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मैग्नीशियम की कमी: बार-बार सिरदर्द, खराब नींद और मांसपेशियों की ऐंठन के पीछे छिपा एक बड़ा कारण

मैग्नीशियम की कमी: बार-बार सिरदर्द, खराब नींद और मांसपेशियों की ऐंठन के पीछे छिपा एक बड़ा कारण

आज की तेजी से बदलती जीवनशैली में कई बार शरीर जो संकेत देता है, उन्हें हम अक्सर सामान्य थकान या तनाव का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार होने वाला सिरदर्द, नींद का पूरा न होना और अचानक मांसपेशियों में ऐंठन जैसे लक्षण सिर्फ दिनभर की थकान नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व—मैग्नीशियम—की कमी की ओर भी संकेत करते हैं। यह खनिज शरीर में 300 से अधिक जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं में शामिल होता है। नसों के संदेश भेजने की प्रक्रिया, मांसपेशियों का सिकुड़ना और ढीलापन, दिल की धड़कन की लय और नींद को नियंत्रित करने वाले हार्मोन का निर्माण—इन सभी में मैग्नीशियम की प्रमुख भूमिका होती है। इसलिए इसकी कमी धीरे-धीरे कई शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकती है।

आधुनिक जीवनशैली और मैग्नीशियम की चुपचाप बढ़ती कमी

आज के समय में अनियमित आहार, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन, तनाव और नींद की कमी जैसी आदतें शरीर से मैग्नीशियम के स्तर को घटाने लगती हैं। यह खनिज नसों और मांसपेशियों की स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह न्यूरोमस्क्युलर सिस्टम को संतुलित रखता है और पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को नियंत्रित कर शरीर को शांत अवस्था में लाने में मदद करता है। जब शरीर में मैग्नीशियम का स्तर गिरता है, तो नसें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। इसका परिणाम लगातार सिरदर्द, मांसपेशियों में फड़कन, ऐंठन, थकान और कभी-कभी घबराहट जैसे लक्षणों के रूप में दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों में यह कमी लंबे समय तक बनी रहती है, उनमें कई प्रकार की न्यूरोमस्क्युलर समस्याएं उभर सकती हैं।

एक्सपर्ट्स की राय: नींद और सिरदर्द से गहरा संबंध

इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ बताते हैं कि मैग्नीशियम मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित करता है, जो नींद-जागरण चक्र को नियंत्रित करता है। जब शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने लगती है, तो नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। कई व्यक्तियों में यह कमी खराब नींद, नींद का टूटना या देर से नींद आने जैसे लक्षण पैदा कर सकती है। इसके अतिरिक्त, माइग्रेन और लगातार रहने वाले सिरदर्द का संबंध भी कम मैग्नीशियम स्तर से पाया गया है। यह खनिज ब्लड वेसल्स को स्थिर रखता है और न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन में सहायता करता है। इसकी कमी के बाद रक्त वाहिनियों में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे सिरदर्द होने की संभावना अधिक रहती है।

मैग्नीशियम की कमी के संकेत शरीर कैसे देता है

यदि शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने लगे, तो कई शुरुआती संकेत सामने आने लगते हैं। इनमें सबसे सामान्य संकेत मांसपेशियों में खिंचाव और रात के समय पैरों में ऐंठन है। यह इसलिए होता है क्योंकि मांसपेशियों की कोशिकाओं में कैल्शियम संकुचन को बढ़ावा देता है, जबकि मैग्नीशियम उन्हें ढीला करने का काम करता है। जब दोनों के बीच संतुलन बिगड़ता है, तो मांसपेशियां तनाव में आकर स्पाज्म या ऐंठन पैदा कर सकती हैं। लगातार मानसिक तनाव भी इस स्थिति को और खराब कर देता है। तनाव के दौरान शरीर से मैग्नीशियम का उत्सर्जन बढ़ जाता है, जिससे इसकी कमी गहराती जाती है। कई लोगों में यह कमजोरी, थकान, मूड स्विंग और हार्मोनल असंतुलन जैसे द्वितीयक लक्षणों का कारण बन सकता है।

कौन लोग होते हैं अधिक जोखिम में

हालांकि मैग्नीशियम की कमी किसी को भी प्रभावित कर सकती है, लेकिन कुछ समूहों में जोखिम अधिक पाया गया है। डायबिटीज से जूझ रहे व्यक्तियों में शरीर की चयापचय प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं, जिससे मैग्नीशियम का स्तर कम हो सकता है। अत्यधिक कैफीन और शराब का सेवन भी शरीर से इस खनिज के उत्सर्जन को बढ़ा देता है। जो लोग पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित रहते हैं—जैसे IBS या उल्टी-दस्त—उनमें अवशोषण कम होने के कारण मैग्नीशियम की कमी आम है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति में इन जोखिम कारकों के साथ-साथ बार-बार सिरदर्द, ऐंठन या नींद की समस्या दिखाई देती है, तो इसे सामान्य थकान समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।

आहार में सुधार से कमी को कैसे पूरा किया जा सकता है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय में किसी भी प्रकार के सप्लीमेंट की शुरुआत करने से पहले आहार में सुधार सबसे महत्वपूर्ण कदम है। मैग्नीशियम के प्राकृतिक स्रोत शरीर के लिए अधिक सुरक्षित और स्थायी रूप से उपयोगी होते हैं। कद्दू के बीज, बादाम, पालक, दालें, चिया सीड्स और साबुत अनाज ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनमें मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। नियमित रूप से इनका सेवन शरीर में खनिज संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

यदि लक्षण गंभीर हों या आहार के बावजूद सुधार न दिखाई दे, तो डॉक्टर की सलाह से ही सप्लीमेंट लेना उचित माना जाता है। स्वयं से सप्लीमेंट शुरू करना हमेशा जोखिमपूर्ण हो सकता है, क्योंकि अधिक मात्रा में मैग्नीशियम शरीर पर अलग प्रकार का दबाव डाल सकता है।

तेजी से बदलती जीवनशैली में कई बार हमारा शरीर जो संकेत देता है, उन्हें अनजाने में नजरअंदाज कर दिया जाता है। सिरदर्द, नींद का खराब होना और मांसपेशियों में ऐंठन जैसे सामान्य दिखने वाले लक्षण कई बार मैग्नीशियम की कमी के प्रारंभिक संकेत होते हैं। समय रहते इन संकेतों को समझना और अपने आहार व जीवनशैली में सुधार करना काफी मददगार हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, तनाव नियंत्रण और नियमित दिनचर्या अपनाकर मैग्नीशियम की कमी को काफी हद तक रोका जा सकता है। यह न सिर्फ नींद और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मांसपेशियों और हृदय के सामान्य कार्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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