पर किया जा रहा है, वह यूपीआई है। न सिर्फ आम लोग, बल्कि देशभर के व्यापारी भी इसे तेजी से अपना रहे हैं। यूपीआई क्यूआर कोड का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। पहले जहां देशभर में लगभग 9.3 करोड़ क्यूआर कोड प्रयुक्त किए जाते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 65.8 करोड़ हो गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि अब छोटे से लेकर बड़े व्यवसायी तक डिजिटल भुगतान को मुख्यधारा में शामिल कर रहे हैं।
फिनटेक कंपनियों और बैंकों की भागीदारी भी बढ़ी है। पहले जहां थर्ड-पार्टी ऐप प्रदाता की संख्या केवल 16 थी, अब यह बढ़कर 38 हो चुकी है। इससे पूरे डिजिटल भुगतान तंत्र की मजबूती और सुरक्षा में भी इज़ाफ़ा हुआ है।
युवा पीढ़ी बनी बदलाव की सबसे बड़ी ताकत
भारत में डिजिटल लेन-देन की बढ़ती रफ्तार में युवाओं की भूमिका सबसे अहम रही है। अध्ययन बताता है कि 18 से 25 वर्ष के युवाओं में यूपीआई का उपयोग 66% तक पहुंच चुका है। यह आयु वर्ग न केवल नई तकनीक को तेजी से अपनाता है, बल्कि उसकी सरलता और गति के कारण इसे दैनिक जीवन का हिस्सा भी बना चुका है।
युवाओं की डिजिटल समझ, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की आदतों ने मिलकर पेमेंट सिस्टम की दिशा पूरी तरह बदल दी है। जहां पहले भुगतान के लिए कार्ड या नकद पर निर्भरता थी, वहीं अब एक साधारण मोबाइल फोन ही सभी जरूरतें पूरी कर देता है।
यूपीआई की बढ़ती ताकत और भुगतान प्रणाली में बदलाव
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि भारत में कुल भुगतान लेन-देन में यूपीआई की हिस्सेदारी 57% तक पहुंच चुकी है, जबकि नकद भुगतान लगभग 38% पर आ गया है। यह उलटफेर देश की भुगतान प्रणाली में आता हुआ एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
लगभग 65% यूपीआई उपयोगकर्ताओं ने बताया कि वे दिन में कई बार डिजिटल भुगतान करते हैं। यह आदत न केवल सुविधा दर्शाती है, बल्कि डिजिटल प्रणाली पर बढ़ते भरोसे को भी मजबूत करती है। मार्च 2021 में जहां यूपीआई प्लेटफॉर्म पर 216 बैंक कार्यरत थे, वहीं मार्च 2025 तक यह संख्या बढ़कर 661 हो गई है। यह विस्तार दर्शाता है कि बैंकिंग सेक्टर भी इस परिवर्तन का समान रूप से हिस्सा बन चुका है और डिजिटल लेन-देन को प्राथमिकता दे रहा है।
कैश की घटती जरूरत और डिजिटल भरोसा
अध्ययन के अनुसार, यूपीआई और RuPay कार्ड का उपयोग करने के बाद 90% उपयोगकर्ताओं का डिजिटल भुगतान पर भरोसा काफी बढ़ा है। नकद का उपयोग कम हुआ है और लोग ATM से पैसे निकालने की आदत में भी कमी ला रहे हैं।
52% लोगों ने बताया कि उन्हें डिजिटल भुगतान में आकर्षित करने के पीछे कैशबैक एक बड़ा कारण था। वहीं 74% लोगों के अनुसार भुगतान की गति—यानी तुरंत पैसा ट्रांसफर होना—यूपीआई को अधिक लोकप्रिय बनाता है। यह रफ्तार, सुविधा और सुरक्षा ने लोगों का डिजिटल भुगतान की ओर विश्वास बढ़ाया है, जो भविष्य में नकद लेन-देन को और कम कर सकता है।
व्यापारियों के बीच भी यूपीआई की धूम
सिर्फ उपभोक्ताओं में ही नहीं, बल्कि व्यापारी वर्ग में भी यूपीआई तेजी से लोकप्रिय हुआ है। अध्ययन के अनुसार, लगभग 94% छोटे व्यापारी यूपीआई को अपना चुके हैं। लगभग 72% व्यापारियों ने यह स्वीकार किया कि डिजिटल भुगतान से उन्हें काम आसान करने में मदद मिली है। उन्हें न केवल लेन-देन की गति बढ़ने से सुविधा हुई, बल्कि रिकॉर्ड रखने, हिसाब-किताब संभालने और ग्राहक संतुष्टि में भी सुधार देखने को मिला है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 57% व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान अपनाने के बाद अपनी बिक्री में वृद्धि की पुष्टि की है। यह दर्शाता है कि यूपीआई न सिर्फ उपभोक्ताओं के लिए बल्कि व्यवसायों की वृद्धि के लिए भी एक बेहद प्रभावी साधन बन चुका है।
भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार दुनिया की सबसे तेज आर्थिक तकनीकी क्रांतियों में गिना जा रहा है। यूपीआई ने न केवल भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि लोगों के जीवन की गति, आदतों और भरोसे में निर्णायक बदलाव लाया है। युवाओं की भूमिका, व्यवसायों की भागीदारी, बढ़ते बैंकिंग नेटवर्क और तकनीकी मजबूती ने मिलकर यूपीआई को भुगतान का सबसे भरोसेमंद माध्यम बना दिया है। नकद पर निर्भरता लगातार घट रही है और डिजिटल भुगतान की पहुंच हर वर्ग तक बढ़ रही है।


